Solution:"ईश्वर को पाने का एकमात्र उपाय यह है कि उसे उसकी सृष्टि में देखा जाय और इस सृष्टि से एकात्म्य स्थापित किया जाय।" यह कथन महात्मा गाँधी का है।भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना के कारण मौजूदा विचारों, आदर्शों और संस्थाओं की समीक्षा हुई। इस सम्पर्क का पहला प्रभाव स्वाभाविक रूप से धार्मिक क्षेत्र में पड़ा। ऐसा इसलिए था क्योंकि भारत में अधिकांश विचार, आदर्श और संस्थाएँ कमोवेश धर्म से जुड़ी थी। इसका परिणाम ब्रह्मसमाज और प्रार्थना समाज जैसे नए सुधारवादी संप्रदायों का उदय था।
गाँधी जी धार्मिक वातावरण में पले बढ़े थे। गाँधी जी खुद को एक रूढ़िवादी हिन्दु कहते थे, लेकिन उन्होंने अस्पृश्यता की खतरनाक और क्रूर व्यवस्था की कमी वकालत नही की वह भारत में प्रचलित जाति व्यवस्था में विश्वास नहीं करते थे। इस बारे में वे कहते है- "ईश्वर ने मनुष्यों को श्रेष्ठता या हीनता के तमगे के साथ नहीं बनाया, कोई भी धर्मातंय जो किसी इंसान को उसके जन्म के कारण हीन या अछूत करार देता हो, वह हमारी निष्ठा का आदेश नहीं दे सकता, यह ईश्वर और सत्य, जो कि ईश्वर है, का इन्कार है।
" गाँधी जी ईश्वर में विश्वास करते थे लेकिन उनके लिए ईश्वर नैतिक नियम, धर्म था। उनका कहना है कि "सत्य ही ईश्वर है।" "मेरे लिए ईश्वर सत्य और प्रेम है, ईश्वर नैतिकता और सदाचार है, ईश्वर अभय है, ईश्वर प्रकाश और जीवन का स्रोत है और फिर भी वह इन सभी से ऊपर और परे है।"
- गाँधी जी ने इंडियन ओपिनियम, नवजीवन, हरिजन तथा यंग इंडिया जैसे पत्र भी निकाले।