ऊष्मा और ऊष्मागतिकी (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 18

1. निम्न में से किस विद्युत उपकरण का कार्य सिद्धांत जूल के तापन नियम पर आधारित है? [RRC Group D 13/09/2022 (Morning)]

Correct Answer: (a) इमर्शन रॉड
Solution:
  • जूल के ताप का नियम - वह दर जिस पर परिपथ में प्रतिरोध विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
  • जूल का प्रथम नियम किसी चालक के बीच विद्युत धारा प्रवाहित करने से उत्पन्न ऊष्मा के बीच संबंध को दर्शाता है।
  • H = I2RT । विद्युत चुंबक एक ऐसा उपकरण है जिसमें एक कॉइल (कुंडली) से घिरे चुंबकीय पदार्थ का कोर होता है
  • जिसके माध्यम से कोर को चुम्बकित करने के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।
  • विद्युत घंटी एक सरल परिपथ है जो बटन को दबाकर परिपथ के पूरा होने पर ध्वनि उत्पन्न करती है।
  • जूल का तापन नियम
    • जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating) कहता है
    • किसी प्रतिरोधक में प्रवाहित विद्युत धारा से उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के समानुपाती होती है।
    • सूत्र: H=I^2 Rt, जहाँ H ऊष्मा (जूल में), I धारा (एम्पियर), R प्रतिरोध (ओम) और t समय (सेकंड) है।
    • यह विद्युत धारा के तापीय प्रभाव को दर्शाता है, जो ओम के नियम (V = IR) से व्युत्पन्न होता है।
  • आधारित उपकरण
    • निमज्जन छड़ (इमरशन रॉड): पानी आदि तरल को गर्म करने के लिए उच्च प्रतिरोध वाली छड़ में धारा प्रवाहित होती है, जो जूल नियम से ऊष्मा उत्पन्न करती है।
    • इलेक्ट्रिक हीटर/आयरन: निकल-क्रोम तार में धारा से गर्मी बनती है, जो वस्तुओं को गर्म करती है।
    • टोस्टर/गिजर: भोजन या पानी गर्म करने के लिए समान सिद्धांत।
    • फ्यूज: अतidhारा पर पिघलकर सुरक्षा प्रदान करता है।

2. बल्बों में प्रयुक्त टंगस्टन फिलामेंट का गलनांक क्या होता है? [RRB NTPC CBT-1 (01/03/2021) Evening]

Correct Answer: (b) 3422 °C
Solution:
  • टंगस्टन (या वोल्फ्राम) का गलनांक सबसे अधिक होता है। इस प्रकार, टंगस्टन फिलामेंट पिघलता नहीं है
  • भले ही फिलामेंट के माध्यम से धारा प्रवाहित होने के कारण बड़ी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न हो।
  • यह असाधारण रूप से मजबूत और प्रकृति में भंगुर है।
  • इसमें किसी भी धातु की तुलना में उच्चतम उच्च तापमान शक्ति और सबसे कम तापीय विस्तार गुणांक है।
  • टंगस्टन का गलनांक
    • टंगस्टन (W, परमाणु संख्या 74) की शुद्ध धातु का मानक गलनांक 3410-3422°C माना जाता है
    • जो स्रोतों के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।
    • यह तापमान फिलामेंट को 2500-3000°C तक गर्म होने पर भी पिघलने से बचाता है, जिससे प्रकाश उत्पन्न होता है।
  • बल्ब में उपयोग का कारण
    • उच्च गलनांक के कारण फिलामेंट जूल तापन से उत्पन्न ऊष्मा (H = I²Rt) सहन कर लेता है बिना पिघले।
    • कम प्रतिरोधकता होने पर भी पतला-लंबा तार बनाकर प्रतिरोध बढ़ाया जाता है।
    • जंग प्रतिरोधी और उच्च तन्यता प्रदान करता है।

3. इनमें कौन सा विद्युत उपकरण जूल के तापन के नियम पर आधारित नहीं है? [RRB NTPC CBT - 1 (06/04/2021) Morning]

Correct Answer: (d) बिजली प्लग एवं स्विच
Solution:
  • जूल का तापन नियम - जब नाइक्रोम तार जैसे उच्च प्रतिरोध वाले तार से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है
  • तो उच्च प्रतिरोध वाला तार बहुत गर्म हो जाता है और हीट उत्पन्न करता है।
  • अनुप्रयोग - विद्युत परिपथ में प्रयुक्त फ्यूज, विद्युत इस्त्री, विद्युत केतली।
  • जूल नियम आधारित उपकरण
    • इलेक्ट्रिक आयरन: प्लेट को गर्म करने के लिए।
    • इलेक्ट्रिक हीटर: तार से ऊष्मा उत्पन्न।
    • इलेक्ट्रिक बल्ब: फिलामेंट चमकने तक गर्म।
    • इलेक्ट्रिक केतली: पानी उबालने के लिए।
    • टोस्टर: ब्रेड टोस्ट करने हेतु।
    • फ्यूज: अतिधारा पर पिघलकर सुरक्षा।
  • प्लग-स्विच क्यों नहीं
    • ये धारा को नियंत्रित करने के लिए धातु संपर्कों का उपयोग करते हैं
    • ऊष्मा उत्पादन मुख्य उद्देश्य नहीं। सामान्य उपयोग में ये ठंडे रहते हैं
    • अधिक धारा पर ही थोड़ी गर्मी हो सकती है, लेकिन सिद्धांत यांत्रिक है।
    • अन्य उपकरणों की तुलना में ये ताप प्रभाव पर निर्भर नहीं।

4. एक बिजली संयंत्र, जहाँ बिजली बनाने के लिए टर्बाइन को चलाने हेतु भाप बनाने के लिए आवश्यक ऊष्मा जलते हुए ईंधन से प्राप्त की जाती है, उसे............. कहा जाता है। [RRB JE 23/05/2019 (Morning)]

Correct Answer: (d) ताप विद्युत संयंत्र
Solution:
  • नाभिकीय विद्युत संयंत्र परमाणु रिएक्टर के भीतर परमाणु तत्वों के परमाणुओं के विभाजित होने से उत्पन्न ऊष्मा से बिजली का उत्पादन करता है।
  • इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहा जाता है। जल विद्युत संयंत्र ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत है
  • जो किसी नदी या अन्य जल निकाय के प्राकृतिक प्रवाह को बदलने के लिए बांध या डायवर्जन संरचना का उपयोग करके बिजली उत्पन्न किया जाता है।
  • सौर विद्युत संयंत्र एक ऐसी सुविधा है जो प्रकाश, ऊष्मा से बने सौर विकिरण को बिजली में परिवर्तित करती है।
  • कार्य सिद्धांत
    • ताप विद्युत संयंत्र रैंकाइन चक्र पर आधारित होता है। कोयला/ईंधन बॉयलर में जलता है
    • पानी को उच्च दाब-तापमान वाली भाप बनाता है। यह भाप टरबाइन के ब्लेड घुमाती है
    • जो यांत्रिक ऊर्जा जनरेटर को देती है। भाप फिर कंडेंसर में ठंडी होकर पुनर्चक्रित होती है।
  • मुख्य घटक
    • बॉयलर: ईंधन दहन से भाप उत्पादन।
    • टरबाइन: भाप से घूर्णन।
    • जनरेटर: यांत्रिक से विद्युत ऊर्जा।
    • कंडेंसर: भाप को पानी में बदलना।
    • कूलिंग टावर: अतिरिक्त ऊष्मा विसर्जन।
  • विशेषताएँ
    • भारत में अधिकांश बिजली (लगभग 70%) ताप संयंत्रों से आती है
    • जैसे मुंद्रा, विंध्याचल। दक्षता 30-40% होती है, प्रदूषण अधिक।
    • यह संयंत्र कोयला खदानों के पास स्थापित होते हैं ताकि परिवहन लागत कम हो।

5. वह न्यूनतम ताप क्या है, जिस पर किसी ईंधन को गर्म करने पर वह आग पकड़ लेता है और जलने लगता है? [RRB JE 25/05/2019 (Evening)]

Correct Answer: (a) प्रज्वलन ताप
Solution:
  • सामान्य क्वथनांक वह तापमान है जिस पर वाष्प का दाब मानक समुद्र-स्तरीय वायुमंडलीय दाब के बराबर होता है।
  • समुद्र तल पर, पानी 100° C (212° F) पर उबलता है।
  • शरीर का औसत सामान्य तापमान आमतौर पर 98.6°F (37° C) माना जाता है।
  • प्रज्वलन तापमान की परिभाषा
    • प्रज्वलन ताप वह न्यूनतम तापमान है जहाँ पदार्थ की सतह से ज्वलनशील वाष्प निकलने लगती हैं
    • ऑक्सीजन की उपस्थिति में चिंगारी या ऊष्मा से दहन प्रारंभ हो जाता है।
    • प्रत्येक ईंधन का यह तापमान निश्चित होता है
    • कम ताप पर जलना असंभव। उदाहरण: कागज का ~230-250°C, कोयले का ~400°C।
  • महत्व और विशेषताएँ
    • आदर्श ईंधन: निम्न प्रज्वलन ताप (आसानी से जलता), उच्च ऊष्मा मूल्य।
    • सुरक्षा: कारखानों में कम प्रज्वलन ताप वाले पदार्थ (पेट्रोल ~40°C) से सावधानी।
    • अंतर: फ्लैश पॉइंट (वाष्प आग पकड़ने का न्यूनतम ताप) और स्वतःप्रज्वलन ताप (बिना चिंगारी के जलना) से भिन्न।

6. निम्नलिखित में से उस पदार्थ की पहचान करें, जिसकी विशिष्ट उष्मा धारिता उच्चतम होती है। [RRB ALP Tier - II (21/01/2019) Morning]

Correct Answer: (c) जल
Solution:
  • विशिष्ट ऊष्मा - यह किसी पदार्थ के एक ग्राम का तापमान एक सेल्सियस डिग्री बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा है।
  • जल की विशिष्ट ऊष्मा - 4.186 जूल/ग्राम °C। एल्युमीनियम (AI) परमाणु संख्या 13 - एल्युमीनियम का घनत्व अन्य सामान्य धातुओं की तुलना में स्टील के घनत्व से लगभग एक तिहाई कम होता है।
  • केरोसिन इसे पैराफिन या पैराफिन तेल भी कहा जाता है, एक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन तरल पदार्थ है जिसे आमतौर पर ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • पानी (H₂O) की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (specific heat capacity) सभी सामान्य पदार्थों में सबसे अधिक होती है।
  • ठोस, द्रव या गैस अवस्था में तुलना करने पर भी जल का मान 4.18 J/g°C (25°C पर द्रव अवस्था में) उच्चतम है।
  • विशिष्ट ऊष्मा धारिता क्या है
    • विशिष्ट ऊष्मा धारिता वह ऊष्मा मात्रा है जो 1 ग्राम पदार्थ के 1°C तापमान वृद्धि के लिए आवश्यक होती है।
    • सूत्र: c=Q/mΔT, जहाँ Q ऊष्मा, m द्रव्यमान, ΔT तापमान परिवर्तन। यह पदार्थ की पहचान है।
  • क्यों उच्च है पानी की
    • पानी के अणुओं में हाइड्रोजन बंधन ऊष्मा को अवशोषित करते हैं बिना तापमान बढ़ाए
    • जो जलवायु नियंत्रण में सहायक है। ठोस धातुओं (जैसे सोना 0.129, सीसा 0.13) से 30 गुना अधिक।
    • यही कारण है कि समुद्र तापमान स्थिर रखते हैं।

7. तापमान को केल्विन स्केल से सेल्सियस स्केल में बदलने के लिए, आपको यह करना होगाः [RRB Group D 19/09/2018 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) दिए गए तापमान से 273 घटाएं
Solution:
  • सूत्र (केल्विन को सेल्सियस में परिवर्तित करने के लिए), C = K - 273।
  • ताप मापकः माप के सुपरिभाषित पैमानों के अनुसार तापमान को थर्मामीटर के माध्यम से मापा जाता है।
  • तीन सबसे सामान्य ताप पैमाने फ़ारेनहाइट, सेल्सियस और केल्विन हैं। ताप का SI मात्रक केल्विन होता है।
  • सेल्सियस पैमाने पर जल का हिमांक 0°C और क्वथनांक 100°C होता है।
  • फ़ारेनहाइट पैमाने पर, जल का हिमांक 32°F और क्वथनांक 212°F होता है।
  • केल्विन स्केल से सेल्सियस स्केल में तापमान बदलने के लिए दिए गए केल्विन मान से 273 घटाना होता है। सूत्र है: 〖^∘〗"C"="K"-273 (या सटीक रूप से 273.15)।
  • रूपांतरण सूत्र
    • केल्विन (K) स्केल का शून्य बिंदु सेल्सियस के -273°C पर होता है, इसलिए रूपांतरण सरल घटाव है।
    • 〖^∘〗"C"="K"-273.15, जहाँ K केल्विन मान है। व्यावहारिक गणनाओं में अक्सर 273 लिया जाता है।
  • उदाहरण
    • 300 K: 300-273=27^∘ "C" (मानव शरीर तापमान के निकट)।
    • 373 K: 373-273=100^∘ "C" (पानी का क्वथनांक)।
    • 0 K: 0-273=-273^∘ "C" (परम शून्य)।
  • अन्य दिशा में
    • सेल्सियस को केल्विन में बदलने के लिए: "K" =^∘ "C"+273
    • यह रूपांतरण भौतिकी में ऊष्मा, गैस नियमों (जैसे आदर्श गैस समीकरण PV = nRT) में उपयोगी है।

8. ठोस के पिघलने के दौरान, इसका तापमान.............| [RRB Group D 22/09/2018 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) परिवर्तित नहीं होता है
Solution:
  • परिवर्तित नहीं होता है। संलयन की गुप्त ऊष्मा किसी पदार्थ के एक इकाई द्रव्यमान को उसके तापमान को बदले बिना उसके गलनांक पर ठोस से तरल अवस्था में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा है।
  • संलयन की गुप्त ऊष्मा की SI इकाई जूल प्रति किलोग्राम (J/kg) है।
  • कारण
    • ठोस जब अपने गलनांक (melting point) पर पहुँचता है
    • तो दी गई ऊष्मा कणों के बीच आकर्षण बल तोड़ने में खर्च होती है
    • जिसे गुप्त ऊष्मा (latent heat of fusion) कहते हैं।
    • तापमान नहीं बढ़ता क्योंकि ऊष्मा अवस्था परिवर्तन (ठोस → द्रव) में लगती है।
  • उदाहरण
    • बर्फ का गलनांक 0°C: पूरी बर्फ पिघलने तक तापमान 0°C पर स्थिर।
    • मोम या धातु: गलनांक पर समान तापमान बनाए रखता है।
  • प्रक्रिया चित्र
    • तापमान ↑
    •     |
    • | तरल गर्म होना
    •     |
    • -----*-------- पूरी तरह पिघलना (स्थिर ताप)
    •     |
    • | ठोस गर्म होना
    •     |
    • समय →

9. समय t के दौरान तार में विद्युत धारा द्वारा उत्पन्न ऊष्मा............ द्वारा निर्धारित किया जाता है। [RRB Group D 23/09/2018 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) H = I²Rt
Solution:
  • H = I²Rt (जूल का समीकरण) जहाँ H उत्पन्न ऊष्मा है। I धारा प्रवाह है, R प्रतिरोध है और t समय है।
  • I धारा का तापीय प्रभाव - जब किसी चालक के माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है
  • तो चालक द्वारा प्रवाहित धारा में उत्पन्न बाधा के कारण यह ऊष्मा उत्पन्न करता है।
  • ऊष्मा की SI मात्रक - जूल। अनुप्रयोग - इलेक्ट्रिक आयरन, केतली, टोस्टर, हीटर, विद्युत फ्यूज।
  • जूल तापन नियम
    • जूल का तापन नियम कहता है कि प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा धारा (I) के वर्ग, प्रतिरोध (R) और समय (t) के गुणनफल के समानुपाती होती है।
    • सूत्र: H=I^2 Rt, जहाँ H जूल में ऊष्मा है।
    • यह इलेक्ट्रॉनों के परमाणुओं से टकराव से ऊर्जा के ताप रूपांतरण से आता है।
  • समकक्ष रूप
    • H=VIt (V = IR से व्युत्पन्न)
    • H=(V^2 t)/R
    • ये सभी विद्युत शक्ति P=VI=I^2 R को समय से गुणा करने से प्राप्त होते हैं।
  • कारण
    • तार में धारा प्रवाहित होने पर इलेक्ट्रॉन परमाणु जाल से टकराते हैं
    • गतिज ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है।
    • उच्च I, R या t से अधिक टकराव, अधिक ऊष्मा। हीटर, बल्ब आदि इसी पर कार्य करते हैं।

10. ..............विद्युत धारा के तापीय प्रभाव के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर आधारित नहीं है। [RRB Group D 24/09/2018 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) इलेक्ट्रिक घंटी
Solution:
  •  इलेक्ट्रिक घंटी : यह धारा के चुंबकीय प्रभाव के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • विद्युत धारा के तापीय प्रभाव के अनुप्रयोगः विद्युत आयरन, विद्युत टोस्टर, विद्युत ओवन, विद्युत हीटर, विद्युत बल्ब, विद्युत फ्यूज, आदि।
  • तापीय प्रभाव आधारित उपकरण
    • ये उपकरण जूल नियम H=I^2 Rt पर कार्य करते हैं:
    • इलेक्ट्रिक हीटर/आयरन: नाइक्रोम तार से गर्मी उत्पन्न।
    • फ्यूज: अतिधारा पर पिघलकर सुरक्षा।
    • बल्ब: टंगस्टन फिलामेंट तपकर प्रकाश देता।
    • इमरशन रॉड/टोस्टर: तरल/भोजन गर्म करना।
  • वैक्यूम क्लीनर क्यों नहीं
    • वैक्यूम क्लीनर मोटर पर आधारित है
    • जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा (फैन घुमाना) में बदलता है।
    • इसमें ताप उत्पादन उप-उत्पाद मात्र है
    • मुख्य कार्यसिद्धांत चुंबकीय प्रभाव (लोरेंट्ज बल) है। स्विच भी यांत्रिक संपर्क मात्र है।