कांग्रेस सम्मेलनों को "शिक्षित भारतीयों का वार्षिक राष्ट्रीय मेला" की संज्ञा लाला लाजपत राय ने दी थी। लाला लाजपत राय ने अपनी पुस्तक 'यंग इंडिया' में यह भी लिखा था कि कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के हितों की रक्षा करना था, न कि भारत की स्वतंत्रता। यही कारण था कि उन्होंने इसे केवल एक 'मेला' माना जिसमें मध्यम वर्ग के शिक्षित लोग अपनी बात रखने के लिए जुटते थे।
कांग्रेस के प्रति अन्य प्रसिद्ध आलोचनात्मक टिप्पणियाँ:
• लाला लाजपत राय: "कांग्रेस सम्मेलन शिक्षित भारतीयों के वार्षिक राष्ट्रीय मेले हैं।"
• बाल गंगाधर तिलक: "यदि हम वर्ष में एक बार मेंढक की तरह टर्राएंगे, तो हमें कुछ नहीं मिलेगा।"
• अश्विनी कुमार दत्त: "कांग्रेस के अधिवेशन तीन दिनों का तमाशा हैं।"
• बंकिम चंद्र चटर्जी: "कांग्रेस के लोग पदों के भूखे राजनीतिज्ञ हैं।"
• लॉर्ड डफरिन: "कांग्रेस केवल सूक्ष्मदर्शी अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व करती है।