'आर्यक-स्तम्भ' वाले मंच की विशिष्टता मुख्य रूप से अमरावती स्तूप और नागार्जुनकोंडा के स्तूपों में देखने को मिलती है, जो वर्तमान आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। उत्तर भारतीय स्तूपों (जैसे सांची या भरहुत) के विपरीत, यहाँ स्तूप के आधार पर चारों मुख्य दिशाओं में उभरे हुए चबूतरे या मंच बनाए जाते थे, जिन पर पाँच स्तंभों का एक समूह स्थापित किया जाता था। ये पाँच 'आर्यक-स्तम्भ' भगवान बुद्ध के जीवन की पाँच महत्वपूर्ण घटनाओं—जन्म, गृहत्याग, ज्ञान प्राप्ति, प्रथम उपदेश और महापरिनिर्वाण—का प्रतीक माने जाते हैं।