Solution:प्राचीन भारतीय समाज और विधि-संहिताओं के संदर्भ में, मनुस्मृति वह प्रमुख ग्रंथ है जिसमें स्त्रियों के लिए 'पुनर्विवाह' को स्पष्ट रूप से वर्जित (Prohibit) किया गया है। मनुस्मृति के अनुसार, विवाह एक अटूट संस्कार है और पति की मृत्यु के उपरांत भी स्त्री को ब्रह्मचर्य का पालन करने का निर्देश दिया गया है, न कि दूसरे विवाह का। इसके विपरीत, कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' और 'नारद स्मृति' जैसे ग्रंथों में कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसे पति के लंबे समय तक लापता होने, नपुंसक होने या संन्यासी बन जाने पर स्त्रियों को पुनर्विवाह की अनुमति दी गई थी।