वर्ष 1915-16 के दौरान भारत में होमरूल लीग आंदोलन की शुरुआत दो अलग-अलग धाराओं में हुई, जिसका नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने किया। तिलक ने अप्रैल 1916 में बेलगाम में अपनी लीग की स्थापना की, जिसका कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक तक सीमित था। वहीं, एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में मद्रास में अखिल भारतीय होमरूल लीग शुरू की, जिसका विस्तार शेष भारत में था। इन दोनों लीगों का मुख्य उद्देश्य संवैधानिक तरीकों से ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर 'स्वशासन' प्राप्त करना था। इस आंदोलन ने भारतीय जनता में नई चेतना जगाई और तिलक का प्रसिद्ध नारा "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" इसी दौरान अत्यंत लोकप्रिय हुआ।