विद्युत धारा और उसके प्रभाव (भौतिक विज्ञान) (Part-II)Total Questions: 10011. अपशिष्ट के उत्पादन को कम करने का सर्वाधिक प्रभावी समाधान क्या है? [RRC Group D 27/09/2022 (Evening)](a) मनाही (Refuse)(b) पुनः उपयोग (Reuse)(c) कम्पोस्टिंग (Composting)(d) दहन (Combustion)Correct Answer: (d) दहन (Combustion)Solution:पुनर्प्रयोग - वस्तुओ का उपयोग विभिन्न उद्देश्यो के लिए किया जा सकता है।पुनर्चक्रणः पुरानी वस्तुओं को एक नई वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया है।कम्पोस्ट खाद - जैविक कचरे जैसे फलों और सब्जियों के छिलकों से खाद बनाई जाती है।जैविक खाद का प्रयोग पौधों के लिए उर्वरक के रूप में किया जाता है।वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके ऊष्मा छोड़ता है, दहन कहलाती है।3R सिद्धांत की प्राथमिकतापरीक्षण क्रम (सबसे प्रभावी से कम प्रभावी):कम करें (Reduce)** ← सबसे प्रभावीपुनः उपयोग (Reuse)पुनर्चक्रण (Recycle)कम्पोस्टिंग/दहनक्यों "कम करना" सबसे प्रभावी?व्यावहारिक उपायथोक खरीद → पैकेजिंग ↓पुनः प्रयोज्य → एकल उपयोग ↓मरम्मत → नया उत्पादन ↓डिजाइन → टिकाऊ उत्पादउदाहरणप्लास्टिक:पहले: 100% → लैंडफिलपुनर्चक्रण: 70% → 30% लैंडफिलकम करें: 0% → 100% समस्या समाधाननीतिगत समर्थनउत्पादक जिम्मेदारी (EPR)प्लास्टिक प्रतिबंधथोक प्रोत्साहनपैकेजिंग मानक12. इलेक्ट्रिक ओवन की कार्यप्रणाली के पीछे की परिघटना ______ है। [RRC Group D 28/09/2022 (Morning)](a) प्रेरित वोल्टेज(b) प्रेरित धारा(c) विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण(d) जूल का तापन प्रभावCorrect Answer: (d) जूल का तापन प्रभावSolution:जूल का तापन प्रभाव - विद्युत धारा द्वारा उत्पन्न ऊष्मा चालक के प्रतिरोध, धारा के वर्ग और उसके प्रवाहित होने के समय के गुणनफल के बराबर होती है।तार में उत्पन्न ऊष्मा को H=/Rt जूल में व्यक्त किया जाता है(जहाँ,। = धारा, R = प्रतिरोध, t = समय)। अनुप्रयोगः विद्युत इस्त्री (iron), विद्युत केतली, विद्युत टोस्टर, विद्युत ओवन, रूम हीटर, गीजर।जूल तापन सिद्धांतसूत्र: H=I^2 Rtकार्यप्रणाली:विद्युत धारा → हीटिंग तत्व (निक्रोम तार)इलेक्ट्रॉन टकराव → परमाणु कंपन ↑ → ऊष्मा उत्पन्नसंरचनामुख्य घटक:हीटिंग एलिमेंट: निक्रोम (Ni-Cr) तार, उच्च प्रतिरोधइन्सुलेशन: माइका/सिरेमिक (ऊष्मा संरक्षण)थर्मोस्टेट: तापमान नियंत्रणकवच: स्टेनलेस स्टील (परावर्तन)ताप उत्पत्ति चक्रधारा I → R प्रतिरोध → I²R ऊष्मानिक्रोम: 1400°C तक सहनशीलविकिरण + संवहन → ओवन गर्मथर्मोस्टेट → चक्र नियंत्रणऊर्जा रूपांतरणविद्युत ऊर्जा → ऊष्मा ऊर्जादक्षता: 80-90% (अन्य: विकिरण हानि)13. यदि किसी चालक से प्रवाहित धारा की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के बीच का कोण शून्य हो, तो चालक पर लगने वाला बल (F) कितना होगा? [RRC Group D 28/09/2022 (Afternoon)](a) शून्य(b) F(c) 2F(d) F/2Correct Answer: (a) शून्यSolution:चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाला बल : F = BILsinθ, जहाँ F = बल, B = चुंबकीय प्रवाह, । = धारा, L = तार की लंबाई।चूँकि दिए गए प्रश्न में किसी चालक में बहने वाली धारा की दिशा तथा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के बीच का कोण शून्य है, इसलिए, F = BIL.sin 0°, F = 0 (sin 0° = 0)लॉरेंट्ज़ बल सूत्रसूत्र: F=BILsinθदिया गया:θ=0^∘sin0^∘=0परिणाम: F=BIL×0=0भौतिक कारणवेक्टर क्रॉस प्रोडक्ट:\(\vec{F} = I (\vec{L} \times \vec{B})\)θ = 0° → \(\vec{L}\) और \(\vec{B}\) समांतर\(\vec{L} \times \vec{B} = 0\)फ्लेमिंग बायाँ हाथ नियमअंगूठा: F (शून्य)तर्जनी: B →मध्यमा: I →समांतर होने पर F शून्य (कोई लंबवत घटक नहीं)।व्यावहारिक उदाहरणपरिनालिका अंदर: I || B → F = 0 (कोई विस्थापन नहीं)मोटर: 90° पर अधिकतम टॉर्कचित्रणB → → → चुंबकीय क्षेत्रI → → → धारा (समांतर)F = 0 (कोई बल नहीं)14. किस भौतिक राशि का मात्रक वोल्ट/एम्पियर होता है। [RRC Group D 28/09/2022 (Evening)](a) कार्य(b) धारा(c) आवेश(d) प्रतिरोधCorrect Answer: (d) प्रतिरोधSolution:चालक का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है।कार्य : वस्तु पर लगाये गए बल तथा उत्पन्न विस्थापन के अदिश गुणनफल को वस्तु पर कृत कार्य कहते है।मात्रक - जूल। विद्युत धारा : कंडक्टर के किसी भी क्रॉस-सेक्शन के माध्यम से विद्युत आवेश के प्रवाह की दर। मात्रक - एम्पीयर।वैद्युत आवेश पदार्थ का वह भौतिक गुण है जिसके कारण विद्युतचुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर यह एक बल का अनुभव करता है। मात्रक - कूलम्ब।ओम का नियमसूत्र: V=IRपुनर्व्यवस्था: R=V/Iमात्रक:R = V/Iप्रतिरोध = वोल्ट/एम्पियर = Ω (ओम)व्यावहारिक उदाहरण10Ω प्रतिरोधक:V = 10V → I = V/R = 10/10 = 1AR = V/I = 10V/1A = 10 V/A = 10Ω ✓अन्य समान मात्रक1 ओम (Ω) = 1 वोल्ट/एम्पियर1 ओम = 1 kg⋅m²⋅s⁻³⋅A⁻² (SI आधार मात्रक)15. किसी धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र, ______ में वृद्धि के साथ घटता है। [RRC Group D 28/09/2022 (Evening)](a) वोल्टेज(b) धारा(c) दूरी(d) प्रतिरोधCorrect Answer: (c) दूरीSolution:वे कारक जिन पर सीधे धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र निर्भर करता हैचालक में धारा - उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण तार से गुजरने वाली धारा के समानुपाती होता है।तार से दूरी - उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण तार से दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।भौतिक व्याख्याचालक से निकट → अधिक क्षेत्र रेखाएँ → B अधिकचालक से दूर → रेखाएँ फैलती → B कमव्यावहारिक उदाहरणI = 10A चालक:r = 1cm → B = 2×10⁻⁵ Tr = 2cm → B = 1×10⁻⁵ T (आधा)r = 4cm → B = 0.5×10⁻⁵ T (चौथाई)चित्रणचालक ───── (I)↑ B अधिक ↑ B कमr₁ (निकट) r₂ (दूर)16. फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम के अनुसार, किसी विदयुत मोटर में, कुंडली की भुजाओं से प्रवाहित होने वाली धाराओं की दिशा एक-दूसरे के ______ होगी। [RRC Group D 29/09/2022 (Morning)](a) विपरीत(b) समानांतर(c) लंबवत(d) समान दिशा मेंCorrect Answer: (a) विपरीतSolution:फ्लेमिंग के बाएं हाथ का नियम - जब एक धारावाही चालक को एक बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता हैतो चालक क्षेत्र और धारा प्रवाह की दिशा दोनों के लंबवत एक बल का अनुभव करता है।इसका उपयोग विद्युत मोटर में कार्य करने वाले चुंबकीय बल की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।अंगूठा (संचालक द्वारा अनुभव किए गए बल की दिशा)। तर्जनी (चुंबकीय क्षेत्र की दिशा) और मध्यमा (विद्युत धारा की दिशा)।फ्लेमिंग बायाँ हाथ नियम (मोटर नियम)अंगूठा: F (बल/घूर्णन दिशा)तर्जनी: B (चुंबकीय क्षेत्र)मध्यमा: I (धारा दिशा)तीनों लंबवत।मोटर कुंडली विश्लेषणDC मोटर कुंडली (आर्मेचर):N ध्रुव ──[लाल भुजा]── S ध्रुवI ↑ I ↓लाल भुजा: धारा अंदर की ओर (मध्यमा उंगली)नीला भुजा: धारा बाहर की ओर (विपरीत मध्यमा)बल दिशाएँB → → → (क्षैतिज, तर्जनी)लाल भुजा: I ↑ → F घड़ी दिशा (अंगूठा)नीला भुजा: I ↓ → F घड़ी दिशा (अंगूठा)विपरीत धाराएँ → समान घूर्णन दिशा।दिक्परिवर्तक का योगदान0° स्थिति: I₁ ↑, I₂ ↓ → घड़ी घूर्णन180° स्थिति: दिक्परिवर्तक I₁ ↓, I₂ ↑ → अभी भी घड़ीधारा दिशा बदलती, बल दिशा स्थिर।17. किसी धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा परिवर्तित करने के लिए इनमें से किस विधि का प्रयोग किया जा सकता है? [RRC Group D 29/09/2022 (Afternoon)]I. धारा के परिमाण में परिवर्तनII. चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता में परिवर्तनIII. धारा की दिशा में परिवर्तन(a) केवल I(b) दोनों I और III(c) केवल III(d) दोनों II और IIICorrect Answer: (c) केवल IIISolution:फ्लेमिंग के बाएं हाथ का नियमः अपने बाएं हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अंगुष्ठ को इस प्रकार फैलाया जाना चाहिए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत हों। यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करती है अंगुष्ठ चालक की गति की दिशा 1 या चालक पर लगने वाले बल की ओर संकेत करेगा।लॉरेंट्ज़ बल सूत्रसूत्र: F ⃗=IL ⃗×B ⃗दिशा निर्धारण: बल दिशा I ⃗ और B ⃗ के क्रॉस प्रोडक्ट पर निर्भर।धारा दिशा उलटने पर:मूल: I → → → → F ↑ (फ्लेमिंग नियम)नया: I ← ← ← ← F ↓ (विपरीत)फ्लेमिंग बायाँ हाथ नियममूल धारा: मध्यमा → (I दिशा) → अंगूठा ↑ (F)नया धारा: मध्यमा ← (I विपरीत) → अंगूठा ↓ (F विपरीत)प्रयोगात्मक प्रमाणऑर्स्टेड प्रयोग:धारा पूर्व → कम्पास दक्षिणावर्तधारा पश्चिम → कम्पास वामावर्तव्यावहारिक अनुप्रयोगDC मोटर:दिक्परिवर्तक → धारा दिशा उलटनाबल दिशा स्थिर (घूर्णन निरंतर)18. शरीर के अंदर उत्पन्न दुर्बल चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके शरीर के विभिन्न अंगों की छवियां प्राप्त करने की प्रक्रिया को ______ कहा जाता है। [RRC Group D 30/09/2022 (Morning)](a) पी. ई. टी. स्कैन (PET scan)(b) अल्ट्रासाउंड स्कैन (Ultrasound scan)(c) सी. टी. स्कैन (CT scan)(d) एम. आर. आई. स्कैन (MRI scan)Correct Answer: (d) एम. आर. आई. स्कैन (MRI scan)Solution:चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (MRI) - MRI एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र, रेडियोफ्रीक्वेंसी स्पंदो और एक कंप्यूटर का उपयोग आंतरिक शरीर संरचनाओं की विस्तृत तस्वीरें बनाने के लिए करता है।CT (कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी) स्कैन - शरीर की क्रॉस-सेक्शनल छवि बनाने के लिए एक्स-रे और कंप्यूटर का उपयोग करता है।अल्ट्रासाउंड स्कैन अल्ट्रासाउंड स्कैन एक व्यक्ति के आंतरिक शरीर संरचनाओं की एक चित्र बनाने के लिए उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है।पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी (PET) स्कैन - यह एक प्रकार का चित्र परीक्षण (imaging test) है।यह शरीर में बीमारी की तलाश के लिए ट्रेसर नामक रेडियोधर्मी पदार्थ का उपयोग करता है। PET स्कैन दिखाता है कि अंग और ऊतक कैसे काम कर रहे हैं।कार्य सिद्धांतमुख्य आधार: मानव शरीर में आयनों की गति से दुर्बल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है (न्यूरॉन्स, हृदय में आयनिक धाराएँ)।MRI प्रक्रिया:शक्तिशाली B क्षेत्र → हाइड्रोजन प्रोटॉन संरेखितRF पल्स → प्रोटॉन घूर्णन उत्तेजितआराम (relaxation) → संकेत उत्सर्जनग्रेडिएंट कॉइल → स्थान निर्धारणकंप्यूटर → 3D छवि निर्माणभौतिक आधारशरीर का चुंबकत्व:तंत्रिका कोशिकाएँ: Na⁺, K⁺ आयन धाराएँ → B क्षेत्रहृदय: विद्युत सिग्नल → चुंबकीय क्षेत्रप्रोटॉन स्पिन: पानी के H अणु (60% शरीर)व्यावहारिक उपयोगमस्तिष्क ट्यूमर → न्यूरोलॉजीहृदय रोग → कार्डियोलॉजीकैंसर → ऑन्कोलॉजी19. विदयुत-चुंबकीय प्रेरण की परिघटना में, धारावाही कुंडली और चुंबकीय क्षेत्र स्थैतिक होने पर गैल्वेनोमीटर ______। [RRC Group D 30/09/2022 (Morning)](a) शून्य विक्षेपण प्रदर्शित करता है(b) एक-एक बार दोनों ओर विक्षेपण प्रदर्शित करता(c) दाईं ओर विक्षेपित होता है(d) बाईं ओर विक्षेपित होता हैCorrect Answer: (a) शून्य विक्षेपण प्रदर्शित करता हैSolution:विद्युत चुंबकीय प्रेरण एक बदलते चुंबकीय क्षेत्र के लिए वोल्टेज उत्पादन (विद्युत वाहक बल) के कारण उत्पन्न होने वाली धारा है।खोजे गए - माइकल फैराडे द्वारा (1831)। फॉर्मूला, e = N × dΦ/dt, जहां, e- प्रेरित वोल्टेज (वोल्ट में), N - कुंडली में घुमावों की संख्या, Φ - चुंबकीय प्रवाह, t - समय।फैराडे का प्रथम नियममुख्य सिद्धांत: प्रेरित EMF केवल तब उत्पन्न होती है जब चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो।स्थिति:धारावाही कुंडली → I स्थिर → φ स्थिरचुंबकीय क्षेत्र → B स्थिर → φ स्थिरdφ/dt = 0 → e = 0 → I_prerit = 0परिणामगैल्वेनोमीटर: कोई प्रेरित धारा → सूई स्थिर।प्रयोग सत्यापनफैराडे का प्रयोग:चुंबक लाना → φ↑ → विक्षेपणचुंबक स्थिर → φ स्थिर → **कोई विक्षेपण**चुंबक हटाना → φ↓ → विपरीत विक्षेपणभौतिक कारणφ = B ⋅ A ⋅ cosθB स्थिर, A स्थिर, θ स्थिर → φ स्थिरe = -N dφ/dt = 0व्यावहारिक निहितार्थप्रयोग: स्थिर अवस्था → baseline शून्यDC आपूर्ति: स्थिर I → कोई प्रेरणट्रांसफॉर्मर: AC → परिवर्तनशील φ20. यदि दो समांतर सीधे चालकों में धारा प्रवाह की दिशा समान है, तो उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रों की दिशाएं ______ होंगी। [RRC Group D 30/09/2022 (Afternoon)](a) एक दूसरे के लंबवत(b) एक दूसरे के विपरीत(c) यादृच्छिक दिशाओं में(d) समान दिशा मेंCorrect Answer: (b) एक दूसरे के विपरीतSolution:दो धारावाही चालक एक दूसरे को आकर्षित करते हैं जब धारा एक ही दिशा में होती है और जब धारा विपरीत दिशा में होती हैतो एक दूसरे को पीछे हटाते हैं। इसे फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से सत्यापित किया जा सकता हैअंगूठा चालक द्वारा अनुभव किए गए बल की दिशा की ओर इंगित करता हैतर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर इंगित करती है और मध्यमा विद्युत प्रवाह की दिशा की ओर इंगित करती है।दायें हाथ का अंगूठा नियमप्रत्येक चालक:अंगूठा → धारा दिशा (समान)उंगलियाँ → चालक के चारों ओर वृत्ताकार Bपरिणाम: दोनों चालकों के B क्षेत्र विपरीत दिशा में घूमते हैं।चित्रणचालक 1 ───→ I (दायाँ)⊙ B (चालक 2 की ओर)चालक 2 ───→ I (दायाँ)⊙ B (चालक 1 की ओर)मध्य क्षेत्र: B₁ ↓ और B₂ ↑ → परस्पर विपरीत।बल पर प्रभावएम्पीयर बल:F = (μ₀ I₁ I₂)/(2πd) प्रति इकाई लंबाईसमान I दिशा → **आकर्षण बल**कारण: विपरीत B क्षेत्र → प्रत्येक चालक दूसरे के B में लंबवत → आकर्षी F।गणनादूरी d पर:चालक 1 का B₂ पर: B₁ = μ₀I₁/(2πd)चालक 2 का B₁ पर: B₂ = μ₀I₂/(2πd)F₁ = I₂ L B₁ sin90° (आकर्षी)F₂ = I₁ L B₂ sin90° (आकर्षी)Submit Quiz« Previous12345678910Next »