कांग्रेस द्वारा भारत की 'पूर्ण स्वतंत्रता' (पूर्ण स्वराज) के लक्ष्य की घोषणा 1929 के लाहौर अधिवेशन में की गई थी। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक मोड़ था, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसी अधिवेशन में तय किया गया कि अब भारत का लक्ष्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर 'डोमिनियन स्टेटस' प्राप्त करना नहीं, बल्कि पूरी तरह से स्वतंत्र होना है। 31 दिसंबर, 1929 की आधी रात को रावी नदी के तट पर भारतीय तिरंगा फहराया गया और "पूर्ण स्वराज" का नारा बुलंद किया गया। इसी अधिवेशन में निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी, 1930 को पूरे देश में पहला 'स्वतंत्रता दिवस' मनाया जाएगा।