Correct Answer: (c) नाखून क्यों बढ़ते हैं
Solution:'मनुष्य के अन्दर पशुता बार-बार प्रकट होती है और वह बार-बार उसे नष्ट करने की कोशिश करता है। उक्त भाव हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' से है।
हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रमुख निबन्ध संग्रह और निबन्ध निम्न हैं-
निबंध संग्रह - अशोक के फूल (1948 ई.), कल्पलता (1951 ई.), मध्यकालीन धर्म साधना (1952 ई.), विचार और वितर्क (1957 ई.), विचार प्रवाह (1959 ई.), कुटज (1964 ई.), साहित्य सहचर (1965 ई.), आलोक पर्व (1972 ई.)
निबन्ध- वसन्त आ गया, मेरी जन्मभूमि, एक कुत्ता और एक मैना, नया वर्ष, देवदारू, नाखून क्यों बढ़ते हैं, घर जोड़ने की माया, गुरुनानक देव । हजारी प्रसाद द्विवेजी जी ने निबन्ध को 'व्यक्ति की स्वाधीन चिन्ता की उपज' कहा है।