बौद्ध धर्म (UPPCS) Part-2

Total Questions: 50

31. 'संसार अस्थिर और क्षणिक है' का निम्न में किससे संबंध है? [U.P. P.C.S. (Pre) 1992]

Correct Answer: (a) बौद्ध
Solution:

बौद्ध दर्शन में क्षणिकवाद को स्वीकार किया गया है। बुद्ध ने स्वयं अनित्यवाद के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। क्षणिकवाद अनित्यतावाद का तार्किक विकास है, जो बौद्धोत्तर दर्शन में अस्तित्व में आया। क्षणिकवाद के अनुसार, विश्व की प्रत्येक वस्तु का अस्तित्व क्षणमात्र के लिए ही रहता है। जिस प्रकार नदी की एक बूंद एक क्षण के लिए सामने आती है तथा दूसरे क्षण वह विलीन हो जाती है, उसी प्रकार जगत की समस्त वस्तुएं क्षणमात्र के लिए ही अपना अस्तित्व कायम रखती हैं।

32. निम्नलिखित में से किसे 'एशिया के ज्योति पुंज' के तौर पर जाना जाता है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2010]

Correct Answer: (a) गौतम बुद्ध को
Solution:

गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ गौतम) को 'एशिया का ज्योति पुंज' (Light of Asia) के तौर पर जाना जाता है। उन्हें यह उपाधि उनके द्वारा मानवता को शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश देने तथा बौद्ध धर्म की स्थापना के माध्यम से एशिया में ज्ञान का प्रसार करने के लिए दी गई थी। यह संज्ञा सर एडविन अर्नोल्ड की पुस्तक पर आधारित है।

33. निम्नांकित में से किसे 'एशिया का ज्योति पुंज' नाम से जाना जाता है? [Uttaranchal P.C.S. (Pre) 2005]

Correct Answer: (b) भगवान बुद्ध
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

34. नव-बौद्धवाद के प्रतिपादक कौन हैं? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2019]

Correct Answer: (c) अंबेडकर
Solution:

नव बौद्धवाद (नवयान) के प्रतिपादक डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अपने लाखों अनुयायियों के साथ पारंपरिक बौद्ध धर्म की नई व्याख्या करते हुए इस आंदोलन की शुरुआत की थी। इसे दलित बौद्ध आंदोलन भी कहा जाता है, जो समानता और सामाजिक न्याय पर जोर देता है, और इसका प्रमुख ग्रंथ 'बुद्ध और उनका धम्म' है।

35. 'क्षणिकवाद' का प्रतिपादन किसने किया ? [Chhattisgarh P.S.C. (Pre) 2017]

Correct Answer: (a) बुद्ध
Solution:

'क्षणिकवाद' का सिद्धांत बौद्ध दर्शन से संबंधित है। क्षणिकवाद अनित्यतावाद का तार्किक विकास है, जो बौद्धोत्तर दर्शन में अस्तित्व में आया। बुद्ध के अनुसार, संसार में कुछ भी स्थायी या नित्य नहीं है, यहां तक कि आत्मा की भी नित्य सत्ता नहीं है। यह उल्लेखनीय है कि गौतम बुद्ध ने स्वयं अस्थायित्व एवं क्षणिकत्व में भेद किया है। उन्होंने आत्मा को क्षणिक तथा भौतिक वस्तुओं को अनित्य कहा।

36. भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, 'पारमिता' शब्द का सही विवरण निम्नलिखित में से कौन-सा है? [I.A.S. (Pre) 2020]

Correct Answer: (c) परिपूर्णताएं जिनकी प्राप्ति से बोधिसत्व प्रथ प्रशस्त हुआ
Solution:

बौद्ध धर्म में बोधिसत्वों को बुद्धत्व प्राप्त करने के लिए पारमिता नामक विशिष्ट साधना का वर्णन किया गया है। पारमिता ही एक मात्र ऐसा साधन है, जिसके द्वारा बुद्ध की मान्य पदवी 'बुद्धत्व' की प्राप्ति की जा सकती है। बोधिचर्यावतार में आचार्य शांतिदेव कहते हैं कि जो साधक बुद्धत्व की प्राप्ति के लिए यत्नवान है; अर्थात जो बोधिसत्व है, उसे षट्पारमिताओं (दान पारमिता, शील पारमिता, क्षान्ति पारमिता, वीर्य पारमिता, ध्यान पारमिता तथा प्रज्ञा पारमिता) को ग्रहण करना चाहिए। इन षट्पारमिताओं में प्रज्ञा पारमिता का प्रधान्य है।

37. सर एडविन अर्नाल्ड की पुस्तक 'द लाइट ऑफ एशिया' आधारित है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2014]

Correct Answer: (b) ललितविस्तार पर
Solution:

सर एडविन अर्नाल्ड द्वारा रचित कालजयी कृति 'द लाइट ऑफ एशिया' (The Light of Asia) मुख्य रूप से बौद्ध ग्रंथ 'ललितविस्तार' पर आधारित है। यह महाकाव्य गौतम बुद्ध के जीवन, उनके राजकुमार सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक की यात्रा, और उनके महान त्याग को अत्यंत भावुक एवं काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है। 1879 में प्रकाशित इस पुस्तक ने न केवल पश्चिमी जगत को बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश से परिचित कराया, बल्कि इसने विश्व स्तर पर बौद्ध धर्म के प्रति एक नई बौद्धिक जिज्ञासा भी पैदा की।

इस पुस्तक का प्रभाव इतना व्यापक था कि इसने महात्मा गांधी जैसे विचारकों को भी गहराई से प्रभावित किया, जिससे उन्हें अहिंसा और मानवता के दर्शन को और अधिक स्पष्टता से समझने में सहायता मिली। सर एडविन अर्नाल्ड ने प्राचीन संस्कृत और पालि स्रोतों का उपयोग कर बुद्ध के जीवन को एक ऐसी गाथा के रूप में गढ़ा, जो समय और सीमाओं के बंधन से परे आज भी प्रासंगिक है। यह कृति बुद्ध के 'संसार क्षणिक है' और 'दुःख से मुक्ति' के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनी, जिसने एशिया ही नहीं, अपितु पूरे विश्व को करुणा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

38. बौद्ध धर्म के महायान और हीनयान संप्रदायों में सर्वाधिक मौलिक अंतर निम्नलिखित में कौन-सा है? [U.P.P.C.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (c) देवी-देवताओं की पूजा
Solution:

बौद्ध धर्म के हीनयान और महायान संप्रदायों में सर्वाधिक मौलिक अंतर देवी-देवताओं की पूजा था। हीनयान में बुद्ध को एक महापुरुष माना जाता था, जबकि महायान में उन्हें देवता माना गया तथा उनकी पूजा की जाने लगी। इसी के साथ ही अनेक बोधिसत्वों की भी पूजा की जाने लगी।

39. गौतम बुद्ध को एक देवता का स्थान किस राजा के युग में प्राप्त हुआ? [45th B.P.S.C (Pre) 2001]

Correct Answer: (b) कनिष्क
Solution:

गौतम बुद्ध को एक देवता के रूप में प्रतिष्ठित करने और उनकी पूजा पद्धति को अनिवार्य बनाने का श्रेय मुख्य रूप से कुषाण वंश के महान सम्राट कनिष्क को जाता है। कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति बौद्ध धर्म के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई, जहाँ धर्म स्पष्ट रूप से 'हीनयान' और 'महायान' दो संप्रदायों में विभाजित हो गया। कनिष्क ने महायान संप्रदाय को पूर्ण राजकीय संरक्षण दिया, जिसके दर्शन में बुद्ध को केवल एक महापुरुष नहीं, बल्कि एक दिव्य सत्ता या ईश्वर माना जाने लगा। इस दौरान बुद्ध की प्रतिमाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हुआ, जिससे बौद्ध धर्म में मूर्ति पूजा का समावेश हुआ।

40. भारत में पहले जिस मानव प्रतिमाओं को पूजा गया, वह थी- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2010]

Correct Answer: (c) बुद्ध की
Solution:

भारत में पूजा की जाने वाली सर्वप्रथम मानव प्रतिमाएँ भगवान बुद्ध की थीं, जिन्होंने भारतीय धार्मिक इतिहास में मूर्ति पूजा की एक नई परंपरा को जन्म दिया। हालाँकि, इससे पूर्व भी भारतीय कला में यक्षों, यक्षिणियों और कुछ शासकों की प्रतिमाएँ प्राप्त होती हैं, लेकिन एक पूजनीय 'देवता' के रूप में किसी मानव-रूप की व्यापक पूजा का आरंभ ईसा की प्रथम शताब्दी के आसपास बुद्ध की मूर्तियों के साथ ही हुआ। इस परिवर्तन में कुषाण कालीन शासक कनिष्क के शासनकाल का विशेष योगदान रहा, जिसके संरक्षण में महायान बौद्ध धर्म का उदय हुआ।