कांग्रेस में गरम दल और नरम दल (UPPCS)

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21. उन्होंने मैजिनी, गैरिबॉल्डी, शिवाजी तथा श्रीकृष्ण की जीवनी लिखी; वे अमेरिका में कुछ समय के लिए रहे तथा वे केंद्रीय सभा के सदस्य भी निर्वाचित हुए। वे थे- [I.A.S. (Pre) 2018]

Correct Answer: (c) लाला लाजपत राय
Solution:

'पंजाब केसरी' के नाम से प्रसिद्ध भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय वर्ष 1907 में 6 माह के निर्वासन के दौरान कुछ समय के लिए अमेरिका में रहे और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वापस लौटे। राजनीतिज्ञ के साथ-साथ वह ओजस्वी लेखक भी थे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण, शिवाजी, स्वामी दयानंद सरस्वती, मैजिनी और गैरिबॉल्डी की संक्षिप्त जीवनियां भी लिखीं। 'अनहैप्पी इंडिया' और 'द स्टोरी ऑफ माई डिपोर्टेशन' उनकी अन्य महत्वपूर्ण रचनाएं हैं।

22. कांग्रेस सम्मेलनों को "शिक्षित भारतीयों का वार्षिक राष्ट्रीय मेला' किसने कहा था? [M.P.P.C.S. (Pre), 2021]

Correct Answer: (a) लाला लाजपत राय
Solution:

कांग्रेस सम्मेलनों को "शिक्षित भारतीयों का वार्षिक राष्ट्रीय मेला" की संज्ञा लाला लाजपत राय ने दी थी। लाला लाजपत राय ने अपनी पुस्तक 'यंग इंडिया' में यह भी लिखा था कि कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के हितों की रक्षा करना था, न कि भारत की स्वतंत्रता। यही कारण था कि उन्होंने इसे केवल एक 'मेला' माना जिसमें मध्यम वर्ग के शिक्षित लोग अपनी बात रखने के लिए जुटते थे।

कांग्रेस के प्रति अन्य प्रसिद्ध आलोचनात्मक टिप्पणियाँ:

• लाला लाजपत राय: "कांग्रेस सम्मेलन शिक्षित भारतीयों के वार्षिक राष्ट्रीय मेले हैं।"
• बाल गंगाधर तिलक: "यदि हम वर्ष में एक बार मेंढक की तरह टर्राएंगे, तो हमें कुछ नहीं मिलेगा।"
• अश्विनी कुमार दत्त: "कांग्रेस के अधिवेशन तीन दिनों का तमाशा हैं।"
• बंकिम चंद्र चटर्जी: "कांग्रेस के लोग पदों के भूखे राजनीतिज्ञ हैं।"
• लॉर्ड डफरिन: "कांग्रेस केवल सूक्ष्मदर्शी अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व करती है।

23. निम्न में कौन मध्यममार्गी नहीं था ? [U.P. P.C.S (Pre) 1995]

Correct Answer: (b) बाल गंगाधर तिलक
Solution:

कांग्रेस की प्रारंभिक उदारवादी अथवा मध्यममार्गी नीतियों से नव राष्ट्रवादियों के रूप में प्रसिद्ध लाल, बाल, पाल का मोह भंग हो गया। बाल गंगाधर तिलक इस नई विचारधारा के अग्रदूत थे। वे मध्यममार्गी न होकर उग्र नीतियों के समर्थक थे।

24. निम्नलिखित नेताओं में से कौन एक 'स्वदेशी' के समर्थक थे? [U.P. P.C.S. (Pre) 2009]

Correct Answer: (a) अरबिंद घोष
Solution:

अरविंद घोष स्वदेशी के सबसे प्रबल समर्थकों में से एक थे। यद्यपि 1905 के बंगाल विभाजन के बाद 'नरम दल' और 'गरम दल' दोनों ने स्वदेशी का समर्थन किया था, लेकिन अरविंद घोष, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और विपिन चंद्र पाल ने इसे एक राजनीतिक हथियार और 'आत्मनिर्भरता' के मार्ग के रूप में प्रचारित किया। उन्होंने अपने लेखों की श्रृंखला 'पैसिव रेजिस्टेंस' में स्पष्ट किया कि स्वदेशी को सफल बनाने के लिए ब्रिटिश वस्तुओं, स्कूलों, अदालतों और नौकरियों का पूर्ण बहिष्कार जरूरी है। स्वदेशी आंदोलन के दौरान उन्होंने 'बंगाल नेशनल कॉलेज' के प्रथम प्राचार्य के रूप में कार्य किया, ताकि भारतीय छात्रों को स्वदेशी शिक्षा मिल सके।

25. निम्नलिखित में से किसे "भारतीय अशांति के जनक" के रूप में जाना जाता है? [U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001]

Correct Answer: (c) लोकमान्य तिलक
Solution:

तिलक सेवा और बलिदान में विश्वास करते थे और उनमें सरकार की सत्ता को चुनौती देने का साहस था। यह उन्हीं के प्रयत्नों का परिणाम था कि कांग्रेस, सरकार की प्रशंसा करने वाली संस्था से बदलकर सरकार की आलोचक संस्था बन गई। एंग्लो इंडियन नौकरशाही उन्हें विद्रोही समझती थी। सर वैलेंटाइन शिरोल ने उन्हें भारत में 'अशांति का जन्मदाता' कहा था। तिलक शिरोल पर मानहानि का मुकदमा चलाने के उद्देश्य से इंग्लैंड गए थे। यद्यपि वे मुकदमा हार गए; किंतु इसका उचित प्रभाव हुआ।

26. बाल गंगाधर तिलक को किसने 'अशांति का जनक' कहा? [U.P. Lower Sub. (Pre) 2013]

Correct Answer: (c) वैलेंटाइन शिरोल
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

27. किसने कहा था, "तिलक भारतीय अशांति के जनक हैं"? [U.P. P.C.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (a) वी. शिरोल
Solution:

बाल गंगाधर तिलक को "भारतीय अशांति का जनक" प्रसिद्ध ब्रिटिश पत्रकार वेलेंटाइन शिरोल ने कहा था। शिरोल ने अपनी पुस्तक 'इंडियन अनरेस्ट' में तिलक की आलोचना करते हुए यह तर्क दिया था कि तिलक ही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष और विद्रोह की भावना को सबसे अधिक भड़काया है।

28. निम्नलिखित में से किसे 'भारतीय अशांति का जनक' कहा गया है? [U.P. P.C.S. (Mains) 2004]

Correct Answer: (a) बी.जी. तिलक को
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

29. बी.जी. तिलक को सजा के पश्चात् निम्नलिखित में से किसने दया की वकालत की थी और कहा था- [U.P.P.C.S. (Pre) 2014]

"संस्कृत के एक विद्धान के रूप में तिलक में मेरी दिलचस्पी है।"?

Correct Answer: (b) मैक्स मुलर
Solution:

बाल गंगाधर तिलक को 1908 में उनके अखबार 'केसरी' में राजद्रोहपूर्ण लेख लिखने के कारण 6 वर्ष के कड़े कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस सजा के बाद, प्रसिद्ध विद्वान मैक्स मूलर ने तिलक के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों से उनकी रिहाई और दया की अपील की थी। उन्होंने तिलक के लिए वकालत करते हुए अपना प्रसिद्ध तर्क दिया कि "संस्कृत के एक विद्वान के रूप में तिलक में मेरी बहुत गहरी दिलचस्पी है।" मैक्स मूलर का मानना था कि तिलक जैसे उच्च कोटि के संस्कृत विद्वान और वेदों के ज्ञाता के साथ जेल में एक सामान्य अपराधी की तरह व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। तिलक की प्रसिद्ध कृतियों, जैसे 'द ओरियन', ने मैक्स मूलर जैसे अंतरराष्ट्रीय विद्वानों को अत्यधिक प्रभावित किया था।

30. बाल गंगाधर तिलक 'लोकमान्य तिलक' के नाम से जाना जाने लगे, जब- [64th B.P.S.C. (Pre) 2018]

Correct Answer: (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
Solution:

ब्रिटिश सरकार ने बाल गंगाधर तिलक को पुणे के तत्कालीन प्लेग कमिश्नर 'डब्ल्यू.सी. रैंड' तथा लेफ्टिनेंट आयर्स्ट की हत्या के मामले में अभियुक्त बनाया। तिलक को दोषी पाया गया और उन्हें 18 माह के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। जब वे जेल से बाहर आए तो वे एक राष्ट्रीय नायक के रूप में उभरे। इस तरह किसी एक घटना नहीं बल्कि अनेक राष्ट्रवादी कार्यों के बाद तिलक को 'लोकमान्य' की उपाधि दी गई थी।