A. विजय का क्षणिक उल्लास हृदय की भूख मिटा देगा? वीरों का भी क्या ही व्यवसाय है, क्या ही उन्मत भावना है।
B. पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी है पाप । विजया! आकाश के सुन्दर नक्षत्र आँखों से केवल देखे ही जाते हैं।
C. नये ढंग के आभूषण, सुन्दर वसन, भरा हुआ यौवन - यह सब तो चाहिए हीः परन्तु एक वस्तु और चाहिए पुरुष को वशीभूत करने के पहले - धोखे की टट्टी !
D. ऐसा जीवन तो विडंबना है, जिसके लिए दिन रात लड़ना पड़े !
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
Correct Answer: (c) केवल B और C
Solution:देवसेना के निम्नलिखित कथन है-
"पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी है पाप! विजया ! आकाश के सुन्दर नक्षत्र आँखों से केवल देखें ही जाते हैं।"
“नये ढंग के आभूषण, सुन्दर वसन, भरा हुआ यौवन यह सब तो चाहिए ही, परन्तु एक वस्तु और चाहिए पुरुष को वशीभूत करने के पहले धोखे की टट्टी!"
उपर्युक्त दोनों कथन जय शंकर प्रसाद कृत 'स्कन्द गुप्त' नाटक की स्त्री पात्र देवसेना की है। स्कन्द गुप्त के प्रमुख (पुरुष पात्र)- स्कन्दगुप्त, पृथ्वी सेन, भट्टार्क, बंधु वर्मा, महादण्ड नायक, पुरुगुप्त, कुमार गुप्त । (स्त्रीपात्र)- अनन्त देवी, देवकी, देवसेना, विजया, रामा, जयमाला, मालिनी।
जयशंकर प्रसाद के प्रमुख नाटक- सज्जन, कल्याणी परिणय, करूणालय, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, स्कन्दगुप्त, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी इत्यादि।