यू.जी.सी. एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 (हिन्दी)

Total Questions: 100

41. निम्नलिखित काव्यपंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I (काव्यपंक्तियाँ)सूची-II (रचनाकार)
(A) कौन परी यह बानि अरी नित नीरभरी गगरी ढरकावै।(i) देव
(B) गुलगुली गुल में गलीचा है, गुनी जन हैं, चाँदनी है, चिक है चिरागन की माला है।(ii) पद्माकर
(C) सेवक सिपाही हम उन राजपूतन के, दान, जूद्ध जुरिये में नेकु जे न मुरके।(iii) ठाकुर
(D) अभिधा उत्तम काव्य है, मध्य लक्षणा लीन। अधम व्यंजना रस विरस, उलटी कहत नवीन।(iv) प्रताप साहि
(v) भिखारीदास

निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (b) (A)-(iv), (B)-(ii), (C)-(iii), (D)-(i)
Solution:

निम्नलिखित काव्य पंक्तियों का उनके रचनाकारों के साथ सही सुमेलन -

काव्य पंक्तियाँरचनाकार
कौन परी................दरकावै।प्रतापसाहि
गुलगुली................की माला हैं।पद्माकर
सेवक सिपाही........जे न मुरके।ठाकुर
अभिधा उत्तम........कहत नवीन।देव

42. 'कीनें हूँ कोरिक जतन अब कहि काढ़े कौनु ।

भो मन मोहन रूपु मिलि पानी मैं को लौनु ।
' इस दोहे के सम्बन्ध में क्या सही है?
(A) इसमें नायिका का कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम व्यंजित है।
(B) नायिका के मन रूपी सरोवर में कृष्ण का लावण्य पानी में नमक की तरह घुल गया है।
(C) कृष्ण की रूपासक्ति से नायिका अपने मन को अलग करना चाहती है।
(D) 'कोरिक' का अर्थ है 'कचोटना'
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (d) (A) और (B)
Solution:

कीनें हूँ कोरिक जतन.........मैं को लौनु ।। बिहारी रचित इस दोहे में नायिका का कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम व्यंजित है तथा नायिका के मन रूपी सरोवर में कृष्ण का लावण्य पानी में नमक की तरह घुल गया है।
दोहे का पूर्ण अर्थ- जिस प्रकार पानी में नमक मिल जाता है, उसी प्रकार मेरे हृदय में कृष्ण का रूप समा गया है। अब कोई कितना भी यत्न कर ले, पर जैसे पानी से नमक को अलग करना असंभव है। वैसे ही मेरे हृदय से कृष्ण का प्रेम मिटाना असम्भव है।

43. साधारणीकरण की निम्नलिखित स्थापनाओं को उसके प्रतिपादकों से सुमेलित कीजिए:

सूची-Iसूची-II
(A) रसास्वाद में वासनात्मक तथा स्थिर मनोवृत्तियाँ जिनके द्वारा चरित्र की सृष्टि होती है, साधारणीकरण के द्वारा आनंदमय बना दी जाती हैं; इसलिए यह वासना का संशोधन करके उनका साधारणीकरण करता है।(i) रामचंद्र शुक्ल
(B) काव्य-प्रसंग या रस के समस्त अवयवों का साधारणीकरण मानने की अपेक्षा कवि भावना का साधारणीकरण मानना मनोविज्ञान के अधिक अनुकूल है।(ii) अज्ञेय
(C) लोकहृदय की यह सामान्य अन्तःभूमि परख कर हमारे यहाँ साधारणीकरण सिद्धांत की प्रतिष्ठा की गई है। यह सामान्य अन्तःभूमि कल्पित या कृत्रिम नहीं है।(iii) जयशंकर प्रसाद
(D) जब चमत्कारिक अर्थ मर जाता है तब उस शब्द की रागोत्तेजक शक्ति भी क्षीण हो जाती है। उस अर्थ की प्रतिपत्ति करता है, जिसमें पुनः रागात्मक संबंध स्थापित हो। साधारणीकरण का यही अर्थ है।(iv) नगेन्द्र
(v) गुलाबराय

निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (b) (A)-(ii), (B)-(i), (C)-(iv), (D)-(iii)
Solution:

साधारणीकरण की निम्नलिखित स्थापनाओं का उनके प्रतिपादकों के साथ सही सुमेलित इस प्रकार है-

सूची-Iसूची-II
(a) रसास्वाद में.......साधारणीकरण करता है।अज्ञेय
(b) काव्य-प्रसंग या रस...... अधिक अनुकूल है।रामचंद्र शुक्ल
(c) लोकहृदय की यह.........कृत्रिम नहीं है।नगेन्द्र
(d) जब चमत्कारिक अर्थ...... साधारणीकरण का यही अर्थ है।जयशंकर प्रसाद

44. शब्द की जिस शक्ति से उसके सांकेतिक अर्थ का बोध हो, वहाँ कौन-सी शब्द शक्ति होती है?

Correct Answer: (a) अभिधा
Solution:

शब्द की जिस शक्ति से उसके सांकेतिक अर्थ का बोध हो, वहाँ अभिधा शब्द शक्ति होती है। हिन्दी व्याकरण में किसी वाक्य के भाव को समझने के लिए प्रयुक्त अर्थ को शब्द शक्ति कहा जाता है। हिन्दी व्याकरण में शब्द शक्ति तीन प्रकार की होती है- (1) अभिधा (2) लक्षणा (3) व्यंजना

45. अस्मितामूलक विमर्श को किस साहित्यिक पत्रिका ने सर्वाधिक संवर्द्धित किया?

Correct Answer: (c) हंस
Solution:

अस्मितामूलक विमर्श को कथा मासिक साहित्यिक पत्रिका 'हंस' ने संवर्द्धित किया जो दिल्ली के अक्षर प्रकाशन से सन 1986 से 2013 तक प्रसिद्ध कथाकार राजेन्द्र यादव के संपादन में निकलती रही। हालांकि हंस के संस्थापक संपादक मुंशी प्रेमचन्द थे जिन्होंने कई वर्षों तक इसका संपादन किया था।

46. 'कविकर्म और काव्यभाषा' किस आलोचक की समीक्षा कृति है?

Correct Answer: (c) परमानन्द श्रीवास्तव
Solution:

'कविकर्म और काव्यभाषा' आलोचक परमानन्द श्रीवास्तव की समीक्षा कृति है। इनकी अन्य अलोचनात्मक कृतियाँ हैं- 'नयी कविता का परिप्रेक्ष्य (1968 ई.)' हिन्दी कहानी की रचना प्रक्रिया (1965 ई.), उपन्यास का यथार्थ और रचनात्मक भाषा (1976 ई.), समकालीन कविता का व्याकरण (1980 ई.), शब्द और मनुष्य (1988 ई.), कविता का अर्थात् (1999 ई.) आदि।

लेखकआलोचना
मलयजकविता से साक्षात्कार, संवाद और एकालाप
रामस्वरुप चतुर्वेदीआचार्य रामचंद्र शुक्ल आलोचना का अर्थ, अर्थ की आलोचना, आधुनिक कविता यात्रा, तारसप्तक से गद्य कविता, कविता का पथ, कामायनी का पुनर्मूल्यांकन।
प्रभाकर श्रोत्रियकविता की तीसरी आँख, संवाद, रचना एक यातना है, सौन्दर्य का तात्पर्य।

47. 'उत्तरकांड' के कलियुग प्रसंग में तुलसीदास ने लिखा है:

(A) आचारहीन और वेद विरोधी लोग ज्ञानी और संन्यासी कहलाएँगे।
(B) माता-पिता अपने बच्चों को मानव धर्म की शिक्षा देंगे।
(C) पत्नी के मर जाने और घर गृहस्थी और संपत्ति के नष्ट हो जाने के बाद लुटे-पिटे लोग ही संन्यास ग्रहण करेंगे।
(D) कलियुग में अच्छा समय होगा और लोग सुखी होंगे।
निम्नलिखित में से तुलसीदास द्वारा कहे गए सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (a) (A) और (C)
Solution:

उत्तरकाण्ड के कलियुग प्रसंग में तुलसीदास ने लिखा है कि आचारहीन और वेद विरोधी लोग ज्ञानी और संन्यासी कहलायेंगे पत्नी के मर जाने, घर-गृहस्थी और संपत्ति के नष्ट हो जाने के बाद लुटे-पिटे लोग ही संन्यास ग्रहण करेंगे। तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस' का अन्तिम काण्ड उत्तरकाण्ड है। रामचरितमानस में सात काण्ड हैं जो इस प्रकार हैं-
1. बालकाण्ड
2. अयोध्याकाण्ड
3. अरण्यकाण्ड
4. किष्किन्धाकाण्ड
5. सुन्दरकाण्ड
6. लंकाकाण्ड
7. उत्तरकाण्ड ।

48. 'भाषा ठीक करने से पहले मैं मनुष्यों को ठीक करना चाहता हूँ, समझे।'

प्रस्तुत संवाद 'चन्द्रगुप्त'नाटक के किस पात्र का है?

Correct Answer: (b) चाणक्य
Solution:

'भाषा ठीक करने से पहले मैं मनुष्यों को ठीक करना चाहता हूँ, समझे' प्रस्तुत संवाद चन्द्रगुप्त नाटक के पात्र चाणक्य का है। चन्द्रगुप्त, चाणक्य व राक्षस आदि चन्द्रगुप्त नाटक के पात्र हैं। चन्द्रगुप्त नाटक के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। प्रसाद की अन्य रचनाएं इस प्रकार हैं- सज्जन, कल्याणी परिणय, करुणालय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, कामना, स्कन्दगुप्त, एक घूँट, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी।

49. 'दिवस का अवसान समीप था।

गगन था कुछ लोहित हो चला।
तरुशिखर पर थी अब राजती।
कमलिनी-कुल बल्लभ की प्रभा ।।'
इन काव्यपंक्तियों का आशय है:
(A) सूर्यास्त हो गया था।
(B) आसमान में लालिमा फैलने लगी थी।
(C) चिड़ियाँ अपने नीड़ों में विश्राम कर रही थीं।
(D) पेड़ों की फुनगियों पर सूरज की आखिरी किरणें विराजमान थीं।
नीचे दिए गएविकल्पों में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (b) (B) और (D)
Solution:

'दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला। तरुशिखा पर थी अब राजती, कमलिनी कुल वल्लभ की प्रभा' इन काव्य पंक्तियों का आशय है -
आसमान में लालिमा फैलने लगी थी, पेड़ों की फुनगियों पर सूरज की आखिरी किरणें विराजमान थीं। उपर्युक्त पंक्तियाँ हरिऔध के महाकाव्य 'प्रियप्रवास' की हैं।

50. अफ्रीका में रंगभेद तथा उपनिवेशवादियों की स्थानीय और भारतीय मूल के निवासियों के प्रति घृणा और क्रूरता का मार्मिक चित्रण किस उपन्यास में किया गया है?

Correct Answer: (a) पहला गिरमिटिया
Solution:

अफ्रीका में रंगभेद तथा उपनिवेशवादियों के स्थानीय और भारतीय मूल के निवासियों के प्रति घृणा और क्रूरता का मार्मिक चित्रण 'पहला गिरमिटिया' उपन्यास में किया गया है। यह उपन्यास महात्मा गाँधी के जीवन-चरित्र पर आधारित है। गिरिराज किशोर के उपन्यास इस प्रकार हैं-
जुगलबन्दी - अंग्रेजी सत्ता का अंत और कांग्रेस के रूप में नये सत्ता वर्ग के उदय का अंकन ।
परिशिष्ट - तकनीकी शिक्षा-संस्थानों में हरिजन विरोधी  वातावरण का चित्रण।
तीसरी सत्ता- आधुनिक नारी के दाम्पत्य सम्बन्धों में उत्पन्न  जटिलताओं का अंकन ।