गुप्त एवं गुप्तोत्तर युग (UPPCS) (Part-3)

Total Questions: 50

21. गधैया था- [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (a) सिक्का
Solution:

गधैया एक प्रकार का रजत सिक्का था। इस सिक्के को ससैनियन सिक्कों के अनुकरणों पर चलाया गया था। पूर्व मध्यकाल के दौरान आठवीं-नौवीं शताब्दी से ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य ये सिक्के मुख्यतः पश्चिमी भारत में प्रचलन में थे।

22. पुलकेशिन-I का बादामी शिलालेख शक वर्ष 465 का दिनांकित है। यदि इसे विक्रम संवत् में दिनांकित करना हो, तो वर्ष होगा- [I.A.S. (Pre) 1997]

Correct Answer: (a) 601
Solution:

शक संवत् का प्रारंभ 78 ई. से माना जाता है तथा विक्रम संवत् का प्रारंभ 57 अथवा 58 ई.पू. निर्धारित किया गया है। अतः पुलकेशिन-I के बादामी शिलालेख को विक्रम संवत् से दिनांकित करने के लिए हमें वर्ष 465 में 78 और 58 को जोड़ना होगा। इस प्रकार 465 +58 + 78 = 601 विक्रम संवत् होगा।

23. मालव संवत् इस नाम से भी जाना जाता है- [M.P.P.C.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (b) कृत संवत्
Solution:

विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक प्रसिद्ध सम्राट माने जाते हैं, जिन्होंने 57 या 58 ई.पू. में 'विक्रम संवत्' अथवा विक्रम कैलेंडर की स्थापना की। विक्रम संवत् को कृत संवत् और मालव संवत् के रूप में भी जाना जाता था। भारत में ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ शक संवत् और विक्रम संवत् का प्रयोग भी किया जाता है।

24. एक चालुक्य अभिलेख के तिथि अंकन में शक संवत् का वर्ष 556 दिया हुआ है। इसका तुल्य वर्ष है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2002]

Correct Answer: (d) 634 ई.
Solution:

शक संवत् का प्रचलन कुषाणवंशीय शासक कनिष्क ने 78 ई. में किया था। यदि शक संवत् में 556 अंकित है, तो यह ईस्वी सन् में 556 + 78 = 634 ई. होगा।

25. पुराणों के अनुसार, चंद्रवंशीय शासकों का मूल स्थान था- [U.P.P.C.S. (Pre) 2009]

Correct Answer: (c) प्रतिष्ठानपुर
Solution:

पुराणों के अनुसार, चंद्र वंश (या सोम वंश) क्षत्रिय वर्ण के मूल वंशों में से एक था। चंद्रवंशीय शासकों का मूल स्थान त्रेतायुग में प्रयाग था: परंतु प्रलय के पश्चात द्वापर युग में चंद्रवंशीय संवारन ने प्रतिष्ठानपुर (वर्तमान झूसी, प्रयागराज) में राजधानी की स्थापना की थी।

26. मौखरि शासकों की राजधानी .... थी। [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (b) कन्नौज
Solution:

मौखरि गुप्तों के सामंत थे, जो मूलतः गया के निवासी थे। मौखरि शासकों (6ठी शताब्दी ईस्वी) की राजधानी कन्नौज (जिसे प्राचीन काल में कन्याकुब्ज या महोदयश्री कहा जाता था) थी। उत्तर प्रदेश में स्थित कन्नौज, गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत में एक प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति का केंद्र बना। इस वंश के प्रमुख शासक हरिवर्मा, आदित्यवर्मा, ईशानवर्मा, सर्ववर्मा एवं ग्रहवर्मा थे।

27. निम्नलिखित युग्मों में से कौन एक सही सुमेलित नहीं है ? [U.P. P.C.S. (Pre) 2022]

सूचि-Iसूचि-II
(a) सर्ववर्मनगया ताम्र-पत्र
(b) ईश्वरवर्मनजौनपुर प्रस्तर अभिलेख
(c) ईशानवर्मनहरहा पाषाण अभिलेख
(d) जीवित गुप्त IIदेव बर्नाक अभिलेख
Correct Answer: (a)
Solution:

सर्ववर्मन का ताम्र मुद्रा अभिलेख असीरगढ़ से प्राप्त हुआ है, न कि गया से। अतः विकल्प (a) सही सुमेलित नहीं है।

28. गुप्त वंश के पतन से लेकर आरंभिक सातवीं शताब्दी में हर्षवर्धन के उत्थान तक उत्तर भारत में निम्नलिखित में से किन राज्यों का शासन था? [I.A.S. (Pre) 2021]

1. मगध के गुप्त
2. मालवा के परमार
3. थानेसर के पुष्यभूति
4. कन्नौज के मौखरि
5. देवगिरि के यादव
6. वल्लभी के मैत्रक

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

Correct Answer: (b) 1, 3, 4 और 6
Solution:

छठी शताब्दी ई. के मध्य तक शक्तिशाली गुप्त साम्राज्य के पतन के फलस्वरूप भारतीय राजनीति में विकेंद्रीकरण तथा विभाजन की प्रवृत्तियां प्रारंभ हो गईं। इस दौरान अनेक स्थानीय सामंतों एवं शासकों ने अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी। गुप्त वंश के पतन से लेकर आरंभिक सातवीं शताब्दी में हर्षवर्धन के उत्थान तक उत्तर भारत में निम्नलिखित राज्यों का शासन था- 1. मगध के गुप्त, 2. थानेसर (थानेश्वर) के पुष्यभूति, 3. कन्नौज के मौखरि तथा 4. वल्लभी के मैत्रक अगर पूर्व एवं पश्चिम का विभाजन न करके केवल उत्तर एवं दक्षिण का विभाजन किया जाए, तो विकल्प (b) सही उत्तर है।

29. वर्धन राजवंश की स्थापना किसने की? [67th B.P.S.C. (Pre) (Re. Exam) 2022]

Correct Answer: (a) पुष्यभूति
Solution:

वर्धन राजवंश (जिसे पुष्यभूति वंश के नाम से भी जाना जाता है) की स्थापना पुष्यभूति ने की थी। ऐतिहासिक साक्ष्यों (जैसे बाणभट्ट की 'हर्षचरित') के अनुसार, पुष्यभूति शिव के अनन्य भक्त थे। यह राजवंश प्रारंभ में गुप्तों का सामंत रहा होगा, लेकिन हूणों के आक्रमण और गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद इन्होंने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया। प्रभाकरवर्धन के समय से यह वंश उत्तर भारत की एक प्रमुख शक्ति बनकर उभरा, लेकिन इसे अखिल भारतीय पहचान सम्राट हर्षवर्धन के काल में मिली, जिन्होंने कला, साहित्य और धर्म (विशेषकर बौद्ध धर्म) को भारी संरक्षण दिया।

वर्धन राजवंश की वंशावली:

राजा का नामविशेष विवरण
पुष्यभूतिवंश का संस्थापक (आदि पुरुष)
नरवर्धनप्रारंभिक राजा
राज्यवर्धन Iप्रारंभिक राजा
आदित्यवर्धनप्रारंभिक राजा
प्रभाकरवर्धनवास्तविक शक्ति का विस्तारक
हर्षवर्धनसाम्राज्य का चरमोत्कर्ष (अंतिम महान सम्राट)

30. हर्ष के समय की सूचनाएं किसकी पुस्तकों में निहित हैं? [U.P.P.C.S. (Pre) 1995]

Correct Answer: (b) कल्हण
Solution:

हर्ष के समय की विस्तृत सूचना इसके दरबारी कवि बाणभट्ट की कृति हर्षचरित से प्राप्त होती है। इससे जुड़ी कुछ सूचनाएं कल्हण कृति राजतरंगिणी में भी मिलती हैं। कालिदास एवं हरिषेण की रचनाओं में हर्ष से संबंधित किसी भी सूचना का उल्लेख नहीं है; क्योंकि ये हर्ष से पूर्व के काल के हैं।