NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

91. उपर्युक्त गद्यांश से संबंधित प्रश्न में दर्ज हैं-

रीतिकालीन हिन्दी कविता का एक लक्षण यह भी है कि उसके पिछले वर्षों की कविताएँ रीति के बन्धनों से बहुत कुछ मुक्त हो जाती हैं एवं उनमें नया आनंद झलकने लगता है, जो परिमार्जित शैली में हृदय की सच्ची अनुभूतियों के लिखनू का आनन्द हैं। आलम, बोधा और घनानंद इसी आनंद के कवि है। आश्चर्य की बात है कि जैसे अठारहवीं सदी में इन कवियों ने कविता में फिर से प्राण डाल दिए, वैसे ही इस कला में पहाड़ी कलम (कांगड़ा शैली) के चलते चित्रकला भी सजीव हो उठी। और जैसे आलम, बोधा और घनानंद में जो आकर्षण है, उसका उद्गम सूफी भाव-धारा और भारतीय भाव धारा का मिलन बिंदु है, वैसे पहाड़ी कलम में भी ताजगी मुगल-कलम से आई। पहाड़ी कलम मुगलकलम की सद्यः सन्तति है। एवं यही कलम अजन्ता के बाद भारत की सबसे उच्च कलामय उड़ान भी है। घनानन्द की कविता में जो हार्दिकता और उन्मुक्तता है, वही हार्दिकता और उन्मुक्तता पहाड़ी शैली के गुण हैं। ये कलाकार जनजीवन के बहुत समीप थे। उन्होंने अनेक विषयों पर चित्र बनाए। हिन्दी के प्रमुख और साधारण कवियों से लेकर जीवन की दैनिक चर्या और शबीह तक, ऐसा एक भी विषय नहीं है, जिसे इस शैली के चित्रकारों ने छोड़ा हो।
उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य प्रतिपाद्य हैं-

Correct Answer: (d) कविता और कला का अंतः संबंध
Solution:उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य प्रतिपाद्य कविता और कला का अंतः संबंध है।

92. रीतिमुक्त कवि आलम, बोधा, ठाकुर और घनानंद की कविता की प्रमुख काव्यानुभुति है-

Correct Answer: (c) हृदय की सच्ची अनुभूति की आनन्दात्मक अभिव्यक्ति
Solution:रीतिमुक्ति कवि आलम, बोधा, ठाकुर और घनानन्द की कविता की प्रमुख काव्यानुभूति हृदय की सच्ची अनुभूति की आनन्दात्मक अभिव्यक्ति है।

93. अजन्ता के बाद भारत की सबसे उच्चमतम कलामय उड़ान संभव हुई-

Correct Answer: (b) पहाड़ी कलम में
Solution:उपयुक्त गद्यांश के अनुसार अजन्ता के बाद भारत की सबसे उच्चतम कलामय उड़ान पहाड़ी कलम (कांगड़ा शैली) में संभव हुई।

94. अठारहवीं सदी में रीतिकालीन कविता की तरह पहाड़ी कलम से निम्नलिखित में से कौन सी कला जीवंत हुई?

Correct Answer: (d) चित्रकला
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार अठारहवीं सदी में रीतिकालीन कविता की तरह पहली कलम से चित्रकला जीवंत हुई।

95. उत्तरवर्ती रीतिकालीन कवियों में उन्मुक्त चित्रात्मक शैली का सर्वाधिक प्रभाव किसमें परिलक्षित होता है।-

Correct Answer: (a) घनानंद में
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार उत्तरवर्ती रीतिकालीन कवियों में उन्मुक्त चित्रात्मक शैली का सर्वाधिक प्रभाव घनानन्द में परिलक्षित होता है।

96. उपर्युक्त गद्यांश से संबंधित प्रश्न में दर्ज हैं-

यह साधना कहाँ तक फलवती हुई है, इसकी कसौटी व्यवहार ही है। जीवन में अपमान, दुःख, कष्ट आने पर व्यक्ति क्या करता है, क्या वह रोने बैठ जाता है, क्या वह प्रतिशोध के लिए बावला हो उठता है, तब तो समझना चाहिए कि साधना कच्ची ही है। भावसाधना तो व्यक्तिगत साधना है, किन्तु उसकी सुगंध साधक की क्रिया में आनी चाहिए। क्रिया सामाजिक होती है। साधना में कहाँ तक सिद्धि मिली है, इसकी कसौटी क्रिया ही है। यदि वह दूषित है तो साधना को भी दूषित समझना चाहिए। अपना प्रिय यदि थप्पड़ लगा दे तो उसके प्रेम पर विश्वास होने के कारण हम उसे क्रीड़ा समझते हैं। फिर प्रभु पर पूरा विश्वास हो और उनकी तरफ से आये आघात को कोई स्वीकार न करें तो बात नहीं बनती है।
क्रिया के सम्बन्ध में कथन है-

Correct Answer: (b) दूषित क्रिया साधना को दूषित करेगी
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार क्रिया के संबंध में कथन है- दूषित क्रिया साधना को दूषित करेगी।

97. भावसाधना की सुगंध कहाँ दिखती है-

Correct Answer: (b) क्रिया में
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार भावसाधना की सुगंध क्रिया में दिखती है।

98. निम्नलिखित में कौन-सा कथन सही नहीं हैं-

Correct Answer: (b) क्रिया असामाजिक होती है।
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार 'क्रिया असामाजिक होती है यह कथन सही नहीं है क्योंकि क्रिया सामाजिक होती है। दिये विकल्पों में शेष कथन गद्यांश के अनुसार सही है।

99. पक्की साधना का लक्षण है-

Correct Answer: (c) परिपक्व व्यवहार करना
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार 'परिपक्व व्यवहार करना' पक्की साधना का लक्षण है।

100. गद्यांश का मूल भाव है-

Correct Answer: (b) साधना सिद्धि की कसोटी क्रिया है।
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार गद्यांश का मूल भाव है- साधना-सिद्धी की कसौटी क्रिया है।