1857 की क्रांति (UPPCS) (भाग – 1)

Total Questions: 50

21. 1857 का विद्रोह लखनऊ में किसके नेतृत्व में आगे बढ़ा? [48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008]

Correct Answer: (a) बेगम ऑफ अवध
Solution:

1857 का विद्रोह लखनऊ (अवध) में बेगम हजरत महल के नेतृत्व में आगे बढ़ा। जब अंग्रेजों ने 1856 में 'कुशासन' का आरोप लगाकर अवध को हड़प लिया और नवाब वाजिद अली शाह को कलकत्ता निर्वासित कर दिया, तो उनकी पत्नी बेगम हजरत महल ने विद्रोह की कमान संभाली। बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिर्जिस काद्र को अवध का नवाब घोषित कर दिया और स्वयं उसकी संरक्षिका बनकर प्रशासन चलाया। लखनऊ के पतन के बाद बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल जाना बेहतर समझा, जहाँ बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

1857 के विद्रोह के प्रमुख नेता और स्थान:
• दिल्ली: बहादुर शाह जफर (सम्राट) और जनरल बख्त खान (सैन्य नेतृत्व)।
• बैरकपुर: मंगल पांडे।
• झांसी: रानी लक्ष्मीबाई।
• मेरठ: कदम सिंह।
• कानपुर: नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र), तात्या टोपे, अजीमुल्लाह खान।
• बिहार (जगदीशपुर): कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह।
• फैजाबाद: मौलवी अहमदुल्लाह।
• हरियाणा/रेवाड़ी: राव तुला राम।

22. वह महिला, जिन्होंने अवध में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया था- [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010]

Correct Answer: (d) बेगम हजरत महल
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

23. लखनऊ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किसने किया था? [U.P. P.C.S. (Pre) (Re-Exam) 2015]

Correct Answer: (c) हजरत महल
Solution:

1857 का विद्रोह लखनऊ (अवध) में बेगम हजरत महल के नेतृत्व में आगे बढ़ा। जब अंग्रेजों ने 1856 में 'कुशासन' का आरोप लगाकर अवध को हड़प लिया और नवाब वाजिद अली शाह को कलकत्ता निर्वासित कर दिया, तो उनकी पत्नी बेगम हजरत महल ने विद्रोह की कमान संभाली। बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिर्जिस काद्र को अवध का नवाब घोषित कर दिया और स्वयं उसकी संरक्षिका बनकर प्रशासन चलाया। लखनऊ के पतन के बाद बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल जाना बेहतर समझा, जहाँ बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

1857 के विद्रोह के प्रमुख नेता और स्थान:
• दिल्ली: बहादुर शाह जफर (सम्राट) और जनरल बख्त खान (सैन्य नेतृत्व)।
• बैरकपुर: मंगल पांडे।
• झांसी: रानी लक्ष्मीबाई।
• मेरठ: कदम सिंह।
• कानपुर: नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र), तात्या टोपे, अजीमुल्लाह खान।
• बिहार (जगदीशपुर): कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह।
• फैजाबाद: मौलवी अहमदुल्लाह।
• हरियाणा/रेवाड़ी: राव तुला राम।

24. निम्न में से कौन इलाहाबाद में 1857 के संग्राम का नेता था? [U.P.P.C.S. (Mains) 2015]

Correct Answer: (d) मौलवी लियाकत अली
Solution:

इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में 1857 के संग्राम का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था। मौलवी लियाकत अली ने खुद को मुगल सम्राट का प्रतिनिधि घोषित किया और खुसरो बाग को अपना मुख्यालय बनाया। इलाहाबाद का किला और खुसरो बाग विद्रोह के प्रमुख केंद्र थे। इलाहाबाद में विद्रोह को दबाने का काम ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील ने किया था। मौलवी लियाकत अली विद्रोह के बाद बॉम्बे (मुंबई) चले गए थे, जहाँ बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और कालापानी (अंडमान) की सजा सुनाई गई, जहाँ उनकी मृत्यु हुई।

25. 1857 के संघर्ष में भाग लेने वाले सिपाहियों की सर्वाधिक संख्या थी- [U.P. Lower Sub. (Pre) 2015]

Correct Answer: (b) अवध से
Solution:

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले सिपाहियों की सर्वाधिक संख्या अवध से थी। इतिहासकारों के अनुसार, उस समय ब्रिटिश भारतीय सेना में अकेले अवध क्षेत्र से लगभग 75,000 सैनिक शामिल थे। अवध को उस समय "बंगाल आर्मी की पौधशाला" कहा जाता था क्योंकि यहाँ के लगभग हर परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में भर्ती था। लॉर्ड डलहौजी द्वारा 'कुशासन' का बहाना बनाकर अवध को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लेना सैनिकों के लिए एक बड़ा भावनात्मक धक्का था।

26. नाना साहब का "कमांडर-इन-चीफ" कौन था? [U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008]

Correct Answer: (c) तात्या टोपे
Solution:

कानपुर में 5 जून, 1857 को नाना साहब को पेशवा मानकर स्वतंत्रता की घोषणा की गई। नाना साहब को सेनापति (कमांडर-इन चीफ) तात्या टोपे से बहुत सहायता मिली थी। तात्या टोपे, जिनका वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग येवलकर था, नाना साहब के सबसे वफादार और कुशल सैन्य रणनीतिकार थे। उन्होंने कानपुर के विद्रोह में प्रमुख भूमिका निभाई और नाना साहब के पलायन के बाद भी छापामार युद्ध के जरिए अंग्रेजों को लंबे समय तक छकाया। उनके एक विश्वासघाती मित्र मान सिंह ने उन्हें सोते समय अंग्रेजों के हवाले कर दिया था, जिसके बाद 18 अप्रैल, 1859 को उन्हें शिवपुरी में फांसी दे दी गई।

27. अजीमुल्ला खां सलाहकार थे- [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012]

Correct Answer: (a) नाना साहब के
Solution:

अजीमुल्ला खाँ नाना साहब के मुख्य सलाहकार थे। अजीमुल्ला खाँ ने 1857 के विद्रोह के दौरान नाना साहब के लिए एक कूटनीतिज्ञ और राजनीतिक प्रचारक की भूमिका निभाई थी। उन्हें 'क्रांति का दूत' भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने नाना साहब के संदेशों को विभिन्न रियासतों तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

28. वर्ष 1857 के विद्रोह के संदर्भ में निम्नलिखित में से किसे उसके मित्र ने धोखा दिया तथा जिसे अंग्रेजों द्वारा बंदी बनाकर मार दिया गया ? [I.A.S. (Pre) 2006]

Correct Answer: (d) तात्या टोपे
Solution:

तात्या टोपे (1814-1859 ई.) को रामचंद्र पांडुरंग के नाम से भी जाना जाता है। वे 1857 के भारतीय विद्रोह के प्रमुख नेता थे। इनका जन्म महाराष्ट्र में येओला गांव में हुआ था। वे अपने पिता (पांडुरंग राव टोपे) के साथ बिठूर आ गए, जहां वे पेशवा के दत्तक पुत्र नाना धोंदो पंत (इन्हें नाना साहब के नाम से भी जाना जाता है) और महाराजा माधव सिंह जी के मित्र बन गए। 1851 ई. में डलहौजी ने नाना साहब को उनके पिता के पेंशन से वंचित कर दिया, उधर तात्या टोपे पहले से ही ब्रिटिशों को अपना शत्रु मान चुके थे, दोनों ने मिलकर कानपुर में ईस्ट इंडिया कंपनी की सैन्य टुकड़ियों को पराजित कर नाना साहब के आधिपत्य को स्थापित किया और तात्या स्वयं सेना के कमांडर-इन-चीफ बन गए। नाना साहब से अलग होने के बाद तात्या टोपे अपना मुख्यालय काल्पी ले गए और रानी लक्ष्मीबाई से हाथ मिलाया। दोनों ने मिलकर बुंदेलखंड क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व किया। जनरल ह्यूरोज ने ग्वालियर के उस ऐतिहासिक युद्ध में इन्हें हराया, जिसमें रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। ग्वालियर खो देने के पश्चात तात्या टोपे ने सागर एवं नर्मदा क्षेत्र तथा खानदेश एवं राजस्थान क्षेत्र में सफलतापूर्वक गुरिल्ला युद्ध का संचालन किया। एक वर्ष तक अंग्रेज सेनाएं उन्हें पकड़ने में नाकाम रहीं। अंततः उनके एक विश्वसनीय मित्र मानसिंह ने उन्हें धोखा देकर उस समय पकड़वा दिया, जब वे पारों के जंगलों में अपने कैम्प में शयन कर रहे थे। यहां से उन्हें पकड़कर शिवपुरी लाया गया और सैनिक अदालत में 18 अप्रैल, 1859 को फांसी दे दी गई।

29. 1857 के निम्नलिखित क्रांतिकारियों में से किसका वास्तविक नाम 'रामचंद्र पांडुरंग' था? [U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2010 & U.P.P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (b) तात्या टोपे
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

30. कुंवर सिंह, 1857 के विद्रोह के एक प्रमुख नायक थे। वह निम्नलिखित में से किससे संबद्ध थे? [I.A.S. (Pre) 2005]

Correct Answer: (a) बिहार
Solution:

1857 में जगदीशपुर में विद्रोह की अगुवाई करने वाले कुंवर सिंह बिहार के तत्कालीन शाहाबाद जिले के जगदीशपुर (वर्तमान भोजपुर जिले में स्थित) से संबंधित थे। प्रकृति ने उन्हें अदम्य शौर्य, वीरता और सेनानायक के आदर्श गुणों से मंडित किया था, इसी कारण उन्हें सही रूप में विद्रोह के दौरान 'बिहार का सिंह' माना जाता है। उन्होंने शाहाबाद एवं आरा क्षेत्र में अंग्रेजों की सत्ता का तख्तापलट दिया और अपनी सरकार स्थापित की। वह कानपुर पर संयुक्त आक्रमण के लिए नाना साहब की मदद हेतु काल्पी की ओर आगे बढ़े। वह विद्रोह की मशाल को रोहतास, मिर्जापुर, रीवा, बांदा और लखनऊ तक ले गए, जहां उनका अत्यंत सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। अपनी अंतिम सफलता के रूप में उन्होंने अपने गृहनगर जगदीशपुर के निकट अंग्रेजों को बुरी तरह पराजित किया। इसी युद्ध के दौरान कुंवर सिंह बुरी तरह घायल हो गए और 26 अप्रैल, 1858 को उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई अमर सिंह ने दिसंबर, 1858 तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।