NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

41. निम्नलिखित ग्रंथों को कालानुक्रम में व्यवस्थित कीजिए :

A. रसगंगाधर
B. चन्द्रालोक
C. साहित्यदर्पण
D. काव्यानुशासन
E. रस मीमांसा
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) D, B, C, A, E
Solution:निम्नलिखित ग्रंथों का कालानुक्रम इस प्रकार है-
ग्रंथआचार्य
काव्यानुशासनआचार्य हेमचन्द्र (12वीं सदी
चन्द्रालोकजयदेव (13वीं सदी)
साहित्य दर्पणविश्वनाथ (14वीं सदी का पूर्वार्ध)
रस गंगाधरपंडितराज जगन्नाथ (17वीं सदी)
रस मीमांसाआचार्य रामचन्द्र शुक्ल (19वीं सदी)

42. निम्न में से हिंदी भाषा में सबसे पहले खेला गया (मंचित) नाटक कौन था :

Correct Answer: (d) जानकीमंगल
Solution:हिंदी भाषा में सबसे पहले खेला गया (मंचित) नाटक शीतला प्रसाद त्रिपाठी का 'जानकी मंगल' माना गया है। जिसे 1868 ई. में काशी में खेला गया। जिसमें लक्ष्मण का अभिनय भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने किया।
☐ गोपाल चन्द्र (गिरधरदास) कृत 'नहुष' (1859 ई.) नाटक को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को हिंदी का प्रथम नाटक माना है।
☐ 'शकुन्तला' (1862 ई.) नाटक राजा लक्ष्मण सिंह का तथा 'विद्यासुंदर' (1868ई.) नाटक भारतेन्दु हरिशन्द्र का है।

43. सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची I उपन्याससूची II पात्र
A. बेनीमाधवI. गोदान
B. पटेश्वरीII. मैला आँचल
C. सकलद्वीपIII. झूठा सच
D. नरोत्तमIV. मानस का हंस

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A-IV, B-I, C-II,D-III
Solution:सूची I का सूची II से सही मिलान इस प्रकार है-
सूची I पात्रसूची II उपन्यासरचनाकार
बेनीमाधवमानस का हंसअमृतलाल नागर
पटेश्वरीगोदानप्रेमचंद
सकलद्वीपमैला आँचलफणीश्वर नाथ 'रेणु'
नरोत्तमझूठा सचयशपाल

44. मिथक के संबंध में उचित कथन है-

A. मिथक संपूर्ण मानवता के शताब्दियों में सारभूत अनुभव पुंज हैं और अवचेतन में सुषुप्त होने के बावजूद कई क्षेत्रों में हमारा प्रत्याक्षाप्रत्यक्ष रूप नियमन करते हैं।
B. मिथक में ज्ञानेन्द्रियों के जटिल और वैविध्यपूर्ण आद्या अनुभव- पुंज निहित नहीं होते हैं।
C. बच्चन सिंह के अनुसार मिथकों से अतिप्राकृत तत्व, अनुष्ठान, आख्यान, बिंब और प्रतीक इन पाँच तत्वों को ग्रहण किया जा सकता है।
D. हिंदी में मिथक के लिए पुरावृत्त, पुराकथा और पुराख्यान आदि शब्द प्रयुक्त होते हैं।
E. समाज शास्त्रियों के अनुसार मिथक सामाजिक व्यवस्था के संरक्षण तथा संचालन के लिए नहीं गढ़े जाते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल A, C, D
Solution:मिथक के संबंध में उचित कथन निम्नलिखित है-
A. मिथक संपूर्ण मानवता के शताब्दियों में सारभूत अनुभव पुंज हैं और अवचेतन में सुषुप्त होने के बावजुद कई क्षेत्रों में हमारा प्रत्याक्षाप्रत्यक्ष रूप नियमन करते हैं।
C. बच्चन सिंह के अनुसार मिथकों से अतिप्राकृत तत्व, अनुष्ठान, आख्यान, बिंब और प्रतीक इन पाँच तत्वों को ग्रहण किया जा सकता है।
D. हिंदी में मिथक के लिए पुरावृत्त, पुराकथा और पुराख्यान आदि शब्द प्रयुक्त होते हैं।
प्राचीनतम धार्मिक मान्यताओं को व्यक्त करन वाली अतिमानवीय कथाओं को 'पुराकथा या पुराकल्पन' अर्थात 'मिथक' कहते हैं। हिंदी साहित्य में 'मिथक' के प्रयोग के परंपरा की शुरूआत आधुनिक काल से मानी जाती है। मिथ शब्द से बना है मिथक । 'मिथ' शब्द संस्कृत और आग्ल भाषा दोनों में पाया जाता है। संस्कृत में मिथ शब्द का आशय दो तत्वों के मिलन तथा प्रत्यक्ष ज्ञान से है। आंग्ल भाषा में मिथ का अर्थ है- कोरी कल्पना। अंग्रेजी के शब्द मिथ का हिन्दी रूप मिथक है और इस शब्द का प्रयोग आधुनिक काल में हुआ। यह शब्द हिन्दी जगत को आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी से मिला, मिथक के लिए डा. नगेन्द्र तथा कवि बच्चन ने 'दन्तकथा, डा. रामअवध द्विवेदी ने 'पुरावृत्त', डा. लक्ष्मी नारायण शर्मा ने 'पुराख्यान' और आ. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने 'मिथक' शब्द का प्रयोग किया जो आज हिन्दी साहित्य में सर्वाधिक प्रचलित है। आ. द्विवेदी ने मिथक शब्द जोड़कर उसे हिंदी बना दिया।

45. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन- I: दण्डी ने नैसर्गिक प्रतिभा, निर्मल शास्त्रज्ञान और अमन्द अभियोग (अभ्यास) को काव्य का हेतु माना है।
कथन-II: मम्मट के अनुसार शक्ति निपुणता और अभ्यास काव्य रचना के हेतु हैं।
उपरोक्त कथन के अलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सत्य हैं।
Solution:दिये गये कथनों के सम्बन्ध में सबसे उपयुक्त विकल्पों के उत्तर निम्नलिखित हैं-
1. दण्डी ने नैसर्गिक प्रतिभा, निर्मल शास्त्रज्ञान और अमन्द अभियोग (अभ्यास) को काव्य का हेतु माना है।
2. मम्मट के अनुसार शक्ति निपुणता और अभ्यास काव्य रचना के हेतु हैं। अतः कथन I और कथन II दोनों सत्य है। 'हेतु' का तात्पर्य 'कारण' से है। 'काव्य हेतु' का अभिप्राय काव्य की रचना के लिए आवश्यक कारणों से है अर्थात् काव्य के सृजन के लिए किन तत्वों का होना जरूरी है। संस्कृत काव्यशास्त्र में मुख्यतः तीन काव्य हेतुओं को माना गया है- प्रतिभा (शक्ति), व्युत्पत्ति और अभ्यास ।
प्रस्तोता आचार्यकाव्य-हेतु
भामहप्रतिभा
दण्डीप्रतिभा, शास्त्रज्ञान, अभ्यास
रुद्रट, कुंतकशक्ति, व्युत्पत्ति, अभ्यास
वामनलोक (लोक व्यवहार), विद्या, प्रकीर्ण
जयदेवमूल प्रतिभा (व्युत्पत्ति, अभ्यास सहायक)
मम्मटशक्ति, निपुणता, अभ्यास
हेमचंद्रकेवल प्रतिभा
जगन्नाथकेवल प्रतिभा

46. भाषा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।

A. मानव भाषा में भूमिकाओं की परस्पर परिवर्तनीयता होती है।
B. विविक्तता मानव भाषा का अभिलक्षण नहीं है।
C. मानव-भाषा यादृच्छिक होती है।
D. भाषा द्वैतता को 'अभिरचना की द्वैतता' भी कहते है।
E. स्थान और काल का अन्तरण मानवेतर भाषा गुण है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल A, C, D
Solution:भाषा के संबंध में दिये गये कथन निम्नलिखित है-
A. मानव भाषा में भूमिकाओं की परस्पर परिवर्तनीयता होती है।
C. मानव-भाषा यादृच्छिक होती है।
D. भाषा द्वैतता को 'अभिरचना की द्वैतता' भी कहते है।
यहाँ 'भाषा' से आशय है 'मनुष्य की भाषा' तथा 'अभिलक्षण' से आशय है 'विशेषता' या 'मूलभूत लक्षण' । किसी भी वस्तु के अभिलक्षण उसे अन्य सभी प्राणियों की भाषाओं से अलग करते करते है। यहाँ ध्यान देने की बात है कि भाषा केवल मनुष्यों की ही बपौती नहीं हैं। मकड़ी, मधुमक्खी, गिबन तथा चिम्जी आदि अनेक ऐसे जीव-जन्तु हैं जो किसी न किसी प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं। हाँ, यह अवश्य है कि मनुष्य की भाषा अन्य सभी जीवों की भाषा से स्पष्टतः अलग है। उसके अपने कुछ ऐसे अभिलक्षण हैं जो सभी मिलकर उसे अन्य प्राणियों की भाषाओं से अलग करते हैं। अर्थात् इन अभिलक्षणों में तो कुछ अन्य जीवों की भाषाओं में मिलते हैं, किन्तु सभी केवल मानव भाषा में। हॉकिट इस प्रसंग में सात अभिलक्षणों को उल्लेख करते है। मुख्य अभिलक्षण निम्नांकित नौ दस माने जा सकते है-
1. यादृच्छिकता
2. सृजनात्म
3 अनुकरणग्राह्मता
4. परिवर्तनशीलता
5. विवक्तता
6. द्वैतता
7. भूमिकाओं की परस्पर परिवर्तनीयता
8. अंतरणता
9. मौखिकता
* मानव भाषा में भूमिकाओं की परस्पर परिवर्तनीयता होती है
* विविक्तता मानव भाषा का अभिलक्षण है।
* मानव भाषा यादृच्छिक होती है।
* भाषा द्वैतता को 'अभिरचना की द्वैतता' भी कहते है।
* दिक्कालांतरण (स्थान और काल का अन्तरण) मानव भाषा का एक महत्वपूर्ण अभिलक्षण है। अतः स्थान और काल का अंतरण मानवेतर (मानव से अलग) भाषा गुण नहीं है।

47. प्रथम प्रकाशन वर्ष के अनुसार इन उपन्यासों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

A. भूले बिसरे चित्र                         B. निरूपमा
C. अपने-अपने अजनबी               D. कंकाल
E. मुर्दाघर
नीचे दिए गए किल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) D, B, A, C, E
Solution:प्रकाशन वर्ष के अनुसार उपन्यासों का क्रम निम्नलिखित है-
उपन्यासप्रकाशन वर्षउपन्यासकार
कंकाल1929 ई.जयशंकर प्रसाद
निरूपमा1936 ई.सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
भूले बिसरे चित्र1959 ई.भगवतीचरण वर्मा
अपने-अपने अजनबी1961 ई.अज्ञेय
मुर्दाघर1974 ई.जगदम्बा प्रसाद दीक्षित

48. "ईश्वर को पाने का एकमात्र उपाय यह है कि उसे उसकी सृष्टि में देखा जाय और इस सृष्टि से एकात्म्य स्थापित किया जाय।" यह कथन किसका है?

Correct Answer: (b) महत्मा गांधी
Solution:"ईश्वर को पाने का एकमात्र उपाय यह है कि उसे उसकी सृष्टि में देखा जाय और इस सृष्टि से एकात्म्य स्थापित किया जाय।" यह कथन महात्मा गाँधी का है।

भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना के कारण मौजूदा विचारों, आदर्शों और संस्थाओं की समीक्षा हुई। इस सम्पर्क का पहला प्रभाव स्वाभाविक रूप से धार्मिक क्षेत्र में पड़ा। ऐसा इसलिए था क्योंकि भारत में अधिकांश विचार, आदर्श और संस्थाएँ कमोवेश धर्म से जुड़ी थी। इसका परिणाम ब्रह्मसमाज और प्रार्थना समाज जैसे नए सुधारवादी संप्रदायों का उदय था।

गाँधी जी धार्मिक वातावरण में पले बढ़े थे। गाँधी जी खुद को एक रूढ़िवादी हिन्दु कहते थे, लेकिन उन्होंने अस्पृश्यता की खतरनाक और क्रूर व्यवस्था की कमी वकालत नही की वह भारत में प्रचलित जाति व्यवस्था में विश्वास नहीं करते थे। इस बारे में वे कहते है- "ईश्वर ने मनुष्यों को श्रेष्ठता या हीनता के तमगे के साथ नहीं बनाया, कोई भी धर्मातंय जो किसी इंसान को उसके जन्म के कारण हीन या अछूत करार देता हो, वह हमारी निष्ठा का आदेश नहीं दे सकता, यह ईश्वर और सत्य, जो कि ईश्वर है, का इन्कार है।

" गाँधी जी ईश्वर में विश्वास करते थे लेकिन उनके लिए ईश्वर नैतिक नियम, धर्म था। उनका कहना है कि "सत्य ही ईश्वर है।" "मेरे लिए ईश्वर सत्य और प्रेम है, ईश्वर नैतिकता और सदाचार है, ईश्वर अभय है, ईश्वर प्रकाश और जीवन का स्रोत है और फिर भी वह इन सभी से ऊपर और परे है।"

  • गाँधी जी ने इंडियन ओपिनियम, नवजीवन, हरिजन तथा यंग इंडिया जैसे पत्र भी निकाले।

49. निम्न में से कौन अज्ञेय द्वारा रचित कहानी नहीं हैं:

Correct Answer: (b) नदी के द्वीप
Solution:नदी के द्वीप (1951 ई.) अज्ञेय द्वारा रचित कहानी नहीं है बल्कि उनके द्वारा रचित उपन्यास विधा की रचना है। इनके द्वारा रचित अन्य उपन्यास 'शेखर एक जीवनी (दो भाग) 1940, 1944 ई. तथा अपने-अपने अजनबी (1961 ई.) हैं। अज्ञेय द्वारा रचित कहानी संग्रह निम्नलिखित है- विपथगा (1937 ई.) परम्परा (1940 ई.), कोठरी की बात (1945 ई.) शरणार्थी (1948 ई.), जयदोल (1951 ई.), ये तेरे प्रतिरूप (1961 ई.) अमर वल्लरी (1945 ई.)

50. 'राजनीति ही मनुष्यों के लिए सब कुछ नहीं है। राजनीति के पीछे नीति से भी हाथ न धो बैठे, जिसका विश्व मानव के साथ व्यापक सम्बंध है। राजनीति की साधारण छलनाओं से सफलता प्राप्त करके क्षणभर के लिए तुम अपने को चतुर समझने की भूल कर सकते हो। " धुवस्वामिनी नाटक का उक्त संवाद किसके द्वारा कहा गया।

Correct Answer: (d) मिहिरदेव
Solution:"राजनीति ही मनुष्यों के लिए सब कुछ नहीं है। राजनीति के पीछे नीति से भी हाथ न धो बैठो, जिसका विश्व-मानव के साथ व्यापक सम्बंध है। राजनीति की साधारण छलनाओं से सफलता प्राप्त करके क्षणभर के लिए तुम अपने को चतुर समझने की भूल कर सकते हो ।” जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित 'ध्रुवस्वामिनी' नाटक का यह संवाद मिहिरदेव के द्वारा कहा गया है। ध्रुवस्वामिनी नाटक के अन्य पात्रों का कथन निम्नलिखित है- मंदाकिनी का कथन "भगवान ने त्रियों को उत्पन्न करके ही अधिकारों से वंचित नहीं किया है किन्तु तुम लोगों की दस्युवृत्ति ने उन्हें लूटा है।"
* कोमा का कथन "प्रेम का नाम न लो। वह एक पीड़ा थी जो छूट गई"।
* ध्रुवस्वामिनी का कथन " मैं केवल यही कहना चाहती हूँ कि पुरुषों ने स्त्रियों को अपनी पशु-संपत्ति समझकर उनपर अत्याचार करने का जो अभ्यास बना लिया है, वह मेरे साथ नहीं चल सकता।"