यू.जी.सी. NTAनेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून 2022 (हिन्दी) Shift-I

Total Questions: 100

51. "धनी कौन होता है, इसका कोई विचार नहीं करता। वह जो अपने कौशल से दूसरों को बेवकूफ बना सकता है....उपर्युक्त संवाद 'गोदान' में किन पात्रों के मध्य हुआ है?

Correct Answer: (b) गोविन्दी और मेहता
Solution:

"धनी कौन होता है, इसका कोई विचार नहीं करता है। वह जो अपने कौशल से दूसरो को बेवकूफ बना सकता है।" उपर्युक्त संवाद गोदान उपन्यास के पात्र 'गोविन्दी ओर मेहता के मध्य हुआ है। गोदान (1936) उपन्यास के लेखक मुंशी प्रेमचन्द्र है इस उपन्यास के प्रमुख पात्र होरी, हीरा, धनिया, गोबर, मेहता, मालती, राय साहब, गोबिन्दी, दातादीन, मातादीन, झुनिया, मि. खन्ना, ओंकार नाथ आदि। 'गोदान' उपन्यास को किसान जीवन की महागाथा कहा जाता है। मुंशी प्रेमचन्द्र द्वारा रचित अन्य उपन्यास है। देवस्थान रहस्य (1905), प्रेमा (1907), सेवासदन (1918), वरदान (1921) प्रेमाश्रय (1922), रंगभूमि (1925), कायाकल्प (1926), निर्मला (1927), गबन (1931), कर्मभूमि (1932), गोदान (1936) मंगल सूत्र (अधूरा)।

52. नंददास के बारे में रामचंद्र शुक्ल के विचार हैं:

A. इनकी रचना भी बड़ी सरस और मधुर है।
B. कृष्ण की रासलीला का अनुप्रासादियुक्त साहित्यिक भाषा में विस्तार के साथ वर्णन है।
C. इनकी रचना 'रासपंचाध्यायी' सोरठा छंदों में लिखी गयी है।
D. अनुप्रास और चुने हुए संस्कृत पदविन्यास आदि नंददास की कविता में नहीं पाए जाते।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन  कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A और B
Solution:नंददास के बारे में रामचन्द्र शुक्ल के विचार है- "इनकी रचना भी बड़ी सरस और मधुर है।" "कृष्ण की रासलीला का अनुप्रासादियुक्त साहित्यिक भाषा में विस्तार के साथ वर्णन है।
" ये सूरदास जी के प्रायः समकालीन थे और इनकी गणना अष्टछाप में है। इनके संबंध में यह कहावत प्रसिद्ध है कि और कवि गढ़िया, नन्ददास जड़िया' इनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक 'रास पंचाध्यायी' है जो रोला छंद में लिखी गई है। इसके अतिरिक्त इन्होंने भागवत दशम स्कन्ध, रूक्मिणी मंगल, सिद्धान्त पंचाध्यायी, रूपमंजरी, रस मंजरी, मानमंजरी, विरहमंजरी, दानलीला, मानलीला, अनेकार्थमंजरी, ज्ञानमंजरी, श्यामसगाई, भ्रमरगीत और सुदामाचरित्र आदि रचना की।

53. "सतपुड़ा के घने जंगल नींद में डूबे हुए से, ऊंघते अनमने जंगल ।

झाड़ ऊँचे और नीचे चुप खड़े हैं आंख मीचे,
घास चुप है, काश चुप है। मूक शाल, पलाश चुप है:
बन सके तो धँसो इनमें, धँस न पाती हवा जिनमें...."
उपर्युक्त काव्य पंक्तियों का आशय है:

Correct Answer: (c) यहाँ जंगल केवल जंगल नहीं, जीवन की चुनौती है।
Solution:

उपर्युक्त काव्य पंक्तियों का आशय है- 'यहाँ जंगल केवल जंगल नहीं, जीवन की चुनौती है।' हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गाँधीवादी विचारक 'भवानी प्रसाद मिश्र' दूसरे सप्तक के प्रथम कवि है। इनका प्रथम काव्य संग्रह 'गीत-फरोश' है।
इनकी प्रमुख रचनाएं चकित है दुख, पंचशती, बुनी हुई रस्सी, त्रिकाल सन्ध्या, इदम् न मम, कालजयी आदि।

54. 'झूठा - सच' उपन्यास में वर्णित हैं:

A. ग्रामीण अंचलों का सामाजिक यथार्थ
B. विभाजन की भयोत्पादक आशंका
C. शहरी जीवन की विसंगतियां
D. सांप्रदायिक विद्वेष की आग में मानवीय संवेदनाओं की हत्या
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल B और D
Solution:

'झूठा सच' उपन्यास में विभाजन की भयोत्पादक आशंका तथा साम्प्रदायिक विद्वेष की आग में मानवीय संवेदनाओं की हत्या वर्णित है। प्रगतिवादी या मार्क्सवादी विचारधारा के उपन्यासकारों में प्रथमतः यशपाल का नाम आता है। इनके प्रमुख उपन्यास है- दादा कामरेड (1941) देशद्रोही (1943), दिव्या (1945), पार्टी कामरेड (1946), झूठा सच (भाग-1) (1958), झूठा सच (भाग-2) (1960), अप्सरा का श्राप (1965), मेरी तेरी उसकी बात (1974) आदि। 'झूठा सच' दो भागों में प्रकाशित उपन्यास है। प्रथम भाग का नाम 'वतन और देश' तथा दूसरे भाग का नाम 'देश का भविष्य है।

55. 'मेरी भव - बाधा हौ..... दोहे में प्रयुक्त 'झाँई' शब्द के सही अर्थ हैं:

A. परछाई
B. झलक
C. मुस्कान
D. दृष्टि
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A और B
Solution:मेरी भव बाधा हरौ.....दोहे में प्रयुक्त 'झाई'
शब्द के सही अर्थ 'परछाई तथा झलक' हैं। बिहारीलाल की एकमात्र रचना 'बिहारी सतसई' दोहा छंद में रचित है। इसकी भाषा परिनिष्ठित साहित्यिक ब्रजभाषा है।
बिहारी लाल की 'सतसई' की प्रशंसा में किसी कवि ने निम्नलिखित पंक्ति लिखी है-
सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर ।
देखन में छोटे लगें, बेधैं सकल शरीर ।।
बिहारी लाल के समस्त दोहों की संख्या 719 है। परन्तु जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' ने इनके दोहों की संख्या 713 माना है।

56. सूची -I को सूची - II से सुमेलित कीजिए:

सूची - Iसूची - II
A. औपम्य गर्भI. विभावना
B. सादृश्य मूलकII. एकावली
C. विरोध गर्भIII. उत्प्रेक्षा
D. श्रृंखला मूलकIV. व्यतिरेक

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (b) A-IV, B-III, C-I, D-II
Solution:सूची I तथा सूची II का सही मिलान
सूची Iसूची II
औपम्य गर्भव्यतिरेक
सादृश्य मूलकउत्प्रेक्षा
विरोध गर्भविभावना
श्रृंखला मूलकएकावली

57. मुक्तिबोध की रचना है:

Correct Answer: (b) एक साहित्यिक की डायरी
Solution:

'एक साहित्यिक की डायरी' मुक्तिबोध की डायरी विधा की रचना है। जबकि 'प्रवासी की डायरी' हरिवंशराय बच्चन का तथा 'सैलानी की डायरी' राजेन्द्र अवस्थी का डायरी विधा की रचना है। 'अजय की डायरी' डॉ. देवराज का उपन्यास है। डॉ. देवराज के अन्य उपन्यास पथ की खोज, बाहर भीतर, रोड़े और पत्थर, मैं, वे और आप, दोहरी आग की लपट आदि।

58. "यह देह भाव भ्रान्ति हैं।" यह कथन किसका है?

Correct Answer: (b) उर्वशी
Solution:

"यह देह भाव भ्रांति है।” यह कथन उर्वशी का है। 'उर्वशी' (1961) रामधारी हि 'दिनकर' द्वारा रचित 'गीति नाट्य' है। दिनकर को इस महाकाव्य के लिए सन् 1972 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। दिनकर की प्रमुख कृतियां - रेणुका, हुंकार, कुरूक्षेत्र, सामधेनी, रश्मिरथी, दिल्ली, परशुराम की प्रतीक्षा आदि।

59. 'शिवशंभु के चिट्ठे' से संबंधित हैं :

A. आनंदकादंबिनी
B. कलकत्ता
C. चुनार
D. भारत मित्र
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल B और D
Solution:

कलकत्ता तथा भारत मित्र 'शिवशम्भु के चिट्ठे से सम्बन्धित है। बालमुकुन्द गुप्त ने कलकत्ता से सन् 1904-05 ई. भारत मित्र पत्रिका में 'शिवशम्भु के चिट्ठा' नाम से तात्कालीन गवर्नर-जनरल लार्ड कर्जन को सम्बोधित करके निबन्ध लिखा। गुप्त जी के निबन्ध 'गुप्त निबंधावली' शीर्षक से प्रकाशित हैं।

60. छायावाद के बारे में रामचंद्र शुक्ल की स्थापनाएं हैं:

A. छायावाद बड़ी सहृदयता के साथ प्रभाव साम्य पर ही विशेष लक्ष्य रखकर चला है।
B. छायावाद की रचनाएं गीतों के रूप में ही अधिकतर होती हैं।
C. छायावाद में रचना अन्योक्ति पद्धति पर नहीं की जाती हैं।
D. व्यंजना पद्धति का प्रगल्भ और प्रचुर विकास छायावाद की काव्यशैली की असली विशेषता नहीं है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल Aऔर B
Solution:छायावाद के बारे में रामचन्द्र शुक्ल की स्थापनाएं- "छायावाद बड़ी सहृदयता के साथ प्रभाव साम्य पर ही विशेष लक्ष्य रखकर चला है।” तथा "छायावाद की रचनाएं गीतों के रूप में ही अधिकतर होती है।"
हिन्दी में सर्वप्रथम पं. मुकुटधर पाण्डेय ने जबलपुर से प्रकाशित 1920 ई. में हिन्दी में 'छायावाद' शीर्षक से चार किस्तों में एक लेख प्रकाशित करवाया।
छायावाद के प्रवर्तक और प्रस्तोता निम्नलिखित हैं-
प्रस्तोताप्रवर्तक
आचार्य रामचन्द्र शुक्लमैथिलीशरण गुप्त और मुकुटधर पाण्डेय
आचार्य नन्द दुलारे वाजपेयीसुमित्रानन्दन पंत
प्रभाकर माचवेमाखन लाल चतुर्वेदी
इलाचन्द्र जोशी व सर्वमान्य मतजयशंकर प्रसाद