बिहार किसान सभा का नेतृत्व मुख्य रूप से स्वामी सहजानंद सरस्वती ने किया था। उनके साथ श्री कृष्ण सिंह, कार्यानंद शर्मा, राहुल सांकृत्यायन और यदुनंदन शर्मा जैसे दिग्गज नेता सक्रिय रूप से जुड़े थे। 1929 में गठित इस सभा ने जमींदारी शोषण के खिलाफ किसानों को एकजुट किया। इन नेताओं के सहयोग से यह संगठन इतना प्रभावशाली बना कि इसने आगे चलकर 1936 में 'अखिल भारतीय किसान सभा' की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।