आधुनिक भारत में प्रेस का विकास (UPPCS) (भाग – 1)

Total Questions: 50

21. निम्नलिखित में से किसने सोम प्रकाश नामक समाचार-पत्र शुरू किया? [I.A.S. (Pre) 2007]

Correct Answer: (b) ईश्वर चंद्र विद्यासागर
Solution:

सोम प्रकाश समाचार-पत्र की शुरुआत ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने 1858 में की थी। इस पत्र का मुख्य उद्देश्य नील की खेती करने वाले किसानों के हितों की रक्षा करना और सामाजिक सुधारों (जैसे विधवा पुनर्विवाह) को बढ़ावा देना था। यह बंगाली भाषा में प्रकाशित होने वाला एक साप्ताहिक समाचार-पत्र था। लॉर्ड लिटन द्वारा लाए गए वर्नाकुलर प्रेस एक्ट (1878) का सबसे पहला शिकार 'सोम प्रकाश' ही बना था, जिसके कारण इसे कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था।

22. निम्न अखबारों में से कौन-सा मुख्यतया उदारवादियों की नीतियों का प्रचारक था? [47th B.P.S.C. (Pre) 2005]

Correct Answer: (b) लीडर
Solution:

'दि फ्री प्रेस जनरल' का प्रकाशन 1928 ई. में एस. सदानंद के संपादन में हुआ। 'न्यू इंडिया' की स्थापना एनी बेसेंट ने की थी। लीडर समाचार- पत्र के माध्यम से उदारवादी अपनी नीतियों का प्रचार करते थे।

23. 'इंडियन ओपीनियन' पत्रिका के प्रथम संपादक थे- [U.P.P.C.S. (Pre) 2014]

Correct Answer: (d) मनसुखलाल नज़र
Solution:

'इंडियन ओपीनियन' पत्रिका के प्रथम संपादक मनसुखलाल नजर थे। इसकी स्थापना महात्मा गांधी द्वारा 1903 में दक्षिण अफ्रीका में की गई थी। यद्यपि गांधीजी इसके मुख्य मार्गदर्शक थे, लेकिन इसके पहले संपादक का कार्यभार मनसुखलाल नजर ने संभाला था, जो गांधीजी के एक करीबी सहयोगी थे। इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध आवाज़ उठाना और वहां के भारतीय समुदाय को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। यह पत्रिका गुजराती, हिंदी, तमिल और अंग्रेजी भाषाओं में प्रकाशित होती थी ताकि यह विभिन्न भाषाई समुदायों तक पहुँच सके।

24. महात्मा गांधी द्वारा दक्षिण अफ्रीका में प्रकाशित समाचार-पत्र का नाम क्या था? [Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2018]

Correct Answer: (a) दि इंडियन ओपीनियन
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

25. निम्नलिखित में से किस भाषा में 'दि इंडियन ओपीनियन' पत्र नहीं छापा जाता था? [U.P. P.C.S. (Pre) 2005]

Correct Answer: (d) उर्दू
Solution:

'इंडियन ओपीनियन' महात्मा गांधी द्वारा दक्षिण अफ्रीका से वर्ष 1903 में प्रारंभ की गई समाचार पत्र थी, जिसके प्रथम संपादक मनसुखलाल हीरालाल नज़र थे। वह नटाल कांग्रेस के सचिव थे। यह समाचार पत्र गुजराती, हिंदी, तमिल और अंग्रेजी में प्रकाशित होती थी।

26. एक साप्ताहिक के रूप में यंग इंडिया का शुभारंभ किया था- [U.P. Lower Sub. (Pre) 2003]

Correct Answer: (a) होमरूल पार्टी ने
Solution:

'यंग इंडिया' 7 मई, 1919 से महात्मा गांधी के पर्यवेक्षण में बंबई से द्विसाप्ताहिक के रूप में प्रकाशित होता था। यहां के प्रारंभिक संस्करणों में जमनादास द्वारकादास तथा शंकरलाल बैंकर इसके संपादक रहे। 8 अक्टूबर, 1919 से यंग इंडिया के संपादक महात्मा गांधी बने और यह अहमदाबाद से साप्ताहिक रूप में प्रकाशित होने लगा। जमनादास द्वारकादास तथा शंकरलाल बैंकर, एनी बेसेंट की होमरूल लीग के सदस्य थे।

27. हिंदी का पहला समाचार-पत्र 'उदत्त मार्तंड' (30 मई, 1826) प्रकाशित हुआ था - [U.P.P.C.S (Mains) 2016]

Correct Answer: (a) कोलकाता से
Solution:

हिंदी का पहला समाचार-पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' (30 मई, 1826) कलकत्ता (अब कोलकाता) से प्रकाशित हुआ था। इसके संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल थे, जो मूल रूप से कानपुर के रहने वाले थे। यह एक साप्ताहिक पत्र था, जो हर मंगलवार को प्रकाशित होता था। 'उदन्त' का अर्थ है 'समाचार' और 'मार्तण्ड' का अर्थ है 'सूर्य'। यानी इसका पूरा मतलब था "समाचारों का सूर्य"। इस पत्र के प्रकाशन की तिथि (30 मई) को ही भारत में प्रतिवर्ष 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस पत्र में उस समय की खड़ी बोली का प्रयोग किया जाता था, जिसे इसके संपादक ने 'मध्यदेशीय भाषा' कहा था।

28. भारतीयों द्वारा अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित प्रथम समाचार-पत्र था- [U.P. P.C.S. (Mains) 2006]

Correct Answer: (a) हिंदू पैट्रियाट
Solution:

किसी भी भारतीय द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित प्रथम समाचार-पत्र गंगाधर भट्टाचार्य का साप्ताहिक 'बंगाल गजट' था। दिए गए विकल्पों में हिंदू पैट्रियाट भारतीयों द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित प्रथम समाचार-पत्र था। इसका प्रकाशन 1853 ई. में हुआ। इस समाचार-पत्र के प्रथम संपादक गिरीशचंद्र घोष (1853-55 ई.) थे। हरिश्चंद्र मुखर्जी (1855-61 ई.) एवं क्रिस्टोपाल दास (1861-1884 ई.) भी इसके संपादक रहे थे। उनकी सहायता मदन मोहन घोष एवं द्वारकानाथ टैगोर जैसे प्रख्यात नेता कर रहे थे। 1874-75 ई. के बीच लंदन में तथा 1878 ई. में दिल्ली में इस पत्र के संवाददाता सुरेंद्रनाथ बनर्जी थे। बाद में ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन ने इसे खरीद लिया। अब यह भूस्वामियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने लगा और राष्ट्र हितों से अलग हो गया।

29. नील आंदोलन का जमकर समर्थन करने वाले 'हिंदू पैट्रियाट' के संपादक थे- [U.P. P.C.S. (Pre) 1998 & U.P.P.S.C. (GIC) 2010]

Correct Answer: (b) हरिश्चंद्र मुखर्जी
Solution:

नील आंदोलन की एक खास बात यह थी कि बंगाल के उस समय के बुद्धिजीवियों ने भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाई थी और संघर्षरत किसानों के समर्थन में सशक्त अभियान चलाया था। नील आंदोलन इतिहास में अपनी मांगों को लेकर किए गए आंदोलनों में सर्वाधिक व्यापक और जुझारू था। बंगाल का नील विद्रोह शोषण के विरुद्ध किसानों की सीधी लड़ाई थी।

'हिंदू पैट्रियाट' के संपादक हरिश्चंद्र मुखर्जी ने तो इस आंदोलन में काफी काम किया। हिंदू पैट्रियाट के पहले दो वर्षों (1853-55 ई.) में गिरीशचंद्र घोष संपादक थे। 1855 ई. में हरिश्चंद्र मुखर्जी इसके संपादक हो गए। वह निर्भीकता से बागान-मालिकों के अत्याचारों की पोल खोलने तथा सताए हुए किसानों की सहायता में लगे रहे। 1861 ई. में क्रिस्टोदास पाल इसके संपादक बने। वह ब्रिटिश शासन के प्रशंसक थे और ब्रिटिश उदारवाद का प्रतिपादन करते थे। उनके प्रभाव में हिंदू पैट्रियाट उच्च-मध्यम वर्गीय बंगाली जमींदारों के हितों का प्रतिनिधित्व करता था।

30. अंग्रेजी साप्ताहिक 'वंदे मातरम्' के साथ निम्नांकित में से किसने अपने को संबद्ध किया? [U.P. P.C.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (a) अरबिंद घोष
Solution:

अंग्रेजी साप्ताहिक 'वंदे मातरम्' के साथ मुख्य रूप से अरबिंदो घोष ने स्वयं को संबद्ध किया था। इसकी शुरुआत विपिन चंद्र पाल ने अगस्त 1906 में की थी। इसके संपादन का मुख्य कार्यभार अरबिंदो घोष ने संभाला था। उन्होंने ही इस पत्र के माध्यम से 'पूर्ण स्वराज' के विचार को पहली बार सशक्त रूप से जनता के सामने रखा। यह एक उग्र राष्ट्रवादी समाचार-पत्र था, जिसने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया और युवाओं में देशभक्ति का संचार किया।

• वंदे मातरम् (अंग्रेजी साप्ताहिक): भारत (कलकत्ता) में अरबिंदो घोष और विपिन चंद्र पाल द्वारा।
• वंदे मातरम् (पेरिस से): मैडम भीकाजी कामा द्वारा (पेरिस, फ्रांस से प्रकाशित)।
• वंदे मातरम् (जनेवा/बर्लिन से): लाला हरदयाल द्वारा।