भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (UPPCS) (भाग – 1)

Total Questions: 50

11. निम्नलिखित में से कौन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अध्यक्ष था? [U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014]

Correct Answer: (c) डब्ल्यू.सी. बनर्जी
Solution:

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई थी। इसके संस्थापक एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी ए.ओ. ह्यूम थे। कांग्रेस के इस प्रथम वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता प्रसिद्ध वकील व्योमेश चन्द्र बनर्जी ने की थी। इस ऐतिहासिक सभा में भारत के विभिन्न हिस्सों से आए कुल 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। प्रारंभ में यह अधिवेशन पुणे में आयोजित होना था, लेकिन वहां प्लेग की महामारी फैलने के कारण इसे बॉम्बे स्थानांतरित कर दिया गया। उस समय भारत के वाइसराय लॉर्ड डफरिन थे।

प्रथम चार अधिवेशन:

वर्षस्थानअध्यक्षविशेषता
1885बॉम्बेव्योमेश चन्द्र बनर्जीप्रथम अध्यक्ष
1886कलकत्तादादाभाई नौरोजीप्रथम पारसी अध्यक्ष
1887मद्रासबदरुद्दीन तैयबजीप्रथम मुस्लिम अध्यक्ष
1888इलाहाबादजॉर्ज यूलप्रथम अंग्रेज अध्यक्ष

12. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2023]

1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का गठन 1885 में हुआ था।
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए :
कूट :

Correct Answer: (c) 1 और 2 दोनों
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

13. 1885 ई. में डब्ल्यू.सी. बनर्जी द्वारा इंगित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निम्न उद्देश्यों में से कौन-सा नहीं था? [66th B.P.S.C. (Pre) (Re-Exam) 2020]

Correct Answer: (c) शिक्षित वर्ग की पूर्ण सम्मति से महत्वपूर्ण और आवश्यक सामाजिक विषयों पर विचार प्रकट करना
Solution:

1885 ई. में व्योमेश चंद्र बनर्जी द्वारा इंगित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में निम्नलिखित उद्देश्य बताए गए थे-
(1) देश के हितों की रक्षा करने वाले भारतीयों के बीच संपर्क और मित्रता बढ़ाना;
(2) देशवासियों के बीच जाति, संप्रदाय तथा प्रांतीय पक्षपातों की भावना को दूर करके उनमें राष्ट्रीय एकता की भावना को विकसित करना;
(3) भारत के सभी वर्गों एवं समुदायों को एकत्रित करके उनमें एक राष्ट्र की भावना उत्पन्न करना;
(4) जनता की मांगों का सूत्रीकरण और उसका प्रस्तुतीकरण करना; ज्ञातव्य है कि सामाजिक मुद्दों को प्रारंभ में कांग्रेस के मंच से नहीं उठाए जाने का प्रावधान या व्यवस्था थी।

14. राष्ट्रीय आंदोलन के प्रथम चरण में कांग्रेस की निम्न में से कौन-सी मांग नहीं थी? [M.P. P.C.S. (Pre) 2022]

Correct Answer: (d) कार्यपालिका एवं न्यायपालिका का एकीकरण
Solution:

राष्ट्रीय आंदोलन के प्रथम चरण (1885-1905 ई.) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लेजिस्लेटिव कौंसिलों (विधान परिषदों) के सदस्यों की संख्या में वृद्धि/विस्तार तथा इनमें भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना, कौंसिलों में जनप्रतिनिधियों की संख्या में वृद्धि, कार्यपालिका का न्यायपालिका से पृथक्करण' विधान परिषदों को ज्यादा अधिकार प्रदान करना (मुख्यतः आर्थिक विषयों पर) आदि की मांग की थी। जबकि कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के एकीकरण की मांग इसमें नहीं की गई थी।

15. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 1885 में महासचिव कौन था? [U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl) (Pre) 2010]

Correct Answer: (a) ए.ओ ह्यूम
Solution:

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1885 में प्रथम महासचिव ए.ओ. ह्यूम थे। ह्यूम ने न केवल कांग्रेस की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई, बल्कि वे इसके गठन से लेकर 1906 तक लगातार इसके महासचिव के पद पर बने रहे। वे एक अवकाश प्राप्त ब्रिटिश प्रशासनिक अधिकारी (I.C.S.) थे। उन्हें 'कांग्रेस का पिता' माना जाता है।  उन्होंने 1885 में शिक्षित भारतीयों के नाम एक प्रसिद्ध पत्र लिखा था, जिसने इस संगठन की नींव रखी। उन्हें पक्षी विज्ञान में गहरी रुचि के कारण 'हर्मिट ऑफ शिमला' भी कहा जाता है। 1912 में उनकी मृत्यु के बाद कांग्रेस के बाँकीपुर (पटना) अधिवेशन में उन्हें आधिकारिक तौर पर 'कांग्रेस का पिता' घोषित किया गया था।

16. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के समय भारत का वायसराय कौन था ? [U.P.P.C.S (Mains) 2011 & U.P. P.C.S. (Mains) 2006 & U.P. P.C.S. (Mains) 2012]

Correct Answer: (d) लॉर्ड डफरिन
Solution:

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) के समय भारत का वायसराय लॉर्ड डफरिन था। लॉर्ड डफरिन का कार्यकाल 1884 से 1888 तक रहा। शुरुआत में डफरिन ने कांग्रेस की गतिविधियों के प्रति तटस्थ रुख अपनाया, लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस को 'सूक्ष्मदर्शी अल्पसंख्यकों की संस्था' कहकर उसका मजाक उड़ाया था। डफरिन के ही कार्यकाल में तीसरा आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885) हुआ था, जिसके बाद बर्मा (म्यांमार) को ब्रिटिश भारत में मिला लिया गया था।

स्थापना काल के प्रमुख व्यक्तित्व:

पद/भूमिकानाम
वायसरायलॉर्ड डफरिन
संस्थापक (महासचिव)ए.ओ. ह्यूम
प्रथम अध्यक्षव्योमेश चन्द्र बनर्जी
प्रथम अधिवेशन का स्थानबॉम्बे (मुंबई)

17. निम्न गवर्नर जनरलों में से किसने कांग्रेस को 'अत्यधिक अल्पसंख्यक' लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली कहकर उपहास किया था? [U.P.P.C.S. (Pre) 2018]

Correct Answer: (a) लॉर्ड डफरिन
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

18. 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के समय गवर्नर जनरल कौन था? [U.P. P.C.S. (Mains) 2017]

Correct Answer: (c) लॉर्ड डफरिन
Solution:

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) के समय भारत का वायसराय लॉर्ड डफरिन था। लॉर्ड डफरिन का कार्यकाल 1884 से 1888 तक रहा। शुरुआत में डफरिन ने कांग्रेस की गतिविधियों के प्रति तटस्थ रुख अपनाया, लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस को 'सूक्ष्मदर्शी अल्पसंख्यकों की संस्था' कहकर उसका मजाक उड़ाया था। डफरिन के ही कार्यकाल में तीसरा आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885) हुआ था, जिसके बाद बर्मा (म्यांमार) को ब्रिटिश भारत में मिला लिया गया था।

स्थापना काल के प्रमुख व्यक्तित्व:

पद/भूमिकानाम
वायसरायलॉर्ड डफरिन
संस्थापक (महासचिव)ए.ओ. ह्यूम
प्रथम अध्यक्षव्योमेश चन्द्र बनर्जी
प्रथम अधिवेशन का स्थानबॉम्बे (मुंबई)

19. लॉर्ड डफरिन के वायसराय काल की एक महत्वपूर्ण घटना थी- [M.P. P.C.S. (Pre) 2017]

Correct Answer: (c) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
Solution:

लॉर्ड डफरिन के वायसराय काल (1884-1888) की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना थी, जो 1885 में हुई थी।

लॉर्ड डफरिन का कार्यकाल:

वर्षघटना
1884वायसराय के रूप में कार्यभार संभाला
1885भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (बॉम्बे)
1885तीसरा आंग्ल-बर्मा युद्ध शुरू
1887महारानी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती (Golden Jubilee)

20. किसने कांग्रेस को सूक्ष्मदर्शीय अल्पसंख्यक जनता का प्रतिनिधि बताते हुए उसका मज़ाक उड़ाया था? [U.P. P.C.S. (Mains) 2012]

Correct Answer: (b) लॉर्ड डफरिन ने
Solution:

कांग्रेस को "सूक्ष्मदर्शीय अल्पसंख्यक" जनता का प्रतिनिधि बताते हुए उसका मज़ाक लॉर्ड डफरिन ने उड़ाया था। लॉर्ड डफरिन उस समय भारत के वायसराय थे जब 1885 में कांग्रेस की स्थापना हुई थी। शुरू में उन्होंने कांग्रेस के प्रति तटस्थ रुख अपनाया, लेकिन जैसे-जैसे कांग्रेस ने प्रशासनिक सुधारों और भारतीयों के अधिकारों की मांग तेज की, डफरिन उनके आलोचक बन गए।

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लॉर्ड कर्जन"कांग्रेस अपने पतन की ओर लड़खड़ा रही है और मेरी इच्छा है कि मैं इसकी शांतिपूर्ण मृत्यु में मदद कर सकूँ।"
बंकिम चंद्र चटर्जी"कांग्रेस के लोग पदों के भूखे राजनीतिज्ञ हैं।"
बाल गंगाधर तिलक"यदि हम वर्ष में एक बार मेंढक की तरह टर्राएंगे, तो हमें कुछ नहीं मिलेगा।"
अश्विनी कुमार दत्तकांग्रेस के सम्मेलनों को "तीन दिनों का तमाशा" कहा था।