गवर्नर/गवर्नर जनरल/वायसराय (UPPCS) (भाग – 1)

Total Questions: 50

21. लॉर्ड वेलेजली द्वारा लागू की गई सहायक संधि व्यवस्था के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन लागू नहीं होता? [I.A.S. (Pre) 2018]

Correct Answer: (c) कंपनी के लिए एक नियत आय का प्रबंध करना
Solution:

लॉर्ड वेलेजली ने भारतीय राज्यों को अंग्रेजी राजनैतिक परिधि में लाने के लिए सहायक संधि प्रणाली का प्रयोग किया। उस समय फ्रांस के विरुद्ध यूरोपीय शक्तियों का बना हुआ मोर्चा छिन्न-भिन्न हो चुका था। नेपोलियन मिस्र तथा सीरिया को विजित कर चुका था और गंभीरतापूर्वक भारत पर आक्रमण करने की सोच रहा था। ऐसी परिस्थिति में वेलेजली ने भारत में सहायक संधि प्रणाली का प्रयोग किया, जिससे अंग्रेजी सत्ता की श्रेष्ठता स्थापित हो गई और नेपोलियन का भय भी टल गया। सहायक संधि की शर्तों में एक शर्त यह भी थी कि संधि को स्वीकार करने वाली रियासत कंपनी की एक सेना को रखेगी, जिसका सारा खर्च राज्य को देना होगा। इस सेना को चलाने का अधिकार केवल कंपनी को होगा। सहायक संधि को स्वीकार करने वाला राज्य किसी भी यूरोपीय या अंग्रेजों के दुश्मनों की सहायता नहीं करेगा और उनके किसी भी व्यक्ति को नौकरी नहीं देगा।

22. लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि को स्वीकार करने वाला पहला मराठा सरदार था- [41th B.P.S.C. (Pre) 1996]

Correct Answer: (a) पेशवा बाजीराव II
Solution:

दौलतराव सिंधिया और जसवंत होल्कर दोनों पूना में अपने को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शित करना चाहते थे। बाजीराव द्वितीय, सिंधिया का साथ दे रहा था। उसने 1801 ई. में जसवंत के भाई की हत्या कर दी, परिणामस्वरूप जसवंत होल्कर की सेना ने पूना पर आक्रमण कर पेशवा और सिंधिया की संयुक्त सेना को परास्त कर दिया। बाजीराव द्वितीय ने भाग कर बसीन में शरण ली तथा 31 दिसंबर, 1802 को अंग्रेजों से 'बसीन की संधि' की। संधि के अनुसार, पेशवा बाजीराव द्वितीय ने अंग्रेजों की संरक्षकता स्वीकार कर ली। यह संधि मराठों द्वारा अंग्रेजों के साथ की गई प्रथम सहायक संधि थी।

23. 1802 की 'बसीन की संधि' पर हस्ताक्षर किसके मध्य हुए थे? [U.P. P.C.S. (Mains) 2012]

Correct Answer: (b) अंग्रेज तथा बाजीराव II
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

24. सहायक संधि को स्वीकार करने वाला पहला शासक था- [I.A.S. (Pre) 1994]

Correct Answer: (a) अवध का नवाब
Solution:

वेलेजली ने सहायक संधि का आविष्कार नहीं किया, इस प्रणाली का अस्तित्व पहले से ही था। संभवतः डूप्ले प्रथम यूरोपीय था, जिसने अपनी सेना किराए पर भारतीय राजाओं को दी थी। क्लाइव के काल से यह प्रणाली लगभग सभी गवर्नर जनरलों ने अपनाई थी। वेलेजली की विशेषता केवल यह थी कि उसने इसका विकास कर अपने संपर्क में आने वाले सभी देशी राजाओं के संबंधों में इसका प्रयोग किया। प्रथम सहायक संधि 1765 ई. में अवध से की गई, जब कंपनी ने निश्चित धन के बदले उसकी सीमाओं की रक्षा करने का वचन दिया और अवध ने एक अंग्रेज रेजीडेंट को लखनऊ में रखना स्वीकार किया।

नोट: यदि प्रश्न में वेलेजली की सहायक संधि को स्वीकार करने वाले प्रथम राज्य के बारे में पूछा जाए तो उत्तर हैदराबाद होगा।

25. सहायक संधि को किसके काल में क्रियान्वित किया गया? [U.P.P.C.S (Mains) 2011]

Correct Answer: (b) लॉर्ड वेलेजली
Solution:

सहायक संधि को मुख्य रूप से लॉर्ड वेलेजली के शासनकाल में क्रियान्वित किया गया था। लॉर्ड वेलेजली का भारत में कार्यकाल 1798 से 1805 ई. तक था। हालांकि इस संधि का विचार मूल रूप से फ्रांसीसी गवर्नर डुपले ने दिया था, लेकिन इसे एक विस्तृत और प्रभावी नीति के रूप में अंग्रेजों की ओर से वेलेजली ने ही लागू किया।

26. निम्न में से 'सहायक संधि' स्वीकार नहीं की थी- [U.P. P.C.S.(Spl) (Mains) 2004]

Correct Answer: (e) इस में से कोई नहीं
Solution:

लॉर्ड वेलेजली (1798-1805 ई.) ने भारतीय राज्यों को अंग्रेजी राजनीतिक परिधि में लाने के लिए सहायक संधि प्रणाली का प्रयोग किया। जिन राज्यों ने वेलेजली की सहायक संधि स्वीकार की, वे थे- हैदराबाद (1798 और 1800 ई.), मैसूर (1799 ई.), तंजौर (1799 ई.), अवध (1801 ई.), पेशवा (1802 ई.), बरार के भोंसले (1803 ई.), सिंधिया (1804 ई.), इंदौर के होल्कर 6 जनवरी, 1818, जोधपुर, जयपुर, मच्छेरी, बूंदी तथा भरतपुर। अतः प्रश्न में कोई भी विकल्प सही नही हैं।

27. सहायक संधि व्यवस्था को स्वीकार करने वाले प्रथम भारतीय देशी शासक कौन थे? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (b) हैदराबाद के निजाम
Solution:

सहायक संधि को स्वीकार करने वाले प्रथम भारतीय देशी शासक हैदराबाद के निजाम थे। उन्होंने 1798 ई. में लॉर्ड वेलेजली की इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। लॉर्ड वेलेजली (1798–1805) द्वारा लागू की गई सहायक संधि भारतीय रियासतों को ब्रिटिश नियंत्रण में लाने का एक राजनीतिक औजार थी।

इस संधि को स्वीकार करने वाले राज्यों ने अपनी सैन्य शक्ति और विदेश नीति का अधिकार खो दिया था। बदले में उन्हें ब्रिटिश 'रेजिडेंट' रखना पड़ता था जो धीरे-धीरे राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने लगा था।

28. निम्नलिखित पर विचार कीजिए, जिन्होंने लॉर्ड वेलेजली के साथ सहायक संधि की थी और उनके द्वारा किए गए संधियों का सही कालानुक्रम नीचे दिए हुए कूट से पता कीजिए- [U.P.P.C.S. (Mains) 2014]

(1) हैदराबाद
(2) मैसूर
(3) अवध
(4) सिंधिया
कूट :

Correct Answer: (a) 1, 2, 3, 4
Solution:
क्रमराज्यवर्ष
Iहैदराबाद1798
IIमैसूर1799
IIIअवध1801
IVसिंधिया1804

29. भारतीय राज्यों पर अंग्रेजी प्रभुत्व स्थापित करने के लिए किसने प्रशासन में सहायक संधि प्रणाली का सूत्रपात किया? [U.P.P.C.S (Mains) 2016]

Correct Answer: (b) लॉर्ड वेलेजली
Solution:

भारतीय राज्यों पर अंग्रेजी प्रभुत्व स्थापित करने के लिए प्रशासन में सहायक संधि प्रणाली का सूत्रपात लॉर्ड वेलेजली ने किया था। लॉर्ड वेलेजली 1798 से 1805 ई. तक भारत के गवर्नर जनरल रहे। उनका मुख्य उद्देश्य भारत में फ्रांसीसी प्रभाव को समाप्त करना और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत की सर्वोच्च शक्ति बनाना था।
इस संधि को स्वीकार करने वाले भारतीय शासकों को अपनी सुरक्षा के बदले कुछ कठोर शर्तें माननी पड़ती थीं। शासक को अपने राज्य में एक ब्रिटिश सेना की टुकड़ी रखनी होती थी, जिसका पूरा खर्च (नकद या राज्य का कुछ हिस्सा देकर) शासक को ही उठाना पड़ता था। इसके अलावा, राज्य की राजधानी में एक 'ब्रिटिश रेजिडेंट' तैनात किया जाता था, जो धीरे-धीरे राज्य के आंतरिक प्रशासन में हस्तक्षेप करने लगता था।

30. ईस्ट इंडिया कंपनी का राजपूत राज्यों से सहायक संधि करने का मुख्य उद्देश्य था- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992]

Correct Answer: (d) अंग्रेजों की प्रभुसत्ता स्थापित करना
Solution:

ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा राजपूत राज्यों के साथ सहायक संधि करने का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों की सर्वोच्चता स्थापित करना तथा मराठों एवं पिंडारियों के प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना था। राजपूत राज्य उस समय मराठों के आक्रमणों और भारी चौथ वसूली से त्रस्त थे, जबकि अंग्रेज इन राज्यों को एक "बफर जोन" के रूप में उपयोग करना चाहते थे।

संक्षेप में, अंग्रेजों का मुख्य उद्देश्य राजपूतों के प्रति सहानुभूति रखना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी राजनीतिक और सामरिक शतरंज का मोहरा बनाना था। इससे कंपनी को उत्तर-पश्चिम भारत में एक मजबूत सुरक्षा घेरा प्राप्त हुआ और मराठों की शक्ति को अंतिम रूप से कुचलने में सहायता मिली।