गुप्त एवं गुप्तोत्तर युग (UPPCS) (Part-3)

Total Questions: 50

41. हर्षवर्धन के शासनकाल में किस चीनी यात्री ने भारत की यात्रा की थी? [56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015]

Correct Answer: (b) ह्वेनसांग
Solution:

चीनी यात्री ह्वेनसांग ने राजा हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत की यात्रा की थी। वह लगभग 630 ईस्वी में भारत आया था और 15 वर्षों तक यहाँ रहा। ह्वेनसांग को 'यात्रियों का राजकुमार' और 'वर्तमान शाक्यमुनि' भी कहा जाता है।
राजा हर्षवर्धन ह्वेनसांग की विद्वत्ता से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उसके सम्मान में कन्नौज में एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया था। ह्वेनसांग ने अपने अनुभवों को 'सी-यू-की' नामक यात्रा वृत्तांत में लिपिबद्ध किया है, जो तत्कालीन भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है। उसकी इस महान यात्रा और ज्ञान के कारण ही उसे 'यात्रियों का राजकुमार' भी कहा जाता है।

42. भारत की यात्रा करने वाले चीनी यात्री युआन च्वांग (ह्वेनसांग) ने तत्कालीन भारत की सामान्य दशाओं और संस्कृति का वर्णन किया है। इस संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? [I.A.S. (Pre) 2013]

1. सड़क और नदी-मार्ग लूटमार से पूरी तरह सुरक्षित थे।
2. जहां तक अपराधों के लिए दंड का प्रश्न है, अग्नि, जल व विष द्वारा सत्यपरीक्षा किया जाना ही किसी भी व्यक्ति की निर्दोषिता अथवा दोष के निर्णय के साधन थे।
3. व्यापारियों को नौघाटों और नौकाओं पर शुल्क देना पड़ता था।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

Correct Answer: (b) केवल 2 और 3
Solution:

ह्वेनसांग के अनुसार, सड़कों पर आवागमन पूर्णतया सुरक्षित नहीं था। ह्वेनसांग स्वयं कई बार चोर-डाकुओं के चंगुल में फंस चुका था। इस प्रकार कथन (1) गलत है। ह्वेनसांग के अनुसार, अपराध अथवा निर्दोष सिद्ध करने के लिए अग्नि, जल, विष आदि द्वारा दिव्य परीक्षाएं ली जाती थीं। उसके अनुसार, व्यापारिक मार्गों, घाटों, बिक्री की वस्तुओं आदि पर भी कर लगते थे, जिससे राज्य को पर्याप्त धन प्राप्त होता था। इस प्रकार कथन 2 और 3 सही हैं।

43. हर्ष के दरबार में ह्वेनसांग को एक दूत के रूप में किसने भेजा था? [U.P.P.C.S. (Pre) 2007]

Correct Answer: (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Solution:

ह्वेनसांग चीन के तांगवंशी शासक ताई सुंग का समकालीन तथा इसी के राज्य का नागरिक था। तुर्क आक्रांताओं के भय से ताई सुंग ने अपने नागरिकों के लिए पश्चिम में विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगा रखा था। ह्वेनसांग ने तांग शासकों की राजधानी चंगन से स्वतंत्र रूप से (न कि दूत) भारतवर्ष के लिए 629 ई. में प्रस्थान किया। भारत प्रवास के बाद जब वह वापस चीन पहुंचा तब सम्राट ने उसके कृत्यों के लिए उसे दंडित करने के बजाए उसका स्वागत किया था और उसे अपना आध्यात्मिक सलाहकार नियुक्त किया था।

44. ह्वेनसांग की भारत में यात्रा के समय सूती कपड़ों के उत्पादन के लिए सबसे प्रसिद्ध नगर था- [41st B.P.S.C. (Pre) 1996]

Correct Answer: (b) मथुरा
Solution:

चीनी यात्री ह्वेनसांग हर्षवर्धन (606-647 ई.) के समय में भारत आया था। उसके अनुसार, मथुरा उस समय सूती वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध था, जबकि वाराणसी रेशमी वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध था। ह्वेनसांग बताता है कि थानेश्वर की समृद्धि का प्रधान कारण वहां का व्यापार ही था। बाण ने थानेश्वर नगरी को अतिथियों के लिए 'चिंतामणि भूमि' तथा व्यापारियों के लिए 'लाल भूमि' बताया है। यहां के निवासी अधिकांशतः व्यापारी थे, जो विभिन्न वस्तुओं का व्यापार करते थे। उज्जयिनी तथा कन्नौज भी इस काल में आर्थिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध थे।

45. 'कौशेय' शब्द का प्रयोग किया गया है- [U.P.P.C.S. (Spl) (Mains) 2008]

Correct Answer: (c) रेशम के लिए
Solution:

'कौशेय' शब्द का प्रयोग रेशमी वस्त्र या रेशम से बने हुए कपड़ों के लिए किया जाता है। यह शब्द संस्कृत के 'कोश' (कोकून) से बना है, जिसका अर्थ रेशम के कीड़ों के कोकून से प्राप्त धागों से निर्मित वस्त्र होता है। प्राचीन ग्रंथों में यह वस्त्र की सुंदरता और विलासिता को दर्शाता है।

• कपास (Cotton): प्राचीन भारत में कपास के लिए 'कार्पास' शब्द का उपयोग किया जाता था, जिसे अक्सर सफेद सोना या रुई भी कहा जाता था।
• सन (Linen): इसके लिए 'अतसी' या फ्लैक्स (Flax) शब्द का उपयोग होता था, जिससे लिनेन बनता था। प्राचीन समय में लोग सन के रेशों का उपयोग कपड़े बनाने के लिए करते थे।
• ऊन (Wool): ऊन के लिए 'ऊर्ण' शब्द का उपयोग किया जाता था, जो भेड़ के बालों (मेषलोम) से प्राप्त होता था। प्राचीन काल में इसे कातकर कपड़े बनाए जाते थे।

46. चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किस विश्वविद्यालय में अध्ययन किया था? [U.P.P.C.S. (Pre) 1995 & 46th B.P.S.C. (Pre) 2003]

Correct Answer: (d) नालंदा
Solution:

637 ई. में ह्वेनसांग नालंदा विश्वविद्यालय गया। इस समय यहां के कुलपति आचार्य शीलभद्र थे। लगभग डेढ़ वर्ष तक नालंदा में निवास कर उसने योगशास्त्र का अध्ययन किया, इसके बाद वह बंगाल, उड़ीसा, धान्यकटक होता हुआ कांची पहुंचा। अपनी यात्रा के दूसरे दौर में ह्वेनसांग पुनः नालंदा आया और वहां उसने व्याख्यान दिए।

47. आज भी भारत में ह्वेनसांग को याद करने का मुख्य कारण है- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992]

Correct Answer: (d) सी-यू-की की रचना
Solution:

ह्वेनसांग ने अपने यात्रा विवरण के ऊपर एक ग्रंथ लिखा, जिसे 'सी-यू-की' कहा जाता है। ह्वेनसांग की इसी रचना के कारण उसे याद किया जाता है, क्योंकि इसमें तत्कालीन भारत संबंधी काफी जानकारी उपलब्ध होती है।

48. चीनी यात्री जिसने भीनमाल की यात्रा की थी- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2007]

Correct Answer: (c) ह्वेनसांग
Solution:

ह्वेनसांग ने भीनमाल की यात्रा की थी। उसने अपने यात्रा वृत्तांत में भीनमाल का उल्लेख 'पी-लो-मो-लो' के नाम से किया है।  ह्वेनसांग चीनी यात्री था, जो हर्षवर्धन के समय में भारत आया था। इसे 'यात्रियों का राजकुमार' तथा इसके यात्रा विवरण को 'सी-यू-की' कहा जाता है।

49. 'सी-यू-की' नामक यात्रा विवरण निम्नलिखित में से किससे जुड़ा है? [U.P.P.C.S (Mains) 2016]

Correct Answer: (d) ह्वेनसांग
Solution:

'सी-यू-की' या "द रिकॉर्ड्स ऑफ द वेस्टर्न वर्ल्ड" प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु ह्वेनसांग की 7वीं शताब्दी (लगभग 630-645 ईस्वी) की भारत यात्रा का विवरण है। सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आए ह्वेनसांग ने इस पुस्तक में तत्कालीन भारतीय समाज, राजनीति, धर्म और नालंदा विश्वविद्यालय का विस्तृत वर्णन किया है।

50. चीनी यात्री इत्सिंग ने बिहार का भ्रमण किया, लगभग - [40th B.P.S.C. (Pre) 1995]

Correct Answer: (d) उपर्युक्त में कोई नहीं
Solution:

चीनी यात्री इत्सिंग ने (671-695 ई.) जब वह युवक था, अपने 37 बौद्ध सहयोगियों के साथ बौद्ध धर्म के अवशेषों को देखने की इच्छा से पाश्चात्य विश्व का भ्रमण करने का निश्चय किया। बाद में उसके साथियों ने उसका साथ छोड़ दिया तथा वह अकेले कैंटन नगर से जहाज में बैठकर भारत की यात्रा पर चल पड़ा। वह दक्षिण के समुद्री मार्ग से होकर भारत आया और सुमात्रा होता हुआ वह चीन वापस लौट गया।