यू.जी.सी. एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 (हिन्दी)

Total Questions: 100

81. निम्नलिखित में से विदेशी परिवेश पर आधारित कौनसे उपन्यास नहीं हैं?

(A) परिशिष्ट
(B) चक्रव्यूह
(C) वे दिन
(D) सफर के साथी
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (b) (A) और (B)
Solution:

परिशिष्ट और चक्रव्यूह (a+b) दोनों विदेशी परिवेश पर आधारित उपन्यास नहीं हैं। 'परिशिष्ट' गिरिराज किशोर का उपन्यास है। इस उपन्यास में तकनीकी शिक्षा संस्थानों में हरिजन विरोधी वातावरण का चित्रण है, जबकि 'चक्रव्यूह' कुँवर नारायण का काव्य संग्रह है। 'वे दिन' निर्मल वर्मा का तथा 'सफर के साथी' सुनीता जैन का उपन्यास है, जो विदेशी परिवेश पर आधारित है।

82. नीशे का सम्बन्ध किस विचारधारा से है?

Correct Answer: (d) अस्तित्ववाद
Solution:

नीत्शे का संबंध अस्तित्ववादी विचारधारा से है। फ्रेडरिक नीत्शे जर्मनी के प्रसिद्ध दार्शनिक थे। फ्रायड को मनोविश्लेषणवाद का प्रवर्तक माना जाता है, कार्ल मार्क्स को मार्क्सवाद का प्रवर्तक माना जाता है जबकि ज्यां फ्रांकोइस ल्योतार का संबंध उत्तर आधुनिकतावाद से है।

83. तलाकशुदा माता-पिता की संतान की मानसिकता पर आधारित उपन्यास है:

Correct Answer: (c) आपका बंटी
Solution:तलाकशुदा माता-पिता की संतान की मानसिकता पर आधारित उपन्यास 'आपका बंटी' मन्नू भंडारी की कृति है।
इनके अन्य उपन्यास हैं- महाभोज (1979), एक इंच मुस्कान, (इस उपन्यास को राजेन्द्र यादव और मन्नू भण्डारी ने मिलकर पूर्ण किया है।)

84. निर्देशः इस प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना है और दूसरा तर्क । दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

स्थापना : काव्य का सर्वस्व अलंकार है।
तर्क : क्योंकि केवल अलंकारों से ही कविता कामिनी का आन्तरिक और बाह्य सौन्दर्य निखरता है।
विकल्प :

Correct Answer: (c) (A) गलत (R) गलत
Solution:

स्थापना और तर्क दोनों गलत हैं
स्थापना (A)- काव्य का सर्वस्व अलंकार है यह कथन सत्य नहीं है। आचार्य वामन के अनुसार जो किसी वस्तु को अलंकृत करे, वह अलंकार है- 'अलङ्कतिरलङ्कारः'। जिस प्रकार आभूषण स्वर्ण से बनते हैं, उसी प्रकार अलंकार भी सुवर्ण (सुन्दर वर्णों) से बनते हैं।
अलंकार का शाब्दिक अर्थ- सजावट, श्रृंगार, आभूषण आदि। साहित्यशास्त्र में अलंकार शब्द का प्रयोग काव्य सौन्दर्य के लिये होता है। 'अलंकरोति इति अलंकार' अर्थात् जो अलंकृत करे उसे अलंकार कहते हैं।
तर्क (R)- क्योंकि केवल अलंकारों से ही कविता कामिनी का आन्तरिक और वाह्य सौन्दर्य निखरता है, तर्क गलत है।
जिस प्रकार आभूषण पहनने से व्यक्ति का शारीरिक सौन्दर्य और आकर्षण बढ़ जाता है, उसी प्रकार काव्य में अलंकारों के प्रयोग से उसके सौन्दर्य में वृद्धि होती है।
दूसरे शब्दों में काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्म अलंकार कहलाते हैं।

85. इनमें से कौन-से अलंकार सादृश्यमूलक हैं?

(A) विभावना
(B) व्यतिरेक
(C) उत्प्रेक्षा
(D) असंगति
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (c) (B) और (C)
Solution:व्यतिरेक अलंकार और उत्प्रेक्षा अलंकार सादृश्यमूलक हैं अतः यहाँ विकल्प (c) सही है। व्यतिरेक - जहाँ उपमेय को उपमान से श्रेष्ठ बताया जाए और उसका कारण भी दिया जाए, वहाँ व्यतिरेक अलंकार होता है।
उदाहरण - जनम सिन्धु, पुनि बंधु बिषु, दिन मलीन सकलंक ।
सिय मुख समता पाव किमि, चन्दु बापुरो रंक ।।
उत्प्रेक्षा - जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। मानों, मानहु, मनहु, मन जानो, जानहु, जनु, निश्चय, मेरे जान, इव आदि उत्प्रेक्षा के वाचक शब्द हैं।
उदाहरण- चमचमात चंचल चयन बिच घूँघट पट झीन।
मानहु सुरसरिता विमल जल उछरत जुग मीन ।।
उक्त अन्य विकल्प (a) विभावना और विकल्प (d) असंगति अलंकार सादृश्यमूलक नहीं है।

86. हिन्दी में 'नॉवेल' के अर्थ में उपन्यास पद का प्रथम प्रयोग किसने किया था?

Correct Answer: (b) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
Solution:

हिन्दी में 'नॉवेल' के अर्थ में उपन्यास पद का प्रथम प्रयोग भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने किया था। उपन्यास शब्द के प्रथम प्रयोग के सन्दर्भ में प्रसिद्ध आलोचक गोपाल राय लिखते हैं कि - "हिन्दी में नॉवेल के अर्थ में 'उपन्यास' पद का प्रयोग 1875 ई. में हुआ। जिसे बंगला और हिन्दी में उपन्यास कहा जाता है। गोपालराय के अनुसार उसे "उर्दू में 'नाविल', मराठी में 'कादम्बरी' तथा गुजराती में 'नवल कथा' की संज्ञा प्राप्त हुई है।" अतः अन्य विकल्प असंगत हैं।

87. निम्नलिखित में से डायरी साहित्य है:

(A) प्रवास की डायरी
(B) एक साहित्यिक की डायरी
(C) दिल्ली मेरा परदेश
(D) ऋणजल धनजल
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (e) (*)
Solution:

प्रवास की डायरी, एक साहित्यिक की डायरी, दिल्ली मेरा परदेश तीनों डायरी विधा की रचना है जबकि ऋणजल धनजल (1977) रिपोर्ताज विधा की रचना है, जिसके रचनाकार फणीश्वरनाथ रेणु हैं।

सूची-Iसूची-II
(A) तमस(i) सुकुल बाबू
(B) रागदरबारी(ii) शेखर
(C) महाभोज(iii) रिचर्ड
(D) झूठा-सच(iv) रंगनाथ
(v) तारा

नोट - आयोग ने प्रश्न को (f) माना है।

88. 'अंधायुग' के निम्नलिखित संवादों को उनके पात्रों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची-I (मिथकीय कविताएँ)सूची-II (पात्र/कवि)
(A) वध मेरे लिए नहीं रही नीति वह है अब मेरे लिए मनोग्रंथि(i) वृद्धयाचक
(B) आज इस पराजय की वेला में सिद्ध हुआ झूठ थी सारी अनिवार्यता भविष्य की(ii) युयुत्सु
(C) अंतिम परिणति में/ दोनों जर्जर करते हैं पक्ष चाहे सत्य का हो/ अथवा असत्य का!(iii) धृतराष्ट्र
(D) गूंगों के सिवा आज/ और कौन बोलेगा मेरी जय(iv) अश्वत्थामा
(v) गांधारी

निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (c) (A)-(iv), (B)-(i), (C)-(ii), (D)-(iii)
Solution:'अंधायुग' के निम्नलिखित संवादों और उनके पात्रों का सुमेलित क्रम इस प्रकार है-
संवादपात्र

(a) वध मेरे लिये नहीं रही नीति वह है अब मेरे लिये मनोग्रंथि

अश्वत्थामा

(b) आज इस पराजय की वेला में सिद्ध हुआ झूठ थी सारी अनिवार्यता भविष्य की

वृद्धयाचक

(c) अंतिम परिणति में/ दोनो जर्जर करते हैं पक्ष चाहें सत्य का हो/ अथवा असत्य का

युयुत्सु

(d) गूंगों के सिवा आज/और कौन बोलेगा मेरी जय

धृतराष्ट्र

89. 'सिद्ध हेमचन्द्र शब्दानुशासन' किस तरह का ग्रंथ है?

Correct Answer: (a) व्याकरण सम्बन्धी
Solution:

'सिद्ध हेमचन्द्र शब्दानुशासन' - व्याकरण सम्बन्धी ग्रंथ है जिसके लेखक हेमचन्द्र जी हैं। हेमचन्द्र की अन्य रचनाएँ- काव्यानुशासन, शब्दानुशासन हैं। आचार्य हेमचन्द्र संस्कृत के अन्तिम महावैयाकरण और महापण्डित थे। अतः हेमचन्द्र को 'कलिकालसर्वज्ञ' कहा जाता है।

90. 'उर्वशी' के तृतीय अंक के आधार पर कौन-से कथन सही है?

(A) शक्तिशाली और दुर्द्धर्ष पुरुष भी सुंदरियों के कटाक्ष से आहत हो जाते हैं।
(B) उर्वशी मानवी है।
(C) उर्वशी कहती है- यह देह-भाव भ्रांति है।
(D) पुरुरवा के अनुसार मर्त्य मानव को देवता कहा जा सकता है।
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (d) (A) और (C)
Solution:

'उर्वशी' के तृतीय अंक के आधार पर सही कथन है- (a) शक्तिशाली और दुर्द्धर्ष पुरुष भी सुंदरियों के कटाक्ष से आहत हो जाते हैं। (c) उर्वशी कहती है- यह देह भाव भ्रांति है। 'उर्वशी' रामधारी सिंह 'दिनकर' का काव्य रचना है जिस पर इन्हें 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उर्वशी में कामाध्यात्म की चर्चा की गयी है अतः ये प्रेम और सौन्दर्य का काव्य है।