NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

51. "साधारणीकरण न तो आश्रय (राम) का होता है न आलम्बन (सीता) का होता है अपितु यह कवि अनुभूति का होता है।" साधारणीकरण के सम्बंध में यह कथन निम्नलिखित में से किसका है?

Correct Answer: (c) डॉ.नगेन्द्र
Solution:"साधारणीकरण न तो आश्रय (राम) का होता है न आलम्बन (सीता) का होता है अपितु यह कवि अनुभूति का होता है।” साधारणीकरण के सम्बन्ध में यह कथन 'डॉ नगेन्द्र' का है।
* आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार “साधारणीकरण आलंबनत्व धर्म का होता है वे सहृदय का आश्रय से तादात्म्य स्वीकार करते हैं। और आलम्बन का साधारणीकरण।
* नंददुलारे वाजपेयी ने कवि तथा सहृदय के बीच भावना के तादात्म्य को ही साधारणीकरण माना है।

52. 'चीफ की दावत' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

A. व्यक्ति को वस्तु के रूप में देखने वाली मानसिकता का प्रतिकार करती है।
B. बॉस के प्रति हार्दिक सम्मान व्यक्त होता है।
C. मध्यवर्गीय शहरी मानसिकता के खोखलेपन को उजागर करती है।
D. माता के प्रति प्रेम और सम्मान भाव को प्रकट करती है।
E. निम्नमध्यवर्गीय परिवारों की संस्कृति का प्रभावी चित्रण करती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल A, C और E
Solution:'चीफ की दावत' भीष्म साहनी द्वारा रचित कहानी है। इसका प्रकाशन वर्ष 1956 ई. है। इस कहानी में स्वार्थी बेटे शामनाथ को अपनी विधवा बूढ़ी माँ का बलिदान ही फर्ज नजर आता है। भीष्म साहनी ने शामनाथ के माध्यम से शिक्षित युवा पीढ़ी पर करारा व्यंग्य किया है। आज के शिक्षित युवा अपने माता पिता को बोझ समझते हैं। चीफ की दावत के संबंध में दिए गये कथनों में व्यक्ति को वस्तु के रूप में देखने वाली मानसिकता का प्रतिकार करती है, मध्यवर्गीय शहरी मानसिकता का प्रतिकार करती है, और निम्नवर्गीय परिवारों की संस्कृति का प्रभावी चित्रण करती है कथन संगत है। प्रश्नगत अन्य सभी कथन असंगत है।

53. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए

सूची-I (लेखक)सूची-II (पुस्तक)
A. किशोरीदास वाजपेयीI. भाषा प्रभाकर
B. अम्बिका प्रसाद वाजपेयीII. हिन्दी शब्दानुशासन
C. ठाकुर राम चरण सिंहIII. भाषा तत्व प्रकाश
D. विश्वेश्वर दत्त शर्माIV. हिन्दी कौमुदी

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) A-II, B-IV, C-I, D-III
Solution:सूची-I का सूची-II की उचित मिलान निम्नलिखित है।
सूची-I (लेखक)सूची-II (पुस्तक)
A. किशोरीदास वाजपेयीII. हिन्दी शब्दानुशासन
B. अम्बिका प्रसाद वाजपेयीIV. हिन्दी कौमुदी
C. ठाकुर राम चरण सिंहI. भाषा प्रभाकर
D. विश्वेश्वर दत्त शर्माIII. भाषा तत्व प्रकाश

54. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए

सूची-I (काव्यचिंतक)सूची-II (समय)
A. जयदेवI. 12 वीं शदी
B. विश्वनाथII. 10 वीं शदी
C. धनंजयIII. 14 वीं शदी
D. हेमचन्द्रIV. 13 वीं शदी

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) A-IV, B-III, C-II, D-I
Solution:सूची-I का सूची-II का संगत मिलान निम्नलिखित है-
सूची-I (काव्यचिंतक)सूची-II (समय)
A. जयदेवIV. 13 वीं शदी
B. विश्वनाथIII. 14 वीं शदी
C. धनंजयII. 10 वीं शदी
D. हेमचन्द्रI. 12 वीं शदी

55. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित हैं तो दूसरा उसके कारण कारण के रूप में :

अभिकथन A: मैला आंचल उपन्यास में आंचलिक कथा भाषा का उपयोग किया गया है।
कारण R : आंचलिक उपन्यास अंचल विशेष के परिदृश्य को व्यक्त करने वाली औपन्यासिक विधा नहीं है। उपरोक्त कथन के अलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) A सत्य हैं लेकिन R असत्य है।
Solution:दिए गए कथन एवं कारण के रूप में सबसे उपयुक्त विकल्प निम्नलिखित है-
कथन A: 'मैला आंचल' उपन्यास में आंचलिक कथा भाषा का उपयोग किया गया है।
कारण R : आंचलिक उपन्यास अंचल विशेष के परिदृश्य को व्यक्त करने वाली औपन्यासिक विधा नहीं है। उपर्युक्त कथन एवं कारण के आधार पर कहा जा सकता है कि कथन (A) सत्य है तथा कारण (R) गलत है।
* फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित 'मैला आँचल' उपन्यास में पूर्णिया जिले के 'मेरीगंज गाँव' का विस्तृत तथा समग्र कथा इस प्रकार कही गई है कि अंचल ही नायक बन गया है।
*  'मैला आँचल' में अंचल की सुन्दरता एवं कुरूपता दोनों का गहरा चित्रण किया गया है। जातिवाद, अफसरशाही, अवसरवादी राजनीति, मठो और आश्रमों का पाखण्ड भी इसमें दिखाया गया है।
* 'मैला आँचल' की भाषा शिल्प उपन्यास की बहुत बड़ी शक्ति है, हालांकि 'मैला आँचल' की आंचलिकता का स्वरूप केवल इसकी भाषा के कारण नहीं है।
* 'मैला आँचल' में आंचलिकता अपने बहुविध रूप में प्रस्तुत हुई है। उपन्यास में सृजित भाषा ने इस बहरंगी आँचलिकता को अत्यन्त सरस व सजीव बनाने में अवश्य ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
* आँचलिक उपन्यास एक सीमित अंचल या क्षेत्र विशेष के सर्वागीण जीवन को जिसमें वहाँ के साधारण असाधारण विवरण तथा विविध छवियों का अंकन हुआ है। वस्तुमुखी दृष्टि से रूपायित करता है तथा इसमें रचनाशीलता का नया आग्रह एवं लोक धर्मी भाषा, बोलियो उपबोलियों की भी विविध भंगिमाएँ निहित होती है।

56. 'शाक्तिशाली हो, विजयी बनो- यह आह्वान 'कामायनी' के किस सर्ग में मिलता है?

पात्रप्रतीक
मनुमन
श्रद्धाहृदय
इड़ाबुद्धि
कुमारमानव
Correct Answer: (a) श्रद्धा
Solution:'शाक्तिशाली हो, विजयी बनो- यह आह्वान जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य 'कामायनी' के तीसरे सर्ग 'श्रद्धा' में मिलता है।
* जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित 'कामायनी' महाकाव्य में 15 सर्ग हैं-
1. चिन्ता 2. आशा 3. श्रद्धा 4. काम 5. वासना 6. लज्जा 7. कर्म 8. ईर्ष्या 9. इड़ा 10. स्वप्न 11. संघर्ष 12. निर्वेद 13. दर्शन 14. रहस्य 15. आनन्द
* 'कामायनी' के मुख्य पात्र मनु, श्रद्धा, इड़ा, कुमार हैं।
आचार्य शांतिप्रिय द्विवेदी ने 'कामायनी' को 'छायावाद का उपनिषद' कहा है।

57. 'सान्ध्यगीत' में संकलित महादेवी वर्मा की कविताएँ नहीं हैं-

A. बीन भी हूँ मै तम्हारी रागिनी भी हूँ
B. मै नीर भरी दुख की बदली
C. फिर विकल हैं प्राण मेरे
D. मधुर -मधुर मेरे दीपक जल
E. निश्वासों का नीड़
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A, D, E
Solution:महादेवी वर्मा द्वारा रचित 'सांध्यगीत' काव्यकृति में जो कविताये संकलित नहीं है, वो निम्नलिखित हैं-
(A) बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ ('नीरजा' में संकलित है)
(D) मधुर-मधुर मेरे दीपक जल (नीरजा में संकलित है)
(E) निश्वासों का नीड़ ('नीहार' काव्य संग्रह में 'संसार' शीर्षक में उक्त पंक्तियों संगृहित है।)
* 'सांध्यगीत' में संकलित कविताएँ मैं नीरभरी दुख की बदली, फिर विकल हैं प्राण मेरे, प्रिय मेरे गीले नयन बनेंगे आरती, रागभीनी तू सजनि निश्वास, क्यों वह प्रिय आता पर नहीं, जाने किस जीवन की सुधि ले, शून्य मंदिर में बनूँगी, रे पपीहा पी कहाँ, विरह की घड़िया हुई अलि आदि हैं।
* महादेवी वर्मा की प्रमुख काव्यकृतियाँ निम्नलिखित है- नीहार (1930 ई.), रश्मि (1932 ई.), नीरजा (1935 ई.), सांध्यगीत (1936 ई.), यामा (1940 ई.), दीपशिखा (1942 ई.), सप्तपर्णा (1960 ई.)
* महादेवी वर्मा कृत 'यामा' में उनके निहार, रश्मि, नीरजा और सांध्यगीत के महत्वपूर्ण गीतों का संकलन किया गया है। 'यामा' पर महादेवी वर्मा को 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार' प्राप्त हुआ।

58. 'हिन्दुई' को किसने 'हिन्दुस्तान की रोमांस की भाषा कहा है?

Correct Answer: (d) गर्मा द तासी
Solution:'हिन्दुई' को गार्सा द तासी ने 'हिन्दुस्तान की रोमांस की भाषा' कहा है।
* हिन्दी-साहित्य के इतिहास-लेखन का सबसे पहला प्रयास फ्रेंच विद्वान गार्सा द तासी ने किया। इन्होंने अपने इस पुस्तक की रचना फ्रेंच भाषा में की है। इनकी पुस्तक का नाम 'इस्तवार द ला लितरेत्युर ऐन्दुई ऐन्दुस्तानी' है। यह दो भागों में विभक्त है जिसका प्रकाशन क्रमशः 1839 ई. तथा 1847 ई. में हुआ।
* तासी के ग्रंथ में कुल 738 कवि हैं। जिनमें हिन्दी के 72 तथा शेष उर्दू के हैं।
* डॉ. लक्ष्मीसागर वाणेय ने तॉसी के ग्रंथ का हिन्दी-अनुवाद 'हिन्दुई साहित्य का इतिहास' (1952 ई.)के नाम से किया।
* जार्ज ग्रियर्सन द्वारा रचित 'द माडर्न वर्नाक्यूलर लिटरेचर आफ हिन्दुस्तान' को सुच्चे अर्थों में हिन्दी साहित्य का पहला इतिहास ग्रंथ माना जाता है। इसमें कुल 952 कवियों को शामिल किया गया है।
* मिश्र बन्धुओ ने 'मिश्रबन्धु विनोद' नामक इतिहास ग्रंथ की रचना की। 'मिश्र बन्धु विनोद' चार भागों में विभक्त है जिसके प्रथम तीन भाग का प्रकाशन सन् 1913 ई. में तथा चौथे भाग का प्रकाशन 1934 ई. में हुआ। इसमें 4591 (लगभग 5000) कवियों का जीवनकृत वर्णित है।
* श्यामसुंदर दास ने हिन्दी भाषा का विकास (1924) नामक इतिहास ग्रंथ की रचना की।

59. 'त्रासदी' के संबंध में अरस्तू के काव्य-चिंतन के प्रमुख बिन्द हैं-

A. त्रासदी कार्य गंभीर स्वतः पूर्ण और निश्चित आयाम से युक्त होता है।
B. त्रासदी कार्य की अनुकृति है।
C. त्रासदी न तो कार्य व्यापार का वर्णन है और नही प्रस्तुति है।
D. त्रासदी के चार अनिवार्य अंग- कथानक, चरित्र, पदावली और गीत हैं।
E. करूणा के द्वारा मनोविकारों का उचित विरेचन त्रासदी का कार्य होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, Bऔर E
Solution:त्रासदी के सम्बन्ध में अरस्तू के काव्य-चिन्तन के प्रमुख बिन्दु-
* त्रासदी कार्य गम्भीर स्वतःपूर्ण और निश्चित आयाम से युक्त होता है।
* त्रासदी कार्य की अनुकृति है।
* करुणा के द्वारा मनोविकारों का उचित विरेचन त्रासदी का कार्य होता है।
'त्रासदी' अंग्रेजी के 'ट्रेजडी' शब्द का हिन्दी रूपान्तरण है। जिसका अर्थ 'दुखान्तक या दुःखपूर्ण रचना' । अरस्तू ने त्रासदी के छः अंग माने हैं- (1) कथानक (2) चरित्र (3) पदावली (4) विचार तत्व (5) संगीत और (6) दृश्य विधान ।
त्रासदी का आरम्भ मदिरा व उल्लास के देवता 'दिओनिसिअस' के सम्मान में होने वाले समारोह से माना जाता है। अरस्तू के ग्रन्थों की संख्या चार सौ बतायी जाती है, जिनमें-
'पेरिपोइएतिकेस' (काव्य शास्त्र) काव्य के मौलिक सिद्धान्तों का विवेचन।
'तेखनेस रितोरिकेस' (भाषा शास्त्र) भाषण, भाषा एवं भावों का वर्णन ।
'वसीयत नामा' को इतिहास में दास प्रथा से मुक्ति का प्रथम घोषणा- पत्र माना जाता है। अरस्तू के प्रमुख काव्य सिद्धान्त है (1) अनुकरण सिद्धान्त (2) विरेचन का सिद्धान्त और (3) त्रासदी का सिद्धान्त । पहली बार कला और ललित कला के भेद को स्पष्ट करने का श्रेय अरस्तू को ही जाता है। इन्होंने ललित कला को एक स्वायत्त कला के रूप में घोषित किया।

60. मैथिलीशरण गुप्त के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

A. मैथिलीशरण गुप्त की कविता महावीर प्रसाद द्विवेदी के आदर्शों और मान्यताओं की फलश्रुति थीं।
B. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म बांदा में हुआ।
C. मैथिलीशरण गुप्त की पहली कविता 1905 में 'सरस्वती' में प्रकाशित हुई
D. मैथिलीशरण गुप्त के परिवार में शैव भक्ति की परंपरा थी।
E. मैथिलीशरण गुप्त का काव्य मर्यादा और संयम की डोर से बंधा हुआ है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल A, C, E
Solution:मैथिलीशरण गुप्त के सम्बन्ध में सबसे उपयुक्त कथन हैं-
* मैथिलीशरण गुप्त की कविता महावीर प्रसाद द्विवेदी के आदर्शों और मान्यताओं की फलीश्रुति थी।
* मैथिलीशरण गुप्त ही पहली कविता 1905 ई.में 'सरस्वती' में प्रकाशित हुई।
* मैथिलीशरण गुप्त का काव्य मर्यादा और संयम की डोर से बंधा हुआ है। मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म 1886 ई. में चिरगाँव झाँसी में हुआ था। गुप्त जी की प्रथम कविता 'हेमन्त' (1905 ई.) और प्रथम काव्य संग्रह रंग में भंग' (1909 ई.) है। गुप्त जी के प्रमुख काव्य ग्रन्थ निम्न हैं-जयद्रथ वध (1910 ई.), किसान (1917 ई.), विकट भट (1929 ई.), गुरुकुल (1929 ई.), साकेत (1931 ई.), भारत भारती (1912 ई.), झंकार (1929 ई.), यशोधरा (1932 इ.), द्वापर (1936 ई.), जय भारत (1952 ई.) विष्णु प्रिया (1957 ई.), सिद्धराज (1936 ई.), हिन्दू (1927 ई.), वैतालिक, पंचवटी (1925 ई.0)। गुप्त जी 'रसिकेन्द्र' उपनाम से ब्रजभाषा की कविताएँ लिखी और 'मधुप' उपनाम से बांग्ला रचनाओं का अनुवाद किया। मैथिलीशरण गुप्त ने गुप्त ने स्वयं को 'कौटुम्बिक कविमात्र' कहा है। आचार्य शुक्ल ने गुप्त जी को 'सा जस्यवादी कवि और महात्मा गाँधी ने गुप्त जी को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी थी। 'भारत भारती' वे सम्बन्ध में-
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल "पहले पहल हिन्दी प्रेमियों का सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली पुस्तक भी यही है। इसकी लोकप्रियता का आलम यह रहा है कि इसकी प्रतियाँ रातोंरात खरीदी गई।", बच्चन सिंह "हिन्दी भाषा भाषी क्षेत्र में इतने व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना जगाने का जो काम अकेले 'भारत-भारती' ने किया, उतना अन्य पुस्तकों ने मिलकर भी नहीं किया।"