Solution:अल-बिरूनी ने 1017 में उज्बेकिस्तान से भारतीय उपमहाद्वीप की यात्रा की।
• वह इस्लामी स्वर्ण युग से संबंधित (8वीं से 14वीं शताब्दी) था।
• उन्होंने खगोल विज्ञान, गणित, भौतिकी, चिकित्सा और इतिहास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
•उन्होंने भारत में प्रचलित हिंदू धर्म से सम्बंधित विषयों का अध्ययन किया और भारतीय संस्कृति पर आधारित पुस्तक 'तारिख अल-हिंद' (भारत का इतिहास) का अध्ययन किया।
• इब्न बतूता (लगभग 1304-1369) मोरक्को के एक प्रसिद्ध मुस्लिम यात्री, विद्वान और खोजकर्ता थे, जिन्हें मध्यकाल का सबसे महान यात्री माना जाता है, वे 1333 में भारत आए और सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दिल्ली के काजी (न्यायाधीश) भी रहे।
उन्होंने अपनी यात्राओं का विवरण अपनी किताब 'रिहला' (किताब-उर-रिहला) में लिखा, जो 14वीं सदी के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का विस्तृत वर्णन करती है।
• महमूद बिन अमीर वली बल्खी 17वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध मध्य एशियाई यात्री, विद्वान और लेखक थे, जिन्होंने 1620 के दशक में भारत की व्यापक यात्रा की थी। उन्होंने अपने यात्रा अनुभवों को फारसी में ‘बहर-उल-असरार’ नामक पुस्तक में दर्ज किया।
• सयदी अली रईस (1498–1563) 16वीं सदी के एक प्रसिद्ध ओटोमन (तुर्की) एडमिरल, भूगोलवेत्ता और यात्री थे, जो 1550 के दशक में भारत (गुजरात) आए थे। वे अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'मिरात-उल-मेमालिक' (देशों का दर्पण) के लिए जाने जाते हैं, जो 16वीं सदी के भारत, मुगल दरबार और समुद्री मार्गों का महत्वपूर्ण विवरण प्रदान करती है।