Solution:कांग्रेस को "सूक्ष्मदर्शीय अल्पसंख्यक" जनता का प्रतिनिधि बताते हुए उसका मज़ाक लॉर्ड डफरिन ने उड़ाया था। लॉर्ड डफरिन उस समय भारत के वायसराय थे जब 1885 में कांग्रेस की स्थापना हुई थी। शुरू में उन्होंने कांग्रेस के प्रति तटस्थ रुख अपनाया, लेकिन जैसे-जैसे कांग्रेस ने प्रशासनिक सुधारों और भारतीयों के अधिकारों की मांग तेज की, डफरिन उनके आलोचक बन गए।
कांग्रेस के बारे में अन्य प्रसिद्ध टिप्पणियाँ:
| व्यक्ति का नाम | टिप्पणी/कथन |
| लॉर्ड कर्जन | "कांग्रेस अपने पतन की ओर लड़खड़ा रही है और मेरी इच्छा है कि मैं इसकी शांतिपूर्ण मृत्यु में मदद कर सकूँ।" |
| बंकिम चंद्र चटर्जी | "कांग्रेस के लोग पदों के भूखे राजनीतिज्ञ हैं।" |
| बाल गंगाधर तिलक | "यदि हम वर्ष में एक बार मेंढक की तरह टर्राएंगे, तो हमें कुछ नहीं मिलेगा।" |
| अश्विनी कुमार दत्त | कांग्रेस के सम्मेलनों को "तीन दिनों का तमाशा" कहा था। |