स्वराज पार्टी का गठन (1923) (UPPCS)

Total Questions: 22

1. भारत में स्वराज पार्टी की स्थापना निम्नलिखित कारणों में से एक अथवा अधिक के लिए की गई थी- [U.P Lower Sub.(Pre) 1998]

1. गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लेना
2. काउंसिलों में प्रवेश कर तथा उन्हें काम न करने देकर 1919 के भारत शासन अधिनियम का उच्छेदन करना
3. ब्रिटिश सरकार द्वारा दमन
4. भारतीयों द्वारा इस आशय की अनुभूति कि उन्हें प्रशासन का अनुभव प्राप्त करना चाहिए

कूट :

Correct Answer: (b) 1 और 2
Solution:

वर्ष 1919 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा स्थापित केंद्रीय तथा प्रांतीय विधानमंडलों का कांग्रेस ने गांधी जी के निर्देशानुसार बहिष्कार किया था, और वर्ष 1920 के चुनावों में भाग नहीं लिया। असहयोग आंदोलन की समाप्ति और गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद देश के वातावरण में एक अजीब निराशा का माहौल बन गया था। ऐसी स्थिति में मोतीलाल नेहरू तथा सी.आर. दास ने एक नई विचारधारा को जन्म दिया। मोतीलाल नेहरू तथा सी.आर. दास ने कांग्रेस को विधानमंडलों के भीतर प्रवेश कर अंदर से लड़ाई लड़ने का विचार प्रस्तुत किया तथा वर्ष 1923 के चुनावों के माध्यम से विधानमंडल में पहुंचने की योजना बनाई। किंतु वर्ष 1922 में कांग्रेस के गया अधिवेशन में बहुमत के साथ इस योजना को अस्वीकार कर दिया गया। सी.आर. दास (इस दौरान वे कांग्रेस के अध्यक्ष थे) ने कांग्रेस की अध्यक्षता से त्याग-पत्र दे दिया और जनवरी, 1923 में मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की। इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य चुनावों के माध्यम से काउंसिलों में प्रवेश कर तथा उन्हें काम न करने देकर 1919 के भारत शासन अधिनियम का उच्छेदन करना था।

2. निम्न में किसने स्वराज पार्टी निर्माण करने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र दिया था? [U.P. P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004]

Correct Answer: (a) सी.आर. दास
Solution:

1922 के गया अधिवेशन में विधान परिषदों के भीतर से संघर्ष करने के प्रस्ताव को बहुमत न मिलने पर चित्तरंजन दास ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र दे दिया था। इसके बाद उन्होंने मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर जनवरी 1923 में स्वराज पार्टी का गठन किया। इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य चुनावों में भाग लेकर परिषदों में प्रवेश करना और ब्रिटिश सरकार की नीतियों का भीतर से विरोध करना था। उन्हें 'देशबंधु' के नाम से भी जाना जाता है।

3. स्वराज पार्टी का गठन ____ की असफलता के बाद हुआ। [43rd B.P.S.C. (Pre) 1999]

Correct Answer: (a) असहयोग आंदोलन
Solution:

स्वराज पार्टी का गठन असहयोग आंदोलन की असफलता के बाद हुआ था। फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना के कारण जब महात्मा गांधी ने अचानक असहयोग आंदोलन वापस ले लिया, तो कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग निराश हो गया। इस निराशा और राजनीतिक शून्यता को भरने के लिए 'स्वराज पार्टी' का उदय हुआ।

4. स्वराज दल की स्थापना ____ असफलता के बाद हुई- [Bihar P.C.S. (Pre) 2016]

Correct Answer: (a) असहयोग आंदोलन
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

5. स्वराज पार्टी को संस्थापित किया था- [U.P Lower Sub.(Pre) 1998, Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002, M.P. P.C.S. (Pre) 2006, Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2007]

Correct Answer: (c) सी.आर. दास तथा मोतीलाल नेहरू ने
Solution:

स्वराज पार्टी की स्थापना 1 जनवरी, 1923 को चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा की गई थी। असहयोग आंदोलन के स्थगन के बाद उपजे असंतोष के कारण इन नेताओं ने कांग्रेस के भीतर ही 'परिवर्तनवादी' गुट बनाया और चुनावों में भाग लेने का निर्णय लिया। सी. आर. दास इसके प्रथम अध्यक्ष और मोतीलाल नेहरू महासचिव बने। इस पार्टी ने 1923 के चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया और परिषदों के भीतर ब्रिटिश नीतियों का कड़ा मुकाबला करके राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई ऊर्जा प्रदान की।

6. 1923 में स्वराज पार्टी का गठन किसने किया ? [66th B.P.S.C (Pre) 2020]

Correct Answer: (c) सी.आर. दास व मोतीलाल नेहरू
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

7. 'स्वराज दल' की स्थापना किसने की? [53rd to 55th B.P.S.C. (Pre) 2011]

Correct Answer: (d) चित्तरंजन दास एवं मोतीलाल नेहरू
Solution:

स्वराज दल की स्थापना वर्ष 1923 में देशबंधु चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा की गई थी। असहयोग आंदोलन के स्थगन के बाद भारतीय राजनीति में आई शिथिलता को दूर करने के लिए इन नेताओं ने विधान परिषदों में प्रवेश करने का मार्ग चुना। जहाँ कांग्रेस का एक वर्ग चुनावों के बहिष्कार के पक्ष में था, वहीं स्वराज दल ने 'भीतर से अड़ंगा लगाने' की नीति अपनाई। इस दल ने 1923 के केंद्रीय विधानसभा चुनावों में 101 में से 42 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता सिद्ध की थी।

8. निम्न में से कौन 'स्वराज पार्टी' के गठन से संबंधित थे? [U.P. P.C.S. (Pre) 1998]

1. सुभाष चंद्र बोस             2. सी.आर. दास
3. जवाहरलाल नेहरू         4. मोतीलाल नेहरू

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :

Correct Answer: (d) 2 तथा 4
Solution:

स्वराज दल की स्थापना वर्ष 1923 में देशबंधु चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा की गई थी। असहयोग आंदोलन के स्थगन के बाद भारतीय राजनीति में आई शिथिलता को दूर करने के लिए इन नेताओं ने विधान परिषदों में प्रवेश करने का मार्ग चुना। जहाँ कांग्रेस का एक वर्ग चुनावों के बहिष्कार के पक्ष में था, वहीं स्वराज दल ने 'भीतर से अड़ंगा लगाने' की नीति अपनाई। इस दल ने 1923 के केंद्रीय विधानसभा चुनावों में 101 में से 42 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता सिद्ध की थी।

9. मोतीलाल नेहरू और सी.आर. दास द्वारा 1923 ई. में गठित पार्टी का नाम क्या था? [U.P.P.C.S (Pre) 2016]

Correct Answer: (c) स्वराज पार्टी
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

10. मोतीलाल नेहरू स्वराज दल के नेता थे। निम्न में से कौन दल में नहीं था ? [U.P. P.C.S. (Pre) 1993, U.P. P.C.S. (Pre) 1991]

Correct Answer: (d) सी. राजगोपालाचारी
Solution:

स्वराज दल का नेतृत्व मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू और चित्तरंजन दास कर रहे थे, जबकि सी. राजगोपालाचारी इस दल में शामिल नहीं थे। वे 'अपरिवर्तनवादी' गुट के प्रमुख नेता थे, जो विधान परिषदों में प्रवेश के बजाय गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों और बहिष्कार की नीति को जारी रखना चाहते थे। स्वराज दल के अन्य प्रमुख सदस्यों में विट्ठलभाई पटेल और हकीम अजमल खान जैसे नेता शामिल थे, जिन्होंने सदन के भीतर रहकर ब्रिटिश नीतियों का विरोध करने की रणनीति अपनाई थी।