कार्य, ऊर्जा और शक्ति (भौतिक विज्ञान) (Part-II)

Total Questions: 37

21. इनमें से किसे न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है? [RRB ALP Tier - I (14/08/2018) Evening]

Correct Answer: (b) ऊर्जा
Solution:
  • ऊर्जा के संरक्षण का नियम: अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि ऊर्जा को बनाया या नष्ट नहीं किया जा सकता है।
  • इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। बल वह बाहरी कारक है
  • जो किसी पिंड पर कार्य करने पर पिंड की प्रारंभिक अवस्था को परिवर्तित करता है
  • बदलने का प्रयास करता है। संवेग एक गतिमान पिंड का गुण है
  • इसे पिंड के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • यह एक सदिश राशि है। कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। यह एक अदिश राशि है।
  • ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  • ऊर्जा संरक्षण का नियम
    • यह ऊष्मागतिकी का पहला नियम है, जो कहता है
    • बंद प्रणाली में कुल ऊर्जा स्थिर रहती है—केवल रूप परिवर्तन होता है।
    • जूलियस रॉबर्ट मेयर ने इसे प्रतिपादित किया।
    • आइंस्टीन ने E=mc^2 से पदार्थ-ऊर्जा समतुल्यता जोड़ी।
  • उदाहरण
    • पेंडुलम: गतिज से स्थितिज ऊर्जा रूपांतरण, कुल स्थिर।
    • बल्ब: विद्युत → प्रकाश + ताप, नष्ट नहीं।

22. गतिशील वस्तु की गतिज ऊर्जा (KE) किस पर निर्भर करती है? [RRB ALP Tier - I (14/08/2018) Evening]

Correct Answer: (b) द्रव्यमान और वेग
Solution:
  • द्रव्यमान और वेग। किसी वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं।
  • गतिज ऊर्जा = 1/2 mv², जहाँ m द्रव्यमान और v वेग है।
  • किसी पिंड का गतिज ऊर्जा की मात्रा उसके वेग और द्रव्यमान पर निर्भर करती है।
  • गतिज ऊर्जा का सूत्र
    • गतिज ऊर्जा KE=1/2 mv^2 है, जहाँ m वस्तु का द्रव्यमान और v उसका वेग है।
    • द्रव्यमान बढ़ने पर रैखिक वृद्धि, वेग दोगुना होने पर ऊर्जा चार गुनी (v^2 के कारण)।
  • निर्भरता का विश्लेषण
    • द्रव्यमान (m): भारी ट्रक की तुलना में हल्की गाड़ी कम KE रखती है।
    • वेग (v): 20 m/s वाली गेंद vs 40 m/s वाली - दूसरी की ऊर्जा 4 गुनी।
    • वेग का प्रभाव अधिक क्योंकि वर्ग रूप में।
    • निष्कर्ष: KE द्रव्यमान पर सीधे समानुपाती, वेग के वर्ग पर। यही कारण है दुर्घटनाओं में उच्च गति घातक।

23. किसी तने हुए रबर बैंड में किस प्रकार की ऊर्जा होती है? [RRB ALP Tier - I (14/08/2018) Evening]

Correct Answer: (c) स्थितिज ऊर्जा
Solution:
  • स्थितिज ऊर्जा (संग्रहीत ऊर्जा) - किसी वस्तु में उसकी स्थिति के कारण निहित ऊर्जा।
  • स्थितिज ऊर्जा (PE) = mgh। उदाहरण - तना हुआ रबर बैंड, छत पर पानी की टंकी।
  • उदाहरण - एक उड़ने वाला बेसबॉल, एक मेज से गिरने वाला टुकड़ा।
  • ऊष्मीय ऊर्जा तब उत्पन्न होती है जब किसी पदार्थ के परमाणु और अणु तापमान में वृद्धि के कारण तेज कंपन करते हैं।
  • उदाहरण - चूल्हे पर उबलता पानी, हीटर से निकलने वाली गर्मी।
  • अवधारणा
    • रबर बैंड को खींचने पर बाहरी बल कार्य करता है
    • जो रबर के अणुओं को विकृत स्थिति में लाता है। यह कार्य स्थितिज ऊर्जा के रूप में संग्रहीत हो जाता है।
    • सूत्र: U=1/2 kx^2, जहाँ k स्प्रिंग स्थिरांक और x विकृति है।
  • प्रक्रिया
    • खींचना: यांत्रिक कार्य → स्थितिज ऊर्जा संग्रह।
    • छोड़ना: स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा रूपांतरण (रबर बैंड कंपन करता है)।

24. यदि किसी वस्तु को एक वृत्त में घुमाया जाता है, तो उस पर किया गया कार्य _______ होता है। [RRB ALP Tier - I (17/08/2018) Evening]

Correct Answer: (c) शून्य
Solution:
  • जब किसी वस्तु को वृत्त में घुमाया जाता है तो उस पर किया गया कार्य शून्य होता है
  • क्योंकि उसकी गति के कारण उत्पन्न आकर्षण बल केंद्र की ओर होता है।
  • यदि वस्तु की गति के कारण कोण 90° है
  • तो कार्य (W) = F × d × cos θ, जहाँ θ = 90° होगा। चूँकि θ = 90°, तो cos 90° = 0 तो किया गया कार्य = 0
  • कारण
    • वृत्तीय गति में अभिकेंद्र बल हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है
    • जबकि विस्थापन स्पर्शरेखा (tangential) दिशा में होता है। इनके बीच कोण 90° होता है।
    • कार्य सूत्र W=F⋅d⋅cos⁡90^∘=0 से कार्य शून्य सिद्ध होता है।
  • पूर्ण चक्कर का प्रभाव
    • पूर्ण चक्कर में विस्थापन शून्य (प्रारंभिक और अंतिम बिंदु समान) भी होता है। बल के सभी सूक्ष्म कार्य रद्द हो जाते हैं।
  • महत्व
    • यह संरक्षण नियम दर्शाता है—कार्य शून्य होने से यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है, केवल दिशा बदलती है।

25. निम्नलिखित गतिविधियों में से किस में काम नहीं किया गया है? [RRB ALP Tier - I (20/08/2018) Morning]

Correct Answer: (c) अश्विन प्लेटफॉर्म पर खड़ा है।
Solution:
  • किया गया कार्य - किसी वस्तु पर कार्य करने वाले बल द्वारा किया गया
  • कार्य बल की दिशा में चली गई दूरी के गुणनफल के बराबर होता है।
  • कार्य में केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं होती।
  • अतः कार्य एक अदिश राशि है। कार्य की SI मानक जूल (J) है।
  • कार्य की शर्तें
    • भौतिकी में कार्य तभी होता है जब: बल लगे विस्थापन हो (बल की दिशा में) दीवार हिलती नहीं (s=0), इसलिए W=F×0=0。
  • भौतिकी सूत्र
    • W=F ⃗⋅s ⃗cos⁡θ
    • θ=90^∘: W=0
    • कुली का सिर पर बोझा भी शून्य (लंबवत बल, क्षैतिज विस्थापन)।
    • निष्कर्ष: दैनिक भाषा का "काम" भौतिकी के कार्य से भिन्न।

26. किसी संकुचित स्प्रिंग में सामान्य लंबाई के स्प्रिंग से अधिक ऊर्जा होती है क्योंकि स्प्रिंग संकुचित होने के कारण इसमें निम्न में से क्या होता है: [RRB ALP Tier - I (20/08/2018) Morning]

Correct Answer: (a) स्थितिज ऊर्जा
Solution:
  • वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु द्वारा अन्य वस्तुओं की सापेक्ष स्थिति के कारण संचयित की जाती है।
  • स्थितिज ऊर्जा (P.E.) = mgh, जहाँ m (द्रव्यमान किलोग्राम में), g (गुरुत्व के कारण त्वरण m/s² में) और h (ऊँचाई मीटर में)।
  • उदाहरण - छत पर पानी की टंकी। रासायनिक ऊर्जा - रासायनिक परमाणुओं या अणुओं के बीच बंध को तोड़ने और बनाने से उत्पन्न ऊर्जा।
  • ऊष्मीय ऊर्जा - अणुओं की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा।
  • प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा का कारण
    • स्प्रिंग को संकुचित करने पर प्रत्यास्थ प्रतिक्रिया बल के विरुद्ध कार्य किया जाता है।
    • यह कार्य स्प्रिंग के मोड़ों के विन्यास परिवर्तन के कारण प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। सूत्र: PE=1/2 kx^2, जहाँ k स्प्रिंग स्थिरांक और x संकुचन है।
  • ऊर्जा संचय प्रक्रिया
    • सामान्य स्थिति: x = 0, PE = 0
    • संकुचित स्थिति: x > 0, PE = ½kx² > 0
    • संकुचन बढ़ने पर x^2 के कारण ऊर्जा तीव्रता से बढ़ती है। छोड़ने पर यह गतिज ऊर्जा बन जाती है।
    • निष्कर्ष: संकुचन के कारण स्प्रिंग साम्य स्थिति में लौटने की क्षमता प्राप्त करती है, जो स्थितिज ऊर्जा के रूप में संग्रहीत रहती है।

27. 10 किलो वजन वाले सूटकेस को उठाकर एक प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री द्वारा किया गया कार्य है: [RRB ALP Tier - I (21/08/2018) Morning]

Correct Answer: (a) 0 J
Solution:
  • किया गया कार्य: बल के परिमाण को वस्तु द्वारा आरोपित बल की दिशा में तय की गई दूरी से गुणा किया जाता है।
  • SI मापक - जूल (1 जूल = 1 न्यूटन × 1 मीटर) (अदिश मात्रा)। किया गया कार्य (W) = F × s cosθ, जहाँ F = लगाया गया
  • बल, s = विस्थापन और θ = बल और विस्थापन के बीच का कोण।
  • यहाँ व्यक्ति कोई दूरी तय नहीं कर रहा है क्योंकि वह सिर्फ एक जगह सूटकेस उठाकर खड़ा हुआ है।
  • इसलिए, किया गया कार्य का मूल्य W=F⋅scos⁡θ=0W = F \cdot s \cos \theta = 0 जूल है।
  • कारण
    • यात्री खड़ा है, इसलिए सूटकेस का विस्थापन शून्य है। कार्य सूत्र W=F⋅s⋅cos⁡θ में s=0 होने से W=0 J।
    • वजन mg=10×9.8=98 N है, लेकिन कोई गति न होने से कार्य नहीं।
  • भौतिक स्पष्टीकरण
    • कार्य केवल तब होता है जब बल विस्थापन दिशा में कार्य करे। यहाँ यात्री स्थिर है—सिर्फ सूटकेस को पकड़े हुए।
    • यदि चलता तो क्षैतिज कार्य शून्य रहता (गुरुत्व बल लंबवत), लेकिन ऊर्ध्वाधर g.h होता।

28. किसी जलविद्युत गृह में, विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होने वाली ऊर्जा कौन सी है? [RRB ALP Tier - I (29/08/2018) Morning]

Correct Answer: (a) गतिज ऊर्जा
Solution:
  • गतिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी वस्त्र में उसकी गति के कारण होती है।
  • उदाहरण - एक व्यक्ति चल रहा है, एक फेंका हुआ बेसबॉल, एक मेज से गिरता हुआ एक टुकड़ा, एक विद्युत क्षेत्र में एक आवेशित कण।
  • ऊष्मीय ऊर्जा ठोस, तरल और गैसों में परमाणु अणुओं या आयनों, नामक छोटे कणों की गति का परिणाम है। ऊर्जा के लिए S.I. मापक - जूल (J)।
  • ऊर्जा रूपांतरण प्रक्रिया
    • बाँध में संग्रहीत जल की स्थितिज ऊर्जा टर्बाइन पर गिरते समय गतिज ऊर्जा में बदलती है।
    • यह गतिज ऊर्जा टर्बाइन को घुमाकर यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न करती है, जिसे जनरेटर विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करता है।
  • चरणबद्ध रूपांतरण
    • स्थितिज → गतिज: जल का गिरना।
    • गतिज → यांत्रिक: टर्बाइन घूर्णन।
    • यांत्रिक → विद्युत: जनरेटर क्रिया।
    • यह प्रक्रिया नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल है, कुल दक्षता 80-90% तक।

29. जब किसी बंदूक से गोली चलाई जाती है, तो इसकी संभावित स्थितिज ऊर्जा, किस में परिवर्तित हो जाती है: [RRB ALP Tier - I (29/08/2018) Evening]

Correct Answer: (b) गतिज ऊर्जा
Solution:
  • जब एक गोली चलाई जाती है, तो स्थितिज ऊर्जा के रूप में रासायनिक ऊर्जा गतिज ऊर्जा और ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है जिससे गोली बैरल से बाहर निकल जाती है।
  • यांत्रिक ऊर्जा - स्थितिज और गतिज ऊर्जा का योग।
  • गतिज ऊर्जा: वह ऊर्जा जो किसी वस्त्र में उसकी गति के कारण होती है। K.E. = 1/2mv²
  • उदाहरण: चलता हुआ एक व्यक्ति, एक उड़ता हुआ बेसबॉल, एक मेज से गिरता हुआ टुकड़ा
  • प्रक्रिया का विवरण
    • बंदूक के बारूद की रासायनिक ऊर्जा विस्फोट से गर्मी और दाब उत्पन्न करती है।
    • यह गोली को बैरल से बाहर धकेलता है, जिससे गोली को उच्च गतिज ऊर्जा प्राप्त होती है।
    • गोली की प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा (यदि कोई हो) तुच्छ होती है, मुख्यतः रासायनिक ऊर्जा ही गतिज रूप में बदलती है।
  • ऊर्जा परिवर्तन
    • बारूद (रासायनिक ऊर्जा) → गर्मी + दाब → गोली की गतिज ऊर्जा (½mv²)
  • गणना उदाहरण
    • 10 ग्राम गोली (0.01 kg), वेग 400 m/s:
    • KE=1/2×0.01×400^2=800 J
    • यह उच्च ऊर्जा लक्ष्य भेदने का कारण है।
  • लक्ष्य पर प्रभाव
    • गोली लक्ष्य से टकराने पर गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि और विकृति ऊर्जा में बदल जाती है। गोली और लक्ष्य दोनों गर्म हो जाते हैं।

30. एक खींचे हुए धनुष से तीर छोड़ते समय, धनुष की स्थितिज ऊर्जा किसमें बदल जाती है? [RRB ALP Tier - I (30/08/2018) Morning]

Correct Answer: (d) गतिज ऊर्जा
Solution:
  • गतिज ऊर्जा (K.E.) - यह ऊर्जा का एक रूप है जो किसी वस्तु को गति में रहने में मदद करता है
  • K.E.= 1/2 mv² जहाँ, m = द्रव्यमान और v = वेग, SI मापक (जूल)।
  • ऊष्मीय ऊर्जा - अणुओं की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा।
  • उदाहरण: बर्फ का पिघलना ओवन में बेक करना
  • प्रक्रिया
    • धनुष की डोरी खींचने पर प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (PE=1/2 kx^2) संचित होती है।
    • तीर छोड़ने पर स्प्रिंग-जैसे प्रत्यास्थ गुण धनुष को साम्य स्थिति में लाते हैं।
    • यह संचित ऊर्जा तीर को उच्च गति प्रदान करती है, जिससे गतिज ऊर्जा (KE=1/2 mv^2) बनती है।
  • ऊर्जा संरक्षण
    • खींचा धनुष: PE = अधिकतम, KE = 0
    • तीर छूटने पर: PE → 0, KE = अधिकतम
    • कुल यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित: PE_"प्रारंभ" =KE_"अंत" ।
  • भौतिकी आधार
    • धनुष प्रत्यास्थ सामग्री से बना होता है।
    • हुक का नियम: F=-kx (प्रत्यास्थ बल)।
    • कार्य-ऊर्जा प्रमेय: किया गया कार्य = ΔKE।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • तीर की रेंज धनुष की स्थितिज ऊर्जा पर निर्भर।
    • अधिक खींचने = अधिक PE = अधिक तीर गति = अधिक दूरी।
    • यह प्राचीन काल से धनुर्विद्या का मूल सिद्धांत है।