Solution:विद्रोह के समय भारतीयों में एकता के अभाव के चाहे जो भी कारण रहे हों; किंतु विद्रोह के लिए यह घातक सिद्ध हुआ। विद्रोहियों के लक्ष्य को धक्का पहुंचाने के लिए यह अकेली कमजोरी नहीं थी। भारतीय सिपाही बहादुर तथा स्वार्थरहित तो थे, मगर उनमें अनुशासन और एकता का अभाव था। बंबई और मद्रास की सेनाएं राजभक्त रहीं। अवध और रुहेलखंड के तथा अन्य उत्तरी भारत के सामंतवादी तत्वों ने विद्रोह का नेतृत्व किया; किंतु दूसरी ओर अन्य सामंतवादी तत्वों ने; जैसे-पटियाला, जींद, ग्वालियर और हैदराबाद के राजाओं ने इस विद्रोह के दमन में सहायता की। यूरोपीय इतिहासकारों ने ग्वालियर के मंत्री सर दिनकर राव और हैदराबाद के मंत्री सालारजंग की राजभक्ति की बहुत सराहना की है।
रणनीति और रणकौशल की दृष्टि से भी अंग्रेजी सेनाएं भारतीय विद्रोहियों से बहुत आगे थीं। वे भारतीय सिपाहियों की तुलना में अधिक सुसज्जित थीं। अतः 1857 के विद्रोह की असफलता के उपर्युक्त सभी कारण जिम्मेदार थे।