बंगाल विभाजन (1905) तथा स्वदेशी आंदोलन (UPPCS)

Total Questions: 34

11. निम्नलिखित में से कौन 'स्वदेशी' आंदोलन का आलोचक था एवं पूर्व तथा पाश्चात्य के मध्य एक बेहतर संबंध का समर्थक था? [U.P. Lower Sub. (Pre) 2009]

Correct Answer: (c) आर.एन. टैगोर
Solution:

रबींद्रनाथ टैगोर 'स्वदेशी' आंदोलन के आलोचक थे तथा पूर्व एवं पाश्चात्य सभ्यता के मध्य एक बेहतर समन्वय संबंध के समर्थक थे। वे स्वदेशी आंदोलन के दौरान विदेशी कपड़ों को जलाए जाने के विरोधी थे। उन्होंने इसे 'निष्ठुर बर्बादी' कहा था। वे केवल विरोध करने के बजाय "रचनात्मक स्वदेशी" के पक्षधर थे, जिसमें भारतीय गांवों का सुधार और आत्मशक्ति का विकास शामिल था।

12. बंगाल में ब्रिटेन की वस्तुओं के बहिष्कार का सुझाव सर्वप्रथम किसने दिया था? [U.P. Lower Sub. (Pre) 2004 & U.P.P.C.S. (Mains) 2011]

Correct Answer: (b) कृष्ण कुमार मित्र ने
Solution:

बंगाल में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का सुझाव सर्वप्रथम कृष्ण कुमार मित्र ने दिया था। उन्होंने अपने प्रसिद्ध साप्ताहिक समाचार पत्र 'संजीवनी' के 13 जुलाई, 1905 के अंक में पहली बार यह विचार प्रस्तुत किया था। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे ब्रिटिश वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार करें, सरकारी पदों से इस्तीफा दें और ब्रिटिश अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग न करें।

13. ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया गया था- [U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014]

Correct Answer: (d) 1905 में
Solution:

लॉर्ड कर्जन ने 20 जुलाई, 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा की, जिसके परिणामस्वरूप 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा की गई। इसी बैठक में ऐतिहासिक 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित हुआ, जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया गया।

14. बंगाल का विभाजन मुख्यतः किया गया था- [U.P. Lower Sub. (Pre) 1998]

Correct Answer: (c) बंगाली राष्ट्रवाद की वृद्धि को दुर्बल करने के लिए
Solution:

ऊपरी तौर पर यद्यपि ब्रिटिश सरकार ने इसका उद्देश्य प्रशासनिक सुविधा बताया था, परंतु वास्तव में बंगाल विभाजन मुख्यतः बंगाली राष्ट्रवाद की वृद्धि को दुर्बल करने के लिए किया गया था। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन के अनुसार, "अंग्रेजी हुकूमत का यह प्रयास कलकत्ता को सिंहासनाच्युत करना तथा बंगाली आबादी का बंटवारा करना था, एक ऐसे केंद्र को समाप्त करना था, जहां से बंगाल एवं पूरे देश में कांग्रेस पार्टी का संचालन होता था और साजिशें रची जाती थीं।"

15. बंगाल विभाजन के विरुद्ध राष्ट्रवादियों ने निम्नलिखित कार्यक्रम प्रारंभ किए- [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014]

1. बायकाट              2. स्वदेशी
3. असहयोग            4. राष्ट्रीय शिक्षा

सही उत्तर चुनिए-

Correct Answer: (d) 1, 2 एवं 4
Solution:

कर्जन ने 20 जुलाई, 1905 को बंगाल विभाजन का निर्णय लिया। इसके विरोध में राष्ट्रवादियों द्वारा आंदोलन की शुरुआत 7 अगस्त, 1905 को हुई। कलकत्ता के टाउन हॉल में कृष्ण कुमार मित्र और सुरेंद्रनाथ बनर्जी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जहां स्वदेशी आंदोलन प्रारंभ करने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का निर्णय लिया गया। 16 अक्टूबर, 1905 को जब बंगाल विभाजन लागू हो गया, उस दिन को 'शोक दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की गई। रबींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर इसे 'राखी दिवस' के रूप में भी मनाया गया। यह दिवस राष्ट्रवादियों द्वारा बंगाल की अटूट एकता को प्रदर्शित करने के लिए बनाया गया।

टैगोर के शांतिनिकेतन के तर्ज पर 'बंगाल नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई। बहुत कम समय में पूरे देश में अनेक राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना हो गई। अगस्त, 1906 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद का गठन हुआ। स्वदेशी आंदोलन ने आत्मनिर्भरता, आत्मशक्ति का नारा दिया। स्वावलंबन व आत्मनिर्भरता का प्रश्न राष्ट्रीय स्वाभिमान, आदर और आत्मविश्वास के साथ जुड़ा था। कांग्रेस ने भी अपने कलकत्ता अधिवेशन (1906) में स्वदेशी आंदोलन, बहिष्कार आंदोलन, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वशासन से संबद्ध चार प्रस्ताव पारित किए। अतः स्पष्ट है कि बंगाल विभाजन के विरोध में राष्ट्रवादियों ने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वशासन जैसे आंदोलन चलाए। वर्ष 1920 के नागपुर अधिवेशन में सी.आर. दास ने गांधीजी के असहयोग प्रस्ताव को पेश किया।

16. 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' पहली बार किस घटना के दौरान संघर्ष की विधि के रूप में अपनाए गए थे? [I.A.S. (Pre) 2016]

Correct Answer: (a) बंगाल विभाजन के विरुद्ध आंदोलन
Solution:

'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' पहली बार बंगाल विभाजन के विरुद्ध आंदोलन (स्वदेशी आंदोलन) के दौरान संघर्ष की विधि के रूप में अपनाए गए थे। यह आंदोलन 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल को विभाजित करने के निर्णय के जवाब में शुरू हुआ था। यह पहली बार था जब भारतीय जनता ने आर्थिक रूप से अंग्रेजों को चोट पहुँचाने के लिए मैनचेस्टर के कपड़ों और लिवरपूल के नमक का सामूहिक बहिष्कार किया। हालांकि इसकी शुरुआत बंगाल से हुई, लेकिन बाल गंगाधर तिलक के प्रयासों से यह देश के अन्य हिस्सों (विशेषकर बॉम्बे और पुणे) में भी फैल गया।

17. प्रथम बार संघर्ष के तरीकों के रूप में स्वदेशी एवं बहिष्कार किसके दौरान अपनाएं गए थे? [68th B.P.S.C. (Pre) 2022]

Correct Answer: (c) बंगाल विभाजन
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

18. बंगाल विभाजन के प्रत्याघात के रूप में कौन-सा आंदोलन शुरू हुआ था? [66th B.P.S.C (Pre) 2020]

Correct Answer: (c) स्वदेशी आंदोलन
Solution:

'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' पहली बार बंगाल विभाजन के विरुद्ध आंदोलन (स्वदेशी आंदोलन) के दौरान संघर्ष की विधि के रूप में अपनाए गए थे। यह आंदोलन 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल को विभाजित करने के निर्णय के जवाब में शुरू हुआ था। यह पहली बार था जब भारतीय जनता ने आर्थिक रूप से अंग्रेजों को चोट पहुँचाने के लिए मैनचेस्टर के कपड़ों और लिवरपूल के नमक का सामूहिक बहिष्कार किया। हालांकि इसकी शुरुआत बंगाल से हुई, लेकिन बाल गंगाधर तिलक के प्रयासों से यह देश के अन्य हिस्सों (विशेषकर बॉम्बे और पुणे) में भी फैल गया।

19. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - [I.A.S. (Pre) 2023]

कथन- I: 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में घोषित किया गया है।
कथन- II: 1905 में, इसी दिन स्वदेशी आंदोलन शुरू किया गया था।

उपर्युक्त कथनों के बारे में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

Correct Answer: (a) कथन- I और कथन II दोनों सही हैं तथा कथन- II, कथन- I की सही व्याख्या है
Solution:

भारत में प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2015 को स्वदेशी आंदोलन (प्रारंभ 7 अगस्त, 1905) की स्मृति में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने के लिए नामित किया गया था। अतः कथन- तथा कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है।

20. स्वदेशी आंदोलन के प्रारंभ का तात्कालिक कारण क्या था? [I.A.S. (Pre) 2010]

Correct Answer: (a) लॉर्ड कर्जन द्वारा किया गया बंगाल विभाजन
Solution:

स्वदेशी आंदोलन के प्रारंभ का तात्कालिक कारण लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन की घोषणा थी। 20 जुलाई, 1905 को ब्रिटिश सरकार ने बंगाल को दो भागों में बाँटने की आधिकारिक घोषणा की। इस घोषणा के तुरंत बाद भारतीयों में रोष फैल गया और इसके विरोध स्वरूप 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में एक ऐतिहासिक बैठक हुई, जहाँ से 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक शुरुआत हुई। इस अवधारणा के मुख्य प्रस्तुतकर्ता अरबिंद घोष, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल तथा लाला लाजपत राय थे। ये लोग स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में लागू करना चाहते थे; किंतु उदारवादी गुट इसके विरुद्ध था।