भक्ति और सूफी आंदोलन (UPPCS) भाग – 1

Total Questions: 50

1. भक्ति आंदोलन का प्रारंभ किया गया था- [U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001]

Correct Answer: (a) आलवार संतों द्वारा
Solution:

भक्ति आंदोलन का उदय सर्वप्रथम द्रविड़ देश में हुआ तथा वहां से उसका प्रचार उत्तर भारत में किया गया। भागवत पुराण में कहा गया है कि भक्ति द्रविड़ देश में जन्मीं, कर्नाटक में विकसित हुई तथा कुछ काल तक महाराष्ट्र में रहने के बाद गुजरात में पहुंच कर जीर्ण हो गई। भक्ति आंदोलन का सूत्रपात दक्षिण में 8वीं सदी में महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य के उदय के साथ हुआ था, जिन्होंने विशुद्ध अद्वैतवाद का प्रचार किया। भक्ति आंदोलन को दक्षिण के वैष्णव आलवार संतों और शैव नयनार संतों ने प्रसारित किया था।

2. भक्ति संस्कृति का भारत में पुनर्जन्म हुआ- [U.P. P.C.S. (Pre) 1993]

Correct Answer: (d) पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में
Solution:

भक्ति आंदोलन का इतिहास महान धर्म सुधारक आदि शंकराचार्य के समय से प्रारंभ होता है, जिन्होंने बौद्ध धर्म के प्रभाव को समाप्त करने के लिए आठवीं शताब्दी में अद्वैतवादी दर्शन का प्रतिपादन किया था। भक्ति आंदोलन का पुनर्जन्म पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी ई. में हुआ; जब इसके नेतृत्व की बागडोर कबीर, नानक, तुलसी, सूर एवं मीराबाई ने संभाली।

15वीं-16वीं शताब्दी के महान संत

संत का नामसंप्रदाय/दर्शनमुख्य शिक्षा/रचना
कबीर दासनिर्गुण भक्तिबीजक (साखी, सबद, रमैनी)
गुरु नानक देवनिर्गुण भक्तिसिख धर्म के प्रवर्तक, लंगर प्रथा
तुलसीदाससगुण (राम)रामचरितमानस (अवधी भाषा)
सूरदाससगुण (कृष्ण)सूरसागर, साहित्य लहरी
चैतन्य महाप्रभुसगुण (कृष्ण)बंगाल में 'कीर्तन' परंपरा की शुरुआत
मीराबाईसगुण (कृष्ण)राजस्थानी और ब्रज भाषा के पद

 

3. बुद्ध और मीराबाई के जीवन दर्शन में मुख्य साम्य था- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992]

Correct Answer: (c) संसार दुःखपूर्ण है
Solution:

बुद्ध और मीराबाई के जीवन दर्शन में मुख्य साम्य यह था कि दोनों ने माना कि संसार दुःखपूर्ण है और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ही सत्य या ईश्वर (निर्वाण/कृष्ण) को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने रूढ़िवादी परंपराओं के विपरीत, व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की स्वतंत्रता दी। बुद्ध के 'चार आर्य सत्यों' में पहला सत्य ही है— "सर्वम दुखम" (सब कुछ दुख है)। उन्होंने जन्म, बुढ़ापे, बीमारी और मृत्यु को दुख का मूल माना।

4. "कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति से उसका धर्म-संप्रदाय या जाति न पूछे।" यह कथन है- [U.P.P.C.S. (Pre) 2009]

Correct Answer: (b) रामानंद का
Solution:

यह अत्यंत प्रसिद्ध कथन मध्यकालीन भक्ति संत स्वामी रामानंद का है। स्वामी रामानंद उत्तर भारत के पहले ऐसे महान संत थे, जिन्होंने भक्ति के द्वार सभी जातियों और वर्गों के लिए खोल दिए थे। उन्हें "भक्ति आंदोलन का सेतु" कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने दक्षिण भारत की भक्ति धारा को उत्तर भारत से जोड़ा।

5. सभी भक्ति संतों के मध्य एक समान विशेषता थी; कि उन्होंने - [47th B.P.S.C. (Pre) 2005]

Correct Answer: (a) अपनी वाणी को उसी भाषा में लिखा, जिसे उनके भक्त समझते थे
Solution:

भक्ति आंदोलन के संतों का आचार बहुत ऊंचा था। उसमें से बहुतों ने देश का भ्रमण किया और वे कई प्रकार के लोगों से मिले, जिनके विचार भिन्न थे। उन संतों ने साधारण लोगों की भाषाओं को उन्नत करने में अपना योगदान दिया। उन्होंने हिंदी, पंजाबी, बंगला, तेलुगू, कन्नड़, तमिल इत्यादि भाषाओं की उन्नति में बहुत योगदान दिया। भक्ति आंदोलन के संत अपने उपदेश क्षेत्रीय एवं स्थानीय भाषाओं में देते थे, ताकि वहां के लोग उनके उपदेश आसानी से सुन और समझ सकें। इस कारण क्षेत्रीय भाषाओं का विकास हुआ।

6. मध्ययुगीन भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में सूफी संत निम्नलिखित में से किस तरह के आचरण का निर्वाह करते थे? [I.A.S (Pre) 2012]

1. ध्यानसाधना और श्वास-नियमन
2. एकांत में कठोर यौगिक व्यायाम
3. श्रोताओं में आध्यात्मिक हर्षोन्माद उत्पन्न करने के लिए पवित्र गीतों का गायन

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए-

Correct Answer: (d) 1, 2 और 3
Solution:

मध्यकालीन भारत में सूफियों के उद्भव से समाज में समरसता फैलाने में मदद मिली। ये सूफी ध्यानसाधना और कठोर श्वास-नियमन जैसी यौगिक क्रियाओं को किया करते थे। वे एकांत में कठोर यौगिक व्यायाम करते थे तथा समाज में एकता और सौहार्द फैलाने तथा श्रोताओं में आध्यात्मिक हर्षोन्माद उत्पन्न करने के लिए गीतों एवं संगीत का सहारा लेते थे।

7. कामरूप में वैष्णव धर्म को लोकप्रिय बनाया - [U.P.P.C.S. (Mains) 2002]

Correct Answer: (d) शंकरदेव ने
Solution:

कामरूप (असम) में वैष्णव धर्म को लोकप्रिय बनाने का श्रेय श्रीमंत शंकरदेव (1449–1568) को जाता है। उन्होंने 'एकशरण नाम धर्म' (एकेश्वरवाद) का प्रचार किया, जो विष्णु या कृष्ण की भक्ति पर आधारित था। शंकरदेव ने सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए 'सत्र' (मठ) और 'नामघर' (प्रार्थना गृह) की स्थापना की, जिससे वैष्णव आंदोलन असमिया संस्कृति का मुख्य हिस्सा बन गया।

8. प्रसिद्ध मध्यकालीन संत शंकरदेव संबंधित थे- [U.P. P.C.S. (Pre) 2015]

Correct Answer: (b) वैष्णव संप्रदाय से
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

9. असम एवं कूच बिहार में वैष्णव धर्म का प्रवर्तन किसने किया ? [U.P.P.C.S. (Mains) 2011]

Correct Answer: (c) शंकरदेव
Solution:

असम एवं कूच बिहार में वैष्णव धर्म (नव-वैष्णव आंदोलन) का प्रवर्तन श्रीमंत शंकरदेव (1449-1568) ने किया था। उन्होंने भगवान विष्णु/कृष्ण के प्रति भक्ति पर आधारित "एकशरण नाम धर्म" की स्थापना की, जो एकेश्वरवादी दर्शन पर आधारित था और जाति-आधारित भेदभाव को अस्वीकार करता था।

10. रामानुजाचार्य किससे संबंधित है? [U.P.P.C.S. (Pre) 1991]

Correct Answer: (c) विशिष्टाद्वैत
Solution:

वैष्णव आचार्य रामानुज भक्ति आंदोलन के प्राचीनतम प्रचारक थे, इन्होंने सगुण ईश्वर की उपासना पर बल दिया। उनके मत को विशिष्टाद्वैत कहा जाता है। जिसका अर्थ है-' ब्रह्म अर्थात ईश्वर अद्वैत होते हुए भी जीव तथा जगत की शक्तियों द्वारा विशिष्ट है।'