महात्मा गांधी ने परिवार नियोजन के लिए पूरी तरह से आत्म-नियंत्रण (Self-control) और ब्रह्मचर्य पर आधारित नैतिक दृष्टिकोण अपनाया था। वे कृत्रिम गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग के सख्त विरोधी थे, क्योंकि उनका मानना था कि ये साधन मनुष्य को इंद्रियों का गुलाम बनाते हैं और समाज में अनैतिकता फैलाते हैं। गांधीजी के अनुसार, संतानोत्पत्ति केवल वंश वृद्धि के उद्देश्य से होनी चाहिए। उन्होंने आत्म-संयम को ही जनसंख्या नियंत्रण और चरित्र निर्माण का एकमात्र श्रेष्ठ मार्ग बताया।