1857 की क्रांति (UPPCS) (भाग – 1)

Total Questions: 50

41. निम्नलिखित में से कौन असम में 1857 की क्रांति का नेता था? [U.P. P.C.S. (Mains) 2007]

Correct Answer: (a) दीवान मनिराम दत्त
Solution:

असम में 1857 की क्रांति के समय वहां के दीवान मनिराम दत्त ने वहां के अंतिम राजा के पौत्र कंदपेश्वर सिंह को राजा घोषित करके विद्रोह की शुरुआत की; मनीराम दत्त उस समय कलकत्ता में थे, जहाँ से उन्होंने असम के स्थानीय नेताओं और कंदर्पेश्वर सिंह को पत्र लिखकर विद्रोह के लिए प्रेरित किया। मनीराम दत्त और उनके सहयोगी पियाली बरुआ को गिरफ्तार कर लिया गया और 26 फरवरी, 1858 को जोरहट में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई।

42. 1857 के विद्रोह का बिहार में 15 जुलाई, 1857 से 20 जनवरी, 1858 तक केंद्र था- [43rd B.P.S.C. (Pre) 1999]

Correct Answer: (d) जगदीशपुर
Solution:

1857 के विद्रोह का बिहार में 15 जुलाई, 1857 से 20 जनवरी, 1858 तक प्रमुख केंद्र जगदीशपुर था। जगदीशपुर (भोजपुर जिला) वह स्थान था जहाँ से कुंवर सिंह ने अपनी समानांतर सरकार चलाई और ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी। यद्यपि विद्रोह की आग बिहार के कई हिस्सों में फैली थी, लेकिन जगदीशपुर इस पूरी अवधि के दौरान क्रांतिकारियों का मुख्य मुख्यालय और शक्ति का केंद्र बना रहा। जगदीशपुर से ही कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश (आजमगढ़ और बलिया) के क्षेत्रों में जाकर अंग्रेजों पर हमले किए और छापामार युद्ध की योजना बनाई।

43. 1857 ई. की क्रांति में अंग्रेजों व जोधपुर की संयुक्त सेना को पराजित करने वाला था- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1993]

Correct Answer: (d) आउवा के ठाकुर कुशल सिंह
Solution:

1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों और जोधपुर की संयुक्त सेना को पराजित करने वाले आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह थे। बिथोड़ा के युद्ध (8 सितंबर, 1857) में कुशाल सिंह ने जोधपुर के महाराजा तख्त सिंह की सेना (जिसका नेतृत्व ओनाड़ सिंह कर रहा था) और कैप्टन हीथकोट की अंग्रेजी सेना को पराजित किया। चेलावास के युद्ध (18 सितंबर, 1857) को 'काले-गोरे का युद्ध' भी कहा जाता है। इसमें राजस्थान के ए.जी.जी. जॉर्ज लॉरेंस और जोधपुर के पॉलिटिकल एजेंट मॉक मेसन की संयुक्त सेना को हार का सामना करना पड़ा।

44. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थल राजस्थान में 1857 की क्रांति का केंद्र नहीं था ? [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2012]

Correct Answer: (b) जयपुर
Solution:

राजस्थान में 1857 की क्रांति के दौरान जयपुर विद्रोह का मुख्य केंद्र नहीं था। यद्यपि जयपुर में विद्रोह की गुप्त योजनाएँ बनी थीं, लेकिन वहां के महाराजा रामसिंह द्वितीय अंग्रेजों के प्रति पूरी तरह वफादार रहे और उन्होंने अपने राज्य में विद्रोह को पनपने नहीं दिया। इसके विपरीत, नसीराबाद, नीमच, आउवा और कोटा जैसे स्थान क्रांति के धधकते हुए केंद्र थे।

केंद्र का नामस्थितिमुख्य घटना/नेता
नसीराबादप्रमुख केंद्रराजस्थान में क्रांति की शुरुआत (28 मई, 1857) यहीं से हुई थी।
आउवाप्रमुख केंद्रठाकुर कुशाल सिंह ने अंग्रेजों और जोधपुर की संयुक्त सेना को हराया था।
कोटाप्रमुख केंद्रयहाँ सबसे भीषण 'जन-विद्रोह' हुआ; मेजर बर्टन का सिर काटा गया था।
जयपुरकेंद्र नहींयहाँ के शासक और पॉलिटिकल एजेंट (एडन) ने विद्रोह को नियंत्रित रखा।

45. निम्नलिखित में से किसने 1857 में अंग्रेजों से संघर्ष किया? [M.P. P.C.S. (Pre) 2000]

Correct Answer: (c) शहादत खान
Solution:

शहादत खान वह व्यक्ति थे जिन्होंने 1857 में अंग्रेजों से संघर्ष किया था। इन्होंने इंदौर (मध्य प्रदेश) में ब्रिटिश सेना के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था।

नामप्रमुख कालखंडयोगदान
शहादत खान1857इंदौर विद्रोह के नायक।
चंद्रशेखर आजाद1906–1931क्रांतिकारी आंदोलन (HRA/HSRA) के नेता।
रामप्रसाद बिस्मिल1897–1927काकोरी कांड और क्रांतिकारी राष्ट्रवादी।
माखनलाल चतुर्वेदी1889–1968प्रसिद्ध कवि ('पुष्प की अभिलाषा') और स्वतंत्रता सेनानी।

46. निम्नलिखित में से कौन 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों का सबसे कट्टर दुश्मन था? [45th B.P.S.C. (Pre) 2001]

Correct Answer: (a) मौलवी अहमदुल्लाह शाह
Solution:

मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद में 1857 के विद्रोह को अपना नेतृत्व प्रदान किया। ये अंग्रेजों के सबसे कट्टर दुश्मन थे। वह मूलतः तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के चिनापट्टन के रहने वाले थे, पर वह फैजाबाद में आकर बस गए थे। उन्होंने भारत के विभिन्न धर्मानुयायियों का आह्वान करते हुए कहा कि "सारे लोग काफिर अंग्रेजों के विरुद्ध खड़े हो जाओ और उन्हें भारत से बाहर खदेड़ दो।" इनके बारे में अंग्रेजों ने और दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति तथा विद्रोहियों में सर्वोत्तम सैनिक है।" इनकी मगरफ्तारी के लिए ब्रिटिश सरकार ने 50,000 रु. का इनाम रखा था।

47. 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भोपाल के किस वीर ने बहादुरीपूर्ण मुख्य संघर्ष कर बलिदान दिया? [M.P.P.C.S. (Pre) 2019]

Correct Answer: (a) फाजिल मुहम्मद खान
Solution:

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भोपाल रियासत के जिस वीर ने अंग्रेजों के खिलाफ बहादुरीपूर्ण संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया, उनका नाम फ़ाज़िल मोहम्मद खान था। उन्होंने अपने भाई आदिल मोहम्मद खान के साथ मिलकर भोपाल क्षेत्र में विद्रोह का बिगुल फूंका था। जनवरी 1858 में सर ह्यू रोज ने राहतगढ़ के किले को घेर लिया। फ़ाज़िल मोहम्मद खान ने वीरतापूर्वक युद्ध किया, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा। फ़ाज़िल मोहम्मद खान को अंग्रेजों ने पकड़ लिया और 30 जनवरी, 1858 को राहतगढ़ किले के मुख्य द्वार पर उन्हें फांसी दे दी गई।

48. 1857 के विद्रोह को किस उर्दू कवि ने देखा था? [45th B.P.S.C. (Pre) 2001]

Correct Answer: (c) गालिब
Solution:

1857 के विद्रोह को अपनी आँखों से देखने वाले प्रसिद्ध उर्दू कवि मिर्जा गालिब थे। जब दिल्ली में विद्रोह की आग भड़की और अंग्रेजों ने शहर को दोबारा जीतने के लिए भीषण मारकाट मचाई, तब गालिब दिल्ली में ही मौजूद थे। दस्तंबू गालिब की फारसी भाषा में लिखी गई एक महत्वपूर्ण डायरी है, जिसमें उन्होंने 11 मई, 1857 से लेकर 1 अगस्त, 1858 तक के दिल्ली के हालात का वर्णन किया है।
मिर्जा गालिब ने अंग्रेजों द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के बाद की स्थिति को बयां करते हुए कहा था कि— "यहाँ मेरे सामने रक्त का एक विशाल सागर है, खुदा ही जानता है कि मुझे अभी और क्या-क्या देखना बाकी है।"

49. सुप्रसिद्ध उर्दू शायर मिर्जा गालिब का मूल निवास था- [U.P. Lower Sub. (Pre) 2002]

Correct Answer: (a) आगरा
Solution:

सुप्रसिद्ध उर्दू शायर मिर्जा गालिब का मूल निवास आगरा था। उनका पूरा नाम मिर्जा असदुल्लाह बेग खान था। उनका जन्म 27 दिसंबर, 1797 को आगरा में हुआ था। उनका निधन 1869 में दिल्ली में हुआ, जहाँ उनकी मज़ार (गालिब की मज़ार) निज़ामुद्दीन बस्ती के पास स्थित है। गालिब को 'दबीर-उल-मुल्क' और 'नज्म-उद-दौला' की उपाधियाँ अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वारा दी गई थीं।

50. आजादी की पहली लड़ाई 1857 में किसने भाग नहीं लिया ? [M.P. P.C.S. (Pre) 2000]

Correct Answer: (d) भगत सिंह
Solution:

भगत सिंह ने 1857 की आजादी की पहली लड़ाई में भाग नहीं लिया, जबकि रानी लक्ष्मीबाई, बहादुरशाह जफर एवं तात्या टोपे ने 1857 की लड़ाई में भारतीय जनमानस का नेतृत्व किया था।