Solution:जियाउद्दीन बरनी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'तारीख-ए-फिरोजशाही' और 'फतवा-ए-जहांदारी' में स्पष्ट किया है कि दिल्ली के सुल्तानों का शासन विशुद्ध रूप से इस्लामी नहीं था। उसका मानना था कि एक सच्चा इस्लामी शासन वह है जो काफिरों का पूर्ण विनाश करे और केवल कुरान के नियमों पर चले। चूँकि सुल्तानों ने व्यावहारिक कारणों से ब्राह्मणों को प्रशासन में रखा, हिंदुओं को मंदिरों में पूजा करने की अनुमति दी और अपने व्यक्तिगत हितों के लिए शरिया की अनदेखी की, इसलिए बरनी ने इसे 'धर्मनिरपेक्ष' या 'राजनीतिक' शासन (जवाबित पर आधारित) माना, न कि विशुद्ध इस्लामी।