NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

61. ब्रिटिश काल में प्रेस पर सेंसरशिप सर्वप्रथम कब लगाई गई?

Correct Answer: (b) 1799 ई.
Solution:

ब्रिटिशकाल में प्रेस पर' सेंसरशिप 1799 ई. में लगाई गई। लार्ड वेलेजली ने प्रेस नियन्त्रण अधिनियम द्वारा सभी समाचार पत्रों पर नियन्त्रण (सेंसर) लगा दिया। तत्पश्चात सन् 1818 ई.में इसी प्री-सेंसरशिप को समाप्त कर दिया गया। पहला प्रिटिंग प्रेस वर्ष 1556 ई. में पुर्तगालियों द्वारा स्थापित किया गया था। भारत में पहले समाचार पत्र की स्थापना वर्ष 1780 में जेम्स ऑगस्टस हिकी ने की थी, इस समाचार पत्र का नाम कलकता जनरल एडवाइजर अथवा द बंगाल गैजेट था। उन्हें भारतीय प्रेस का जनक माना जाता है। चार्ल्स मेटकाफ को भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता कहा जाता है। इन्होंने जॉन एडम्स द्वारा प्रस्तावित 1823 के नियमों को निरस्त कर दिया था।

समाचार पत्र का नामसंस्थापक
द हिन्दू राघवजी.एस. अय्यर और वीरा आचारियर
केसरी मराठाबालगंगाधर तिलक
स्वदेश मित्रमजी.एस. अय्यर
न्यू इण्डिया (साप्ताहिक)विपिन चन्द्र पाल
न्यू इण्डिया (प्रतिदिन) कॉमनवीलएनी बेसेन्ट
यंग इण्डिया
नव जीवनमहात्मा गाँधी
हरिजनमहात्मा गाँधी
मूकनायकवी.आर. अम्बेडकर

62. काव्य सृजन की प्रक्रिया के संबंध में प्लेटो का विचार है-

A. कवि कर्म दैविक शक्तियों से प्रेरित और अभिभूत है।
B. काव्य सृजन की प्रक्रिया एक सुचिंतित कलात्मक प्रयास है।
C. अलौकिक शक्ति द्वारा अधिकृत कवि स्त्रष्टा नहीं उसका प्रवक्ता मात्र होता है।
D. दैविक अनुकंपा के बिना कोई कवि नहीं हो सकता।
E. कविता मनुष्य के भावों को उद्दीप्त नहीं करती।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल A, C, D
Solution:काव्य सृजन की प्रक्रिया में प्लेटों के विचार से सम्बन्धित उपयुक्त मत निम्न हैं-
कवि कर्म दैविक शक्तियों से प्रेरित और अभिभूत है।
* अलौकिक शक्ति द्वारा अधिकृत कवि स्रष्टा नहीं उसका प्रवक्ता मात्र होता है।
* दैविक अनुकम्पा के बिना कोई कवि नहीं हो सकता है।
प्लेटो प्रत्ययवादी या आत्मवादी दार्शनिक था। इसके दर्शन के मुख्य विषय निम्नलिखित हैं (1) प्रत्यय सिद्धान्त (2) आदर्श राज्य (3) आत्मा की अमरत्व सिद्धि (4) सृष्टि-शास्त्र और (5) ज्ञान-मीमांसा । प्लेटो के प्रत्यय सिद्धान्त के अनुसार प्रत्यय या विचार ही परम सत्य है, वह शाश्वत और अखण्ड है तथा ईश्वर उसका स्रष्टा है। यह वस्तु जगत प्रत्यय का अनुकरण है तथा कला जगत वस्तु जगत का अनुकरण है। इस प्रकार कला जगत अनुकरण का अनुकरण होने से सत्य से तीन गुना दूर है।
प्लेटो के प्रमुख ग्रन्थ निम्न हैं - रिपब्लिक, इयोन, सिम्पोजियम, एपोलॉजी, क्रिटियस, लॉज, गोर्गिआस, क्लाइसिस लेप्टों-"गुलामी मृत्यु से भी भयावह है।" उनका मानना है-"विवेकहीन अपरिपक्व मन पर दुष्प्रभाव डालने वाले साहित्य पूर्णतः निषेध होना चाहिये, चाहे वह सत्य ही क्यों न हो।

63. मनोविश्लेषण संबंधी चिंतक अल्फ्रेड एडलर का समय कौन सा है?

Correct Answer: (d) 1870-1937 ई.
Solution:मनोविश्लेषण, सम्बन्धी अल्फ्रेड एडलर का समय 1870-1937 ई. है। एडलर ने मनोविज्ञान में 'लिविडो' अथवा कामवृत्ति से अधिक महत्व 'अहम्' को दिया। मनोविश्लेषण शब्द अंग्रेजी के 'साइको-एनैलिसिस' का हिन्दी पर्याय है मनोविश्लेषण मानव-मन के विश्लेषण की पद्धति पर आधारित है। इसके जन्मदाता सिग्मन फ्रायड हैं।

सिग्मन फ्रायड (1856-1939 ई.) अचेतन सम्बन्धी धारणा-फ्रायड के अनुसार मानव मस्तिष्क तीन भागों में विभक्त है- चेतन (Conscious), अचेतन (Unconscious), पूर्व-चेतन (Preconscious)। इसमें चेतन की अपेक्षा अचेतन अधिक प्रबल है। तीन स्तर वाले मानस तन्त्र को फ्रायड ने पुनः तीन भागों में विभाजित किया। इदम् (ID), अहम् (1go), अति अहम् (super Ego)। इसमें इदम् एक प्रकार की ऊर्जा है। यह अतृप्त वासनाओं का अन्धकारमय कोष है ! अहम् चेतन मन है, जो सामाजिक मूल्यों के प्रति सचेष्ट होता है। 'अति अहम् जिसका काम आलोचना और अधीक्षण करना है।
जुंग (युंग) (1875-1961) ने 'लिबिडो' शब्द का अधिक विस्तृत अर्थ लिया जिसमें फ्रायड की 'कामवृत्ति' और एडलर की  'आत्मस्थापन प्रवृत्ति' दोनों ही समन्वित हैं। वह इसे जीवन की वह प्रारम्भिक और सामान्य प्रेरक शक्ति मानते हैं, जो मानव के सभी व्यवहारों में व्यक्त होती हैं। मनोविश्लेषण का सिद्धान्त बीसवीं शती का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्धान्त है जिसने साहित्य और कला की दुनिया पर भी व्यापक प्रभाव डाला। कला के क्षेत्र में दादावाद (डाडावाद), अति यथार्थवाद जैसे आन्दोलनों को मनोविश्लेषणवाद से प्रेरणा मिली।

64. जन्म काल के अनुसार रचनाकारों को पहले से बाद के क्रम में लगाइएः

A. उदय शंकर भट्ट
B.रामधारी सिंह दिनकर
C. सियाराम शरण गुप्त
D. श्यामनारायण पाण्डेय
E.सोहनलाल द्विवेदी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) C, A, E, D, B
Solution:जन्मकाल के अनुसार रचनाकारों का पहले के बाद का क्रम- इस प्रकार है -
रचनाकारजन्मकाल
सियाराम शरण गुप्त(1895-1963 ई.)
उदयशंकर भट्ट(1898-1966 ई.)
सोहनलाल द्विवेदी(1906-1988 ई.)
श्यामनारायण पाण्डेय(1907-1991 ई.)
रामधारी सिंह दिनकर(1908-1974 ई.)

65. 'मनुष्य के अंदर पशुता बार-बार प्रकट होती है और वह बार-बार उसे नष्ट करने की कोशिश करता है' निम्न में से किस निबंध में यह भाव प्रकट किया गया है?

Correct Answer: (c) नाखून क्यों बढ़ते हैं
Solution:'मनुष्य के अन्दर पशुता बार-बार प्रकट होती है और वह बार-बार उसे नष्ट करने की कोशिश करता है। उक्त भाव हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' से है।
हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रमुख निबन्ध संग्रह और निबन्ध निम्न हैं-
निबंध संग्रह - अशोक के फूल (1948 ई.), कल्पलता (1951 ई.), मध्यकालीन धर्म साधना (1952 ई.), विचार और वितर्क (1957 ई.), विचार प्रवाह (1959 ई.), कुटज (1964 ई.), साहित्य सहचर (1965 ई.), आलोक पर्व (1972 ई.)
निबन्ध- वसन्त आ गया, मेरी जन्मभूमि, एक कुत्ता और एक मैना, नया वर्ष, देवदारू, नाखून क्यों बढ़ते हैं, घर जोड़ने की माया, गुरुनानक देव । हजारी प्रसाद द्विवेजी जी ने निबन्ध को 'व्यक्ति की स्वाधीन चिन्ता की उपज' कहा है।

66. 'भारत दुर्दशा नाटक के संबंध में निम्नलिखित कथन पर विचार करें: '

A. इसमें मनोभावों का मानवीकरण किया गया है।
B. इसमें कुल छह अंक हैं।
C. इसमें ब्रिटिश राज की निर्ममता एवं शोषण का चित्रण है।
D. संवाद कथ्य को गति देने में सहायक नहीं है।
E. इसका प्रकाशन 1881 ई.में हुआ।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल A, B, C
Solution:भारत-दुर्दशा नाटक के सम्बन्ध में उक्त कथन में कहा जा सकता है कि इसमें मनोभावों का मानवीकरण किया गया है। इसमें कुल छह अंक है। इसमें ब्रिटिश राज की निर्ममता एवं शोषण का चित्रण है। उक्त कथन सही है।
भारत-दुर्दशा नाटक भारतेन्दु का नाटक है। 'भारतेन्दु' का उदय हिन्दी-साहित्य के लिए नवजागरण एवं गतिमयता का प्रेरक सिद्ध हुआ। 'भारतेन्दु' हिन्दी-नवजागरण के अग्रदूत हैं।
भारतेन्दु की प्रतिभा का पूर्ण विकास नाटकों में देखा जा सकता है। इन नाटकों को तीन वर्गों में रखकर देखा जा सकता है-अनूदित, मौलिक और अपूर्ण।
अनूदितमौलिक नाटक
1. विद्या सुन्दर (1868 ई.)1. वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873 ई.)
2. पाखंड विडम्बन (1872 ई.)2. प्रेम जोगिनी (1975 ई.)
3. धनंजय विजय (1873 ई.)3. चन्द्रावली (1876 ई.)
4. कर्पूर-मंजरी (1875 ई.)4. विषस्य विषमौषधम् (1876 ई.)
5. मुद्राराक्षस (1878 ई.)5. दुर्लभबन्धु (1880 ई.)
6. भारत-दुर्दशा (1880 ई.)6. भारत-जननी (1877 ई.)
7. नीलदेवी (1881 ई.)7. अंधेरनगरी (1881 ई.)

67. "लोकलाज कुल श्रृंखला तजि मीराँ गिरिधर भजी, सदृश गोपिका प्रेम प्रगट कलजुगहिं दिखायौ " मीराँबाई विषयक छप्पय की उक्त पंक्तियाँ कहाँ से उद्धृत हैं?

Correct Answer: (d) भक्तमाल
Solution:"लोकलाज कुल श्रृंखला तजि मीरा गिरिधर अली, सदृश गोपिका प्रेम प्रगट कलजुगहिं दिखायौ” मीराबाई विषयक छप्पय की उक्ति पंक्तियाँ 'भक्तमाल' से ली गई है। भक्तमाल रचना नाभादास की है।
नाभादास अग्रदासजी के शिष्य थे। इनका प्रसिद्ध ग्रंथ भक्तमाल संवत् 1642 के पीछे बना और संवत् 1769 में प्रियादास जी ने उसकी टीका लिखी। इस ग्रन्थ में 200 भक्तों के चमत्कार पूर्ण चरित्र 316 छप्पयों में लिखे गए हैं। इन चरित्रों में पूर्ण जीवन वृत्त नहीं है, केवल भक्ति की महिमासूचक बाते लिख गए हैं।
• नाभादास जी का प्रसिद्ध छप्पय है-
"त्रेता काव्य निबंध करी सत कोटि रमायन ।
कलि कुटिल जीव निस्तारहित बालमीकि तुलसी भयो ।।"
रचनारचनाकार
1. चौरासी वैष्णवन की वार्ता- गोकुल नाथ
2. कविमाला- तुलसीराम
3. राग कल्पद्रुम- कृष्णानंद व्यास।

68. भारतेंदु हरिश्चन्द्र के संबंध में सत्य कथन है:

A. उन्होंने हिन्दी साहित्य में राष्ट्रीय एवं जनवादी तत्वों को प्रतिष्ठित किया।
B. उन्होंने पत्रिकाओं में आधुनिक कहानी का प्रकाशन आरंभ किया।
C. भारतेन्दु ने प्रचलित खड़ी बोली को साहित्यिक रूप दिया।
D. भारतेंदु ने हिन्दी लेखकों के मंडल को प्रोत्साहित किया।
E. उन्होंनें खड़ी बोली में काव्य लेखन किया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल A, C, D
Solution:भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के संबंध में सत्य कथन निम्न हैं- (1) उन्होंने हिन्दी साहित्य में राष्ट्रीय एवं जनवादी तत्त्वों को प्रतिष्ठित किया। (2) भारतेन्दु ने प्रचलित खड़ी बोली को साहित्यिक रूप दिया। (3) भारतेन्दु ने हिन्दी लेखकों के मंडल को प्रोत्साहित किया।
• उन्होंने पत्रिकाओं में आधुनिक कहानी का प्रकाशन आरम्भ नहीं किया।
• उन्होंने खड़ी बोली में गद्य लेखन किया।

69. 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' निबंध के पंक्तियों के सही अनुक्रम पर विचार कीजिए:

A. बचपन में दादी जाँते पर वह गीत गाती, मेरे घर से बाहर जाने पर, विदेश में रहने पर वे यही गीत विह्वल होकर गातीं।
B. अभी दो-तीन रात पहले मेरे एक साथी संगीत कार्यक्रम सुनने के लिए नौ बजे रात गए, साथ में जाने के लिए मेरे एक चिरंजीव ने ओर मेरी एक मेहमान, महानगरीय वातावरण में पली कन्या ने अनुमति माँगी।
C. और इतने में पूरब से हल्की उजास आती है और शहर के इस शोर-भरे बियाबान में चक्की के स्वर के साथ चढ़ती - उतरती जातसार गीति हल्की सी सिहरन पैदा कर जाती है।
D. कैसे मंगलमय प्रभात की कल्पना थी और कैसी कालरात्रि आ गई है? एक-दूसरे को देखने से डर लगता है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) B, A, D और C
Solution:'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' निबन्ध विद्यानिवास मिश्र का है। निबंध के पंक्ति का सही अनुक्रम निम्न है- (2) अभी दो-तीन रात पहले मेरे एक साथी संगीत कार्यक्रम सुनने के लिए नौ बजे रात गए, साथ में जाने के लिए मेरे एक चिरंजीव ने और मेरी एक मेहमान, महानगरीय वातावरण में पली कन्या ने अनुमति माँगी।
(1) बचपन में दादी जाँते पर वह गीत गाती, मेरे घर से बाहर जाने पर विदेश में रहने पर वे यही गीत विह्वल होकर गातीं।
(4) कैसे मंगलमय प्रभात की कल्पना थी और कैसी कालरात्रि आ गई है? एक-दूसरे को देखने से डर लगता है।
(3)और इतने में पूरब से हल्की उजास आती है और शहर के इस शोर-भरे बियाबान में चक्की के स्वर के साथ चढ़ती उतरती जातसार गीति हल्की सी सिहरन पैदा कर जाती है।

70. किस कहानी में माँगरोरी की व्यथा से सहानुभूति व्यक्त हुई है?

Correct Answer: (c) राही
Solution:हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान कृत 'राही' कहानी में माँगरोरी की व्यथा से सहानुभूति व्यक्त हुई है। राही' कहानी सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपने कारागार के अनुभवों के ऊपर लिखी है।
कहानी के पात्र -
राही एक गरीब औरत जिसे चोरी के जुर्म में कैद किया गया था। राही माँगरोरी जाति की थी। अनीता एक अमीर घर की महिला जो स्वतन्त्रता संग्राम में क्रान्तिकारी गतिविधियों के कारण जेल गयी थी।
सुभद्रा कुमारी चौहान की कृतियाँ - त्रिधारा, मुकुल (1981 ई.), बिखरे मोती (1932 ई), उन्मादिनी (1934 ई.), झाँसी की रानी, झण्डे की इज्जत में, स्वदेश के प्रति, जलियाँवाला बाग । जबकि 'दुनिया का अनमोल रतन प्रेमचन्द, की 'दुलाईवाली बंग महिला की और 'कानों में कंगना' राधिका रमण प्रसाद सिंह की कहानी है।