लॉर्ड कर्जन द्वारा 1905 में बंगाल विभाजन की घोषणा के विरोध में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था। इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में एक विशाल जनसभा के साथ हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना और भारतीय उद्योगों व शिक्षा को बढ़ावा देना था। आंदोलन के दौरान 16 अक्टूबर, 1905 को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' मनाया गया और रवींद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर लोगों ने एक-दूसरे को राखी बाँधकर एकता प्रदर्शित की। यह पहला ऐसा राष्ट्रीय आंदोलन था जिसने 'वंदे मातरम्' के नारों के साथ भारतीय जनता में आत्मनिर्भरता और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूती से स्थापित किया।