भक्ति और सूफी आंदोलन (UPPCS) भाग – 1

Total Questions: 50

21. "पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।" यह पंक्तियां किसने लिखी हैं? [M.P.P.C.S. (Pre) 2022]

Correct Answer: (a) कबीर
Solution:

यह अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरक पंक्तियां कबीर दास द्वारा लिखी गई हैं। अपनी इन पंक्तियों के माध्यम से कबीर दास ने यह संदेश दिया है कि केवल बड़ी-बड़ी पुस्तकें (पोथी) पढ़ लेने से कोई व्यक्ति वास्तव में 'ज्ञानी' या 'पंडित' नहीं बन जाता। सच्चा ज्ञान किताबी रटने में नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम और व्यवहारिकता में छिपा है।

22. कबीर एवं धरमदास के मध्य संवादों के संकलन का शीर्षक है- [U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002 & U.P. P.C.S. (Pre) 2003]

Correct Answer: (b) अमरमूल
Solution:

कबीर एवं उनके प्रमुख शिष्य धरमदास के मध्य संवादों के संकलन को "अमरमूल" के नाम से जाना जाता है। धरमदास ने कबीर साहेब की वाणी को लिपिबद्ध करने में मुख्य भूमिका निभाई थी और उनके संवादों में तत्वज्ञान व आध्यात्मिक रहस्यों का वर्णन है।
धरमदास जी द्वारा संकलित कबीर की वाणी का प्रसिद्ध ग्रंथ "बीजक" है, जिसके तीन मुख्य भाग रमैनी, सबद और साखी हैं।

23. मलूकदास एक संत कवि थे- [U.P. P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008]

Correct Answer: (d) कड़ा के
Solution:

मलूकदास (1574-1682 ई.) भक्ति काल के एक प्रसिद्ध संत कवि और समाज सुधारक थे, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के कड़ा नामक स्थान पर हुआ था। वे निराकार ईश्वर के उपासक थे और उन्होंने प्रेम, मानवता और भाईचारे का संदेश दिया। "अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम, दास मलूका कहि गए, सबके दाता राम" - यह प्रसिद्ध दोहा उन्हीं के द्वारा रचित है।

24. संत घासीदास के पिताजी का क्या नाम था ? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2005]

Correct Answer: (d) महंगू
Solution:

गुरु घासीदास का जन्म दिसंबर, 1756 में छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटपारा जिले के गिरौदपुरी गांव में हुआ था। संत गुरु घासीदास के पिताजी का नाम महंगूदास था। उनकी माता का नाम अमरौतिन बाई था। गुरु घासीदास जी को छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ का संस्थापक माना जाता है, जिन्होंने सामाजिक समानता और समता का संदेश दिया।

25. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही कालानुक्रम है? [Jharkhand P.C.S. (Pre) 2011 & I.A.S. (Pre) 2004]

Correct Answer: (a) शंकराचार्य-रामानुज-चैतन्य
Solution:

आदि शंकराचार्य का काल लगभग आठवीं शताब्दी, रामानुज का काल 1017-1137 ई. तक तथा चैतन्य का काल 1486-1533 ई. तक था।

26. निम्न में से भक्ति संतों का सही तैथिक (कालानुक्रम) अनुक्रम चुनिए- [U.P.P.C.S. (Mains) 2014]

Correct Answer: (a) कबीर, गुरु नानक, चैतन्य, मीराबाई
Solution:

कबीर                   -      1398-1518 ई.
गुरु नानक             -      1469-1539 ई.
चैतन्य                   -     1486-1533 ई.
मीराबाई                -     1498-1546 ई.

27. भगवान शिव की प्रतिष्ठा में कितने ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (b) 12
Solution:

भगवान शिव की प्रतिष्ठा में भारत के विभिन्न भागों में 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई है। ये हैं-केदारनाथ, विश्वनाथ (काशी विश्वनाथ), वैद्यनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, नागेश्वर, सोमनाथ, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर (घुश्मेश्वर), भीमाशंकर, मल्लिकार्जुन और रामेश्वरम।

28. रामानुज के अनुयायियों को कहा जाता है- [U.P.P.C.S. (Pre) 1999]

Correct Answer: (b) वैष्णव
Solution:

रामानुजाचार्य के अनुयायियों को 'वैष्णव' कहा जाता है, क्योंकि वे मुख्य रूप से भगवान विष्णु और लक्ष्मी की उपासना करते हैं। रामानुज ने दक्षिण भारत में 'श्री संप्रदाय' की स्थापना की और 'विशिष्टाद्वैतवाद' का दर्शन दिया, जिसके अनुसार जीव और जगत ईश्वर से अलग नहीं बल्कि उसके विशेष गुण (अंश) हैं। उनके सिद्धांतों ने आगे चलकर उत्तर भारत के भक्ति आंदोलन, विशेषकर स्वामी रामानंद की विचारधारा को गहराई से प्रभावित किया।

29. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान गुरु नानक का जन्म स्थल था? [U.P.P.C.S. (Mains) 2007]

Correct Answer: (c) ननकाना
Solution:

'ननकाना' गुरु नानक का जन्म स्थल था। उक्त स्थान पर इनका जन्म 15 अप्रैल, 1469 को हुआ था। यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ननकाना साहिब जिले में स्थित है। गुरु नानक की मृत्यु 1539 ई. में डेरा बाबा नामक (करतारपुर, पाकिस्तान) स्थान पर हुई थी। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन करने की 'लंगर' परंपरा शुरू की।

30. जिसके शासन में गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना की, वह कौन था ? [U.P. P.C.S. (Spl.) (Pre) 2008]

Correct Answer: (b) सिकंदर लोदी
Solution:

गुरु नानक (1469-1539 ई.) ने सिख धर्म की स्थापना सिकंदर लोदी (1489-1517 ई.) के समय में की थी। नानक एकेश्वरवाद में विश्वास करते थे तथा निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल देते थे। उनका मानना था कि ईश्वर एक है, वह निर्गुण और निरंकार है। वह अवतारवाद में विश्वास नहीं करते थे।