लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जागरूकता फैलाने के लिए 1881 में 'केसरी' और 'मराठा' नामक दो समाचार-पत्र प्रारंभ किए। 'केसरी' मराठी भाषा में था, जिसने आम जनता में क्रांतिकारी चेतना जगाई, जबकि 'मराठा' अंग्रेजी में प्रकाशित होता था। इन पत्रों के माध्यम से तिलक ने ब्रिटिश नीतियों की कड़ी आलोचना की, जिसके कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। इन्होंने स्वराज की मांग को जन-आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।