दिल्ली सल्तनत : प्रशासन (UPPCS)

Total Questions: 28

21. हदीस है एक- [छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्री) 2014]

Correct Answer: (a) इस्लामिक कानून
Solution:

हदीस मूल रूप से इस्लामी परंपराओं, पैगंबर मुहम्मद के कथनों, उनके कार्यों और उनकी मौन स्वीकृति का एक संग्रह है। सरल शब्दों में कहें तो, कुरान के बाद 'हदीस' इस्लाम का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और कानूनी स्रोत है। मध्यकालीन इतिहास और दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे को समझने के लिए हदीस का ज्ञान होना जरूरी है।

22. 'खरीतादार' कौन था? [यू.पी. पी.सी.एस. (प्री) 2023]

Correct Answer: (d) फरमानों को भेजने वाला अधिकारी
Solution:

सल्तनत काल और विशेष रूप से मुगल काल के दौरान 'खरीतादार' एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी होता था, जिसका मुख्य कार्य शाही पत्रों और फरमानों को सुरक्षित रखना और उन्हें गंतव्य तक पहुँचाना था। 'खरीता' का अर्थ होता है वह थैली या बैग (अक्सर रेशमी) जिसमें सरकारी पत्र या दस्तावेज रखे जाते थे। जो व्यक्ति इस थैली का प्रभारी होता था, उसे ही 'खरीतादार' कहा जाता था।

सल्तनत कालीन पत्राचार विभाग

पद का नाममुख्य कार्य / जिम्मेदारी
दीवान-ए-इंशाशाही पत्राचार का मुख्य विभाग।
दबीर-ए-खासपत्राचार विभाग का प्रमुख अधिकारी।
खरीतादारशाही पत्रों और थैलों (खरीता) का प्रभारी।
कातिबदस्तावेजों को लिखने वाला लिपिक।

• परगना का प्रमुख अफसर: शिकदार
• शाही महल का प्रधान संरक्षक: वकील-ए-दर
• हिसाब-किताब में प्रवीण अधिकारी: मुस्तौफी-ए-मुमालिक

23. सल्तनतकाल में 'फवाज़िल' का अर्थ था- [I.A.S. (Pre) 1998]

Correct Answer: (c) इक्तादारों द्वारा सरकारी खजाने में जमा की जाने वाली अतिरिक्त राशि
Solution:

सल्तनत काल में 'फवाज़िल' का अर्थ था—इक्तादारों द्वारा अपने व्यक्तिगत और सैन्य खर्चों को निकालने के बाद सरकारी खजाने में जमा की जाने वाली 'अतिरिक्त राशि'।
आसान भाषा में कहें तो, यह वह बचा हुआ पैसा था जिसे इक्तादार को अपने क्षेत्र से वसूल किए गए कुल कर में से सुल्तान के केंद्रीय खजाने में भेजना अनिवार्य था।

• अभिजात वर्ग को दिया जाने वाला अतिरिक्त भुगतान: इतिलाक़
• वेतन के बदले में निर्धारित मालगुजारी: इक्ता
• कृषकों से की जाने वाली गैर-कानूनी जबरी वसूली: अबवाब

24. सल्तनत काल की दो प्रमुख मुद्राओं का पता निम्नलिखित कूट से करें- [U.P. P.C.S. (Pre) 2001]

1. दाम
2. जीतल
3. रुपिया
4. टंका

कूट :

Correct Answer: (d) 2 और 4
Solution:

सल्तनत कालीन दो प्रमुख मुद्राएं हैं-जीतल एवं टंका। इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत का पहला तुर्क शासक था, जिसने शुद्ध अरबी सिक्के चलाए। मुद्रा प्रणाली में उसका योगदान दिल्ली सल्तनत के शासकों में सर्वाधिक है; क्योंकि उसी ने दो प्रमुख सिक्के अर्थात चांदी का टंका और तांबे का जीतल प्रचलित किया। शशगनी भी चांदी का सिक्का था। टंका एवं जीतल का अनुपात 1 : 48 का था।

25. निम्न में से किसने 'टंका' नामक चांदी का सिक्का चलाया था? [U.P. Lower Sub. (Pre) 2008]

Correct Answer: (c) इल्तुतमिश
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

26. उत्तर भारत में चांदी का सिक्का 'टंका' जारी करने वाला कौन मध्यकालीन शासक था? [U.P. P.C.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (a) इल्तुतमिश
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

27. सल्तनत काल के सिक्के-टंका, शशगनी एवं जीतल किन धातुओं के थे? [39th B.P.S.C. (Pre) 1994]

Correct Answer: (a) चांदी, तांबा
Solution:

सल्तनत काल (विशेषकर इल्तुतमिश द्वारा शुरू) के प्रमुख सिक्के चांदी और तांबे के बने थे। टंका चांदी का, जीतल तांबे का और शशगनी चांदी का सिक्का था। इल्तुतमिश ने 175 ग्रेन का चांदी का टंका और तांबे का जीतल चलाया था, जो सल्तनत की मुद्रा प्रणाली का आधार बने।

28. किसके सिक्कों पर बगदाद के अंतिम खलीफा का नाम सर्वप्रथम अंकित हुआ? [U.P.P.C.S. (Pre) 2012]

Correct Answer: (d) अलाउद्दीन मसूद शाह
Solution:

अलाउद्दीन मसूद शाह (1242-46 ई.) के सिक्के पर सर्वप्रथम बगदाद के अंतिम खलीफा का नाम अंकित हुआ था। बगदाद के अंतिम खलीफा अल मुस्तसीम थे। यह 1242-58 ई. तक खलीफा रहे। इल्तुतमिश के सिक्के पर खलीफा अल मुस्तनसीर का नाम उल्लिखित था, जो 1226-42 ई. तक खलीफा रहे।