Correct Answer: (d) मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अतिशोषण/दुरुपयोग, प्राकृतिक आवासों का सविभाजन / नाश, पारितंत्र का विनाश, प्रदूषण और वैश्विक जलवायु परिवर्तन।
Solution:जैव-विविधता पृथ्वी पर जीन से लेकर जैव-भौगोलिक क्षेत्रों तक और पारिस्थितिकीय एवं उद्दिकास की प्रक्रियाओं तक सभी स्तरों पर जीवन का वैविध्य प्रस्तुत करती है। जैव-विविधता पारितंत्रों के स्वास्थ्य का पैमाना है। जैव-विविधता जितनी व्यापक होगी, वहां स्वास्थ्य की उतनी ही परिपूर्णता विद्यमान होगी। पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभ से पांच प्रमुख बृहद विलोपन (Mass Extinction) के फलस्वरूप जैव-विविधता के स्तर में अचानक भारी गिरावट आ गई। इस छठें (होलोसीन विलोपन) व्यापक विलोपन में जैव-विविधता की गिरावट की दर जीवाश्म रिकॉर्ड में पांच पूर्ववर्ती व्यापक विलोपन की घटनाओं की दरों से अधिक है। विलोपन की यह घटनाएं प्राथमिक रूप से पर्यावरण एवं जलवायु संबंधी स्थितियों में हुए अचानक परिवर्तनों के कारण हुई है। तथापि-जैव विविधता में होने वाली वर्तमान क्षति की दर विलोपन की प्राकृतिक पृष्ठभूमि से अधिक है। इसका मुख्य कारण मानवीय क्रिया-कलाप हैं जिनके कारण पर्यावास विखंडन, अवक्रमण एवं क्षति, आनुवांशिक विविधता में संकुचन विजातीय प्रजातियों का अतिक्रमण, संसाधनों का अति दोहन, प्रदूषण आदि की घटनाएं होती है। जैव-विविधता को होने वाली क्षति के परिणामस्वरूप प्राकृतिक संपदा को क्षति पहुंचती है। वर्ष 2004 में, चार महाद्वीपों पर किए गए एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 2050 तक लगभग 10 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी।