चीनी यात्री ह्वेनसांग ने राजा हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत की यात्रा की थी। वह लगभग 630 ईस्वी में भारत आया था और 15 वर्षों तक यहाँ रहा। ह्वेनसांग को 'यात्रियों का राजकुमार' और 'वर्तमान शाक्यमुनि' भी कहा जाता है।
राजा हर्षवर्धन ह्वेनसांग की विद्वत्ता से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उसके सम्मान में कन्नौज में एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया था। ह्वेनसांग ने अपने अनुभवों को 'सी-यू-की' नामक यात्रा वृत्तांत में लिपिबद्ध किया है, जो तत्कालीन भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है। उसकी इस महान यात्रा और ज्ञान के कारण ही उसे 'यात्रियों का राजकुमार' भी कहा जाता है।