Solution:काकोरी कांड (9 अगस्त, 1925) के बाद हुए प्रसिद्ध मुकदमे से जो क्रांतिकारी बच निकले थे और पुलिस के हाथ नहीं आए, वे चंद्रशेखर आजाद थे। जब ब्रिटिश सरकार ने काकोरी ट्रेन डकैती के बाद 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) के सदस्यों की धरपकड़ शुरू की, तो लगभग सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार कर लिए गए, लेकिन आजाद अपनी चतुराई और वेश बदलने की कला के कारण पुलिस को चकमा देने में सफल रहे।
चंद्रशेखर आजाद कभी जीवित पुलिस के हाथ नहीं आए। 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान, जब उनके पास अंतिम गोली बची, तो उन्होंने खुद को गोली मारकर अपना संकल्प पूरा किया कि वे "आजाद ही रहेंगे"।