विद्युत धारा और उसके प्रभाव (भौतिक विज्ञान) (Part-II)

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1. किसी कुंडली में विद्युत चुम्बकीय रूप से प्रेरित EMF और प्रेरित धारा की कुंडली के प्रतिरोध R पर निर्भरता किस प्रकार होती है? [RRC Group D 20/09/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (c) प्रेरित EMF, R पर निर्भर नहीं करता है, किन्तु प्रेरित धारा निर्भर करती है
Solution:
  • फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का दूसरा नियम - प्रेरित emf का परिमाण कुंडली से जुड़े चुंबकीय प्रवाह की परिवर्तन की दर के बराबर है।
  • EMF को प्रभावित करने वाले कारक- चुंबकीय शक्ति, घुमावों की संख्या, क्रॉस सेक्शनल क्षेत्रफल, के साथ संबंध चुंबकीय प्रवाह की धारा।
  • एक बंद सर्किट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह ही मात्रक - एम्पीयर (A) । धारा को प्रभावित करने वाले कारक - प्रतिरोध, सिरों पर विभवान्तर।
  • फैराडे का प्रथम नियम
    • प्रेरित EMF: e=-N dϕ/dt
  • निर्भरता:
    • चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन dϕ/dt
    • फेरों की संख्या N
    • R पर स्वतंत्र
    • कारण: EMF फ्लक्स परिवर्तन की दर से उत्पन्न होती है, परिपथ प्रतिरोध इससे असंबंधित।
  • ओम का नियम (प्रेरित धारा)
    • प्रेरित धारा: I=e/R
  • निर्भरता:
    • e स्थिर → I ∝ 1/R
    • R बढ़े → I घटे
  • समान फ्लक्स परिवर्तन:
    • R₁ = 10Ω → I₁ = e/10
    • R₂ = 20Ω → I₂ = e/20 = I₁/2
    • e दोनों में समान
  • लेंज नियम
    • दिशा: प्रेरित धारा फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करती है (R से स्वतंत्र)।
  • ग्राफ
    • e: स्थिर (R बदलने पर अपरिवर्तित)
    • I: हाइपरबोला (R↑ → I↓)
  • निष्कर्ष:
    • EMF: केवल dϕ/dt पर निर्भर
    • धारा: EMF/R → R के व्युत्क्रमानुपाती

2. मान लीजिए कि राममोहन ने बेलनाकार छड़ चुंबक को एक वृत्ताकार परिसंचलन के अक्ष के अनुदिश रखा है। फिर, वह चुंबक को परिसंचलन के अक्ष के परितः घुमाता है। कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा ___ होगी। [RRC Group D 22/09/2022 (Evening)]

Correct Answer: (b) शून्य
Solution:
  • किसी चालक में धारा तभी प्रेरित होती है जब उससे जुड़े चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन होता है।
  • यदि हम बार चुंबक को परिनालिका की धुरी के अनुदिश घुमाते हैं
  • तो चुंबकीय क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं होता है, और इसलिए, कोई प्रेरित धारा नहीं होती है।
  • कारण
    • फैराडे का नियम: प्रेरित EMF केवल तब उत्पन्न होती है जब कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो।
  • स्थिति विश्लेषण:
    • चुंबक का अक्ष → वृत्ताकार परिसंचलन का अक्ष (सह-अनुदैर्ध्य)
    • घूर्णन → अक्ष के परितः (अक्ष स्थिर)
  • महत्वपूर्ण बिंदु:
    • चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र अक्षीय है (N-S दिशा में)
    • कुंडली का क्षेत्रफल भी अक्ष के लंबवत (वृत्ताकार तल)
    • फ्लक्स ϕ=B⋅Acos⁡θ, जहाँ θ=0^∘ (सहमान)
  • घूर्णन प्रभाव
    • घूर्णन → चुंबक का B क्षेत्र कुंडली के सापेक्ष **स्थिर**
    • कोण θ अपरिवर्तित → cosθ अपरिवर्तित → dφ/dt = 0
    • परिणाम: e=-N dϕ/dt=0
  • भौतिक व्याख्या
    • चुंबक घूमे → B रेखाएँ कुंडली के तल के लंबवत ही रहतीं
    • कोई फ्लक्स कटिंग नहीं → कोई EMF नहीं

3. किसी चालक के लिए वोल्टता-धारा ग्राफ की आकृति ______ होगी। [RRC Group D 26/09/2022 (Morning)]

Correct Answer: (b) रैखिक
Solution:
  • ओम का नियम - एक चालक में वोल्टेज इसके माध्यम से प्रवाहित होने वाली धारा के सीधे आनुपातिक होता है
  • बशर्ते सभी भौतिक स्थितियाँ और तापमान स्थिर रहे। V = IR, जहां V चालक का वोल्टेज है, ।
  • चालक के माध्यम से प्रवाही होने वाली धारा है और R चालक द्वारा धारा के प्रवाह के लिए प्रदान किया गया प्रतिरोध है।
  • ओम का नियम
    • सूत्र: V=IR, जहाँ R = स्थिर प्रतिरोध।
    • ग्राफ:
    • x-अक्ष: धारा I
    • y-अक्ष: वोल्टता V
    • रैखिक संबंध: V∝I
    • ढालान: V/I=R (निरंतर)
    • V ↑
    • | \
    • | \
    • | \
    • | \_________ → I
    • ढालान = R
  • ओह्मीय चालक की विशेषताएँ
    • नियत ताप: प्रतिरोध R स्थिर
    • धातु तार: ताँबा, एल्यूमिनियम
    • ग्राफ: मूल बिंदु से गुजरने वाली सीधी रेखा
  • गणनात्मक उदाहरण
    • R = 10Ω चालक:
    • I = 0.1A → V = 1V
    • I = 0.2A → V = 2V
    • I = 0.3A → V = 3V
    • ग्राफ: समान ढालान वाली सीधी रेखा।
  • भौतिक कारण
    • नियत R → V/I = स्थिरांक
    • सीधा समानुपात → रैखिक ग्राफ

4. ______ में वृद्धि के साथ, धारावाही चालक के चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण में वृद्धि होती है। [RRC Group D 26/09/2022 (Morning)]

Correct Answer: (d) धारा
Solution:
  • किसी दिए गए बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण सीधे धारा के माध्यम से गुजरने वाली धारा के परिमाण के समानुपाती होता है और तार की लम्बाई के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  • मूल सिद्धांत
    • बायो-सावर्ट नियम के अनुसार, सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र:
    • B=(μ_0 I)/2πr
    • स्पष्ट निर्भरता: B∝I (धारा के सीधे आनुपातिक)
  • भौतिक कारण
    • अधिक धारा → अधिक आवेश गति → अधिक चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
    • प्रत्येक इलेक्ट्रॉन चुंबकीय द्विध्रुव उत्पन्न करता है
    • कुल धारा I↑→B↑
  • प्रयोगात्मक प्रमाण
  • ऑर्स्टेड प्रयोग:
    • I = 1A → कम विक्षेपण (कम्पास)
    • I = 2A → अधिक विक्षेपण
    • प्रमाण: B ∝ I
  • व्यावहारिक अनुप्रयोग
    • विद्युत चुंबक: धारा बढ़ाने से चुंबक शक्ति ↑
    • इलेक्ट्रोमैग्नेट: I नियंत्रण → चुंबकीय क्षेत्र नियंत्रण
    • रिले: छोटी धारा → बड़ा B → स्विचिंग

5. प्रतिरोध का मान दोगुना हो जाता है यदि इसकी लंबाई ______ है (अन्य मापदंडों को स्थिर रखते हुए)। [RRC Group D 26/09/2022 (Evening)]

Correct Answer: (c) दोगुनी करने
Solution:
  • जब लंबाई। दोगुनी हो जाती है, जबकि क्षेत्रफल A और प्रतिरोधकता p समान रहती है।
  • इसलिए, नया प्रतिरोध प्रारंभिक प्रतिरोध का दोगुना हो जाता है, एक तार का
  • प्रतिरोध R = pl/A | SI मात्रक ओम (Ω)।
  • प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक - चालक की लंबाई, पदार्थ, चालक के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ।
  • प्रतिरोध का सूत्र
    • R=ρ L/A
    • जहाँ:
    • R: प्रतिरोध
    • ρ: विशिष्ट प्रतिरोधकता (पदार्थ पर निर्भर)
    • L: लंबाई
    • A: अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल
  • गणना
    • मूल स्थिति: R=ρ L/A
    • नई स्थिति (अन्य मापदंड स्थिर):
    • L^'=2L
    • A^'=A (स्थिर)
    • ρ^'=ρ (स्थिर)
  • नया प्रतिरोध:
    • R^'=ρ 2L/A=2(ρ L/A)=2R
  • भौतिक कारण
    • लंबाई ↑ → धारा पथ लंबा → अधिक टकराव → प्रतिरोध ↑
    • क्षेत्रफल स्थिर → पथ की चौड़ाई समान → कोई कमी नहीं
  • महत्वपूर्ण शर्त
    • अन्य मापदंड स्थिर" का अर्थ:
    • क्षेत्रफल A अपरिवर्तित
    • पदार्थ ρ अपरिवर्तित
    • तापमान स्थिर

6. एक लघुपथित परिपथ में, धारा ______। [RRC Group D 27/09/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) अत्यधिक तेजी से बढ़ती है।
Solution:
  • लघु परिपथ किसी भी परिपथ को विद्युत शक्ति की आपूर्ति करने वाले दो चालकों के बीच एक कम प्रतिरोध वाला संपर्क है।
  • कारणः तारों के माध्यम से चबाने वाले कीट, ढीले संपर्क, पुराने या क्षतिग्रस्त निर्गम, स्विच, लाइट आदि।
  • मुख्य कारण:
    • प्रतिरोध लगभग शून्य (R≈0)
    • ओम का नियम: I=V/R
    • R↓→I↑ (अनंत तक)
  • भौतिक विश्लेषण
    • सामान्य परिपथ: V → बल्ब (R=10Ω) → I=0.1A
    • लघुपथित: V → तार (R≈0Ω) → I=∞
  • सुरक्षा उपाय
    • फ्यूज → पिघलकर परिपथ खंडित
    • MCB → स्वतः ट्रिप
    • ELCB → अर्थिंग संरक्षण
  • व्यावहारिक उदाहरण
  • घरेलू 5A परिपथ:
    • सामान्य: I = 2A (2 बल्ब)
    • लघुपथ: I = 50-100A (तार पिघलना)
  • गणना
    • 220V, अंतरिक प्रतिरोध 1Ω:
    • सामान्य: R_total = 10Ω → I = 22A
    • लघुपथ: R_total = 1Ω → I = 220A (खतरनाक!)

7. चुंबकीय बल रेखाओं के किसी बिंदु पर आरेखित ______ से चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात की जा सकती है। [RRC Group D 27/09/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) स्पर्शज्या (tangent)
Solution:
  • चुंबकीय क्षेत्र एक चुंबकीय सामग्री या एक गतिमान विद्युत आवेश के आसपास का क्षेत्र है जिसके भीतर चुंबकत्व का बल कार्य करता है।
  • चुंबकीय रेखाओं के गुणः यह विपरीत चुंबकीय ध्रुवों के बीच कम से कम प्रतिरोध का मार्ग खोजती है
  • कभी भी एक दूसरे को नहीं काटती है, सभी में समान शक्ति होती है
  • घनत्व कम हो जाता है जब वे उच्च पारगम्यता के क्षेत्र से कम पारगम्यता की ओर बढ़ते हैं।
  • मुख्य सिद्धांत
    • चुंबकीय बल रेखा: काल्पनिक रेखाएँ जो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और तीव्रता दर्शाती हैं।
  • महत्वपूर्ण गुण:
    • किसी भी बिंदु पर स्पर्शरेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र B ⃗ की दिशा दर्शाती है।
    • स्पर्शरेखा = चुंबकीय सुई के उत्तरी ध्रुव की दिशा।
  • भौतिक व्याख्या
    • चुंबकीय क्षेत्र → → →
    • स्पर्शरेखा ─────→ (B दिशा)
    • बल रेखा पर बिंदु
    • स्पर्शरेखा: बल रेखा का लघु अनुदैर्ध्य खंड उस बिंदु पर।
  • प्रमाण
  • सुई प्रयोग:
    • स्वतंत्र चुंबकीय सुई → N सिरा B दिशा में संरेखित
    • सुई की दिशा = स्पर्शरेखा की दिशा
  • व्यावहारिक उपयोग
    • परिनालिका: स्पर्शरेखा → अक्ष दिशा
    • बार चुंबक: N→S वक्र
    • पृथ्वी B: स्थानीय स्पर्शरेखा → कम्पास

8. l लम्बाई, r त्रिज्या, और p प्रतिरोधकता वाले एक तार का प्रतिरोध, ______ होगा। [RRC Group D 27/09/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) R = pl/∏r²
Solution:
  • प्रतिरोधकता को संचालन की सामग्री अनुप्रस्थ काट के इकाई क्षेत्र के साथ प्रति इकाई लंबाई के संचालन सामग्री के प्रतिरोध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
  • सूत्र→  R= pl/∏r² |  प्रतिरोधकता (p, rho) केवल चालक के तापमान और प्रकृति पर निर्भर करती है न कि सामग्री के आकार या घनत्व पर। इसका मात्रक ओम-मीटर (Ω.m) होता है।
  • l लंबाई, r त्रिज्या, और p प्रतिरोधकता वाले तार का प्रतिरोध R=pl/(πr^2 ) होगा।
  • प्रतिरोध सूत्र
    • सामान्य सूत्र: R=ρ L/A
    • तार के लिए:
    • ρ=p (प्रतिरोधकता)
    • L=l (लंबाई)
    • A=πr^2 (वृत्तीय क्रॉस-सेक्शन क्षेत्रफल)
    • पूर्ण सूत्र: R=pl/(πr^2 )
  • भौतिक व्याख्या
    • क्षेत्रफल ↓ → प्रतिरोध ↑ (1/A)
    • लंबाई ↑ → प्रतिरोध ↑ (∝ L)
  • गणनात्मक उदाहरण
    • दिया: l = 2m, r = 0.5mm = 0.0005m, p = 1.7×10⁻⁸ Ωm (ताँबा)
    • A = π(0.0005)² = 7.85×10⁻⁷ m²
    • R = (1.7×10⁻⁸ × 2) / (7.85×10⁻⁷) ≈ 0.043 Ω
  • व्यावहारिक अनुप्रयोग
    • पतला तार (r↓) → अधिक R → रेसिस्टर
    • मोटा तार (r↑) → कम R → केबल
    • निष्कर्ष: R=pl/(πr^2 ) - त्रिज्या का वर्ग व्युत्क्रमानुपातिक।

9. पूर्व दिशा में धारा प्रवाहित करने वाले सीधे धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ______ दिशा के अनुदिश होती है।

Correct Answer: (a) दक्षिण
Solution:
  • किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा एक कंपास सुई रखकर निर्धारित की जाती है।
  • मैक्सवेल का दाहिना हाथ के अंगूठे का नियम - यदि दाहिने हाथ का अंगूठा धारा के प्रवाह की दिशा को इंगित करता है
  • तो शेष उंगलियां उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निर्धारित करती हैं।
  • दायें हाथ का अंगूठा नियम
    • नियम: दाहिने हाथ का अंगूठा धारा की दिशा (पूर्व) में रखें, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती हैं।
    • अंगूठा → पूर्व (धारा)
    • उंगलियाँ → चालक के चारों ओर वृत्त (⊙)
  • चालक के विभिन्न  बिंदुओं पर B दिशा
    • चालक (पूर्व →) ──────────
    • ↑ उत्तर ↓ दक्षिण
    • B ←───────→ B (वृत्ताकार)
    • पश्चिम पूर्व
    • ↓ दक्षिण ↑ उत्तर
  • उदाहरण:
    • चालक के ऊपर: उत्तर से दक्षिण
    • चालक के नीचे: दक्षिण से उत्तर
    • बायें: पश्चिम से पूर्व
  • भौतिक व्याख्या
    • बायो-सावर्ट नियम: dB ⃗=μ_0/4π (Idl ⃗×r ̂)/r^2
    • परिणाम: सभी सूक्ष्म तत्वों का योग → वृत्ताकार क्षेत्र रेखाएँ।
  • व्यावहारिक परिणाम
    • कम्पास रखें → सुई चालक के लंबवत घूमेगी
    • B तीव्रता: B = μ₀I/(2πd) (d = चालक से दूरी)

10. कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा, ______ में एक बार बदलेगी। [RRC Group D 27/09/2022 (Evening)]

Correct Answer: (a) कुंडली के प्रत्येक आधे परिक्रमण
Solution:
  • कुंडली के प्रत्येक आधे परिक्रमण। प्रत्येक घुमाव पर, प्रेरित धारा की दिशा बदल जाती है।
  • कुंडली की सापेक्ष गति की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र हर आधे चक्कर में बदल जाता है
  • प्रेरित धारा की दिशा हर आधे चक्कर में एक बार बदल जाती है।
  • चुंबकीय क्षेत्र एक चुंबकीय वस्तुओं या एक गतिमान विद्युत आवेश के आसपास का क्षेत्र है जिसके भीतर चुंबकत्व बल कार्य करता है।
  • लेंज का नियम
    • मुख्य सिद्धांत: प्रेरित धारा फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करती है।
  • दिशा परिवर्तन:
    • फ्लक्स ↑ → प्रेरित I विपरीत दिशा
    • फ्लक्स ↓ → प्रेरित I सम दिशा
    • प्रत्येक परिवर्तन → दिशा बदलती है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • स्विच ऑन/ऑफ:
    • DC ऑन → φ↑ → I₁ (विपरीत)
    • DC ऑफ → φ↓ → I₂ (सम)
    • 2 परिवर्तन → 2 दिशाएँ**
  • घूर्णी कुंडली (AC जनरेटर)
    • 0° → अधिकतम φ → न्यून EMF
    • 90° → शून्य φ → अधिकतम EMF
    • 180° → ऋणात्मक φ → विपरीत EMF
    • प्रति चक्र 2 दिशा परिवर्तन**
  • फ्लेमिंग दायाँ हाथ नियम
    • अंगूठा: गति
    • तर्जनी: B क्षेत्र
    • मध्यमा: **EMF दिशा**
    • फ्लक्स परिवर्तन → EMF दिशा परिवर्तन।