Solution:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का विभाजन स्वदेशी आंदोलन के तौर-तरीकों को लेकर उपजे विवाद के कारण हुआ था। यह ऐतिहासिक विभाजन 1907 के सूरत अधिवेशन में हुआ, जिसे 'सूरत की फूट' के नाम से भी जाना जाता है। नरम दल स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे। वहीं, गरम दल इसे पूरे भारत में फैलाना चाहते थे। नरम दल संवैधानिक तरीकों (प्रार्थना और याचिकाओं) में विश्वास रखते थे, जबकि गरम दल 'निष्क्रिय प्रतिरोध', विदेशी वस्तुओं के पूर्ण बहिष्कार और स्वदेशी को अपनाने पर जोर दे रहे थे।
• असहयोग आंदोलन (1920-22): गांधीजी के नेतृत्व में सरकारी संस्थाओं, विदेशी वस्तुओं और उपाधियों का त्याग कर शांतिपूर्ण ढंग से ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग न करने का राष्ट्रव्यापी अभियान।
• सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): दांडी मार्च के साथ शुरू हुआ, जिसमें नमक कानून तोड़ने के साथ ही सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों को अहिंसक रूप से मानने से इनकार कर दिया गया।
• भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 'करो या मरो' के नारे के साथ शुरू हुआ अंतिम राष्ट्रव्यापी आंदोलन, जिसका एकमात्र उद्देश्य ब्रिटिश शासन को तुरंत समाप्त कर स्वतंत्रता प्राप्त करना था।