NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 (हिन्दी)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों (91-95) के उत्तर दीजिए :

भक्ति आन्दोलन पहले शहरों में बसनेवाले लोगों, खासकर छोटे- छोटे व्यापारियों, जुलाहों, टोकरी बनानेवालों और भिश्तियों जैसे लोगों के बीच से शुरू हुआ था। किन्तु सत्रहवीं शताब्दी तक वह किसानों में भी व्याप्त हो गया। इसने एक जन आन्दोलन का रूप धारण कर लिया और मुगल शासन तथा सामन्ती सरदारों के विरूद्ध कभी-कभी सशस्त्र विद्रोहों के रूप में भी प्रकट हुआ। सत्रवहीं शताब्दी में दिल्ली में सिक्खों का जो आन्दोलन चला और मथुरा में किसानों का जो सशस्त्र विद्रोह हुआ, उसमें कुछ सामान्य कड़ियां तथा प्रेरणा स्रोत थे। पंजाब में मुसलमान सामन्तों के खिलाफ किसानों के संघर्ष में भक्ति आन्दोलन ने सक्रिय भूमिका अदा की । महाराष्ट्र में एक वेगपूर्ण तूफान के रूप में शिवाजी के नेतृत्व में चलने वाले मुक्ति आन्दोलन में मराठी कवि तुकाराम की भूमिका कोई मामूली भूमिका नहीं थी। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इस आन्दोलन के नेता अपनी कवितायें और अपने गीत फारसी और संस्कृत जैसी दुरूह और क्लिष्ट भाषाओं में नही, वरन जनता की भाषाओं में रचते थे। इससे राष्ट्रीय इकाइयों तथा राष्ट्रीय भाषाओं के विकास को प्रोत्साहन मिला, जो भारतीय राष्ट्र के विकास की एक ऐतिहासिक प्रक्रिया थी।

भक्ति आन्दोलन ने देश के भिन्न-भिन्न भागों में, भिन्न-भिन्न मात्राओं में तीव्रता और वेग ग्रहण किया। यह आन्दोलन विभिन्न रूप में प्रकट हुआ। किन्तु कुछ मूलभूत सिद्धांत ऐसे थे जो समग्र रूप से पूरे आन्दोलन पर लागू होते थे पहले, धार्मिक विचारों के बावजूद जनता की एकता को स्वीकार करनाः दूसरे, ईश्वर के सामने सबकी समानता, तीसरे, जाति प्रथा का विरोध, चौथे, यह विश्वास कि मनुष्य और ईश्वर के बीच तादत्म्य प्रत्येक मनुष्य के सद्‌गुणों पर निर्भर करता है, न कि उसकी ऊंची जाति अथवा धन-सम्पत्ति पर पांचवें, इस विचार पर जोर कि भक्ति ही आराधना का उच्चतम स्वरूप है: और अन्न में, कर्मकाण्डों, मूर्ति पूजा, तीर्थाटनों और अपने को दी जानेवाली यंत्रणाओ की निन्दा। भक्ति आंदोलन मनुष्य की सत्ता को सर्वश्रेष्ठ मानता था और सभी वर्गगत एवं जातिगत भेदभावों तथा धर्म के नाम पर किये जाने वाले सामाजिक उत्पीड़न का विरोध करता था।
उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आंदोलन किसकी सत्ता को सर्वश्रेष्ठ मानता था?

Correct Answer: (d) मनुष्य की सत्ता को
Solution:अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आन्दोलन मनुष्य की सत्ता को सर्वश्रेष्ठ मानता था।

92. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आंदोलन का प्रारंभ हुआ:

Correct Answer: (d) शहरों में रहने वाले कामगारों शिल्पियों - छोटे व्यापारियों के बीच
Solution:

अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आन्दोलन का प्रारंभ शहरों में रहने वाले कामगारों, शिल्पियों तथा छोटे-छोटे व्यापारियों के बीच हुआ था। बाद में यह आन्दोलन किसानों के बीच भी पहुँच गया।

93. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आंदोलन के मूलभूत सिद्धांतों में शामिल नहीं हैं:

Correct Answer: (c) कर्मकांड ही आराधना का उच्चतम स्वरूप है।
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार कर्मकाण्ड ही आराधना का उच्चतम स्वरूप है यह भक्ति आन्दोलन के मूलभूत सिद्धांतो में शामिल नहीं है जबकि भक्तिकाल के प्रमुख मूलभूत सिद्धांत हैं- धार्मिक विचारों के बावजूद जनता की एकता को स्वीकार करना, ईश्वर के सामने सबकी समानता, जातिप्रथा का विरोध आदि।

94. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आंदोलन के नेता भाषा में अपनी कविताएँ और गीत रचते थे?

Correct Answer: (d) जनभाषा
Solution:अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आन्दोलन के नेता सामान्य जनमानस तक अपनी बात पहुँचाने के लिए अपनी कविताएँ और अपने गीत सामान्य जनमानस की भाषाओं में रचते थे।

95. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार निम्नलिखित में से किस स्थान के आंदोलन में कवि तुकाराम की भूमिका महत्वपूर्ण थी?

Correct Answer: (d) महाराष्ट्र
Solution:

अनुच्छेद के अनुसार महाराष्ट्र में शिवाजी के नेतृत्व में चलने वाले आन्दोलन में मराठी कवि तुकाराम की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। भक्तिआन्दोलन देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में रहने वालो के सहयोग से तीव्रता एवं वेग प्राप्त किया।

96. निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों (96-100) के उत्तर दीजिए :

हिंदी आज भी स्वयं अपने क्षेत्रों में विचार और चिंतन की भाषा नहीं बन सकी है। यह नहीं कि उसके ऐसा बनने में कोई आत्यंतिक असामर्थ्य है। सामर्थ्य का कोई अभाव नहीं है पर फिर भी तथ्य यह है। कि उसमें दर्शन, विज्ञान, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि का कोई मौलिक या तात्विक कार्य नहीं हुआ है। हम ऐसे किसी बड़े दार्शनिक, अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक का नाम नहीं ले सकते जिसका बुनियादी कार्य सीधे हिन्दी में हुआ और मान्य हुआ हो। दूसरे शब्दों में यह कि हिन्दी भाषा जैसी वह आज है न साहित्यप्रेमी है, न विचारप्रेमी । इसे शायद इस तथ्य से भी प्रमाणित माना जा सकता है कि फूहड़ और सतही का आकर्षण हिन्दी क्षेत्रों में कई गुना बढ़ा और फला फूला है।

अपनी भाषा के प्रति जैसा लगाव या ममत्व कई हिन्दीतर अंचलों में है उसकी तो जैसे कल्पना भी हमारे यहां करना असम्भव है। मराठी में लेखकों की एक प्रदेशव्यापी यात्रा ग्रन्थावली निकलती है और लाखों रूपयों की पुस्तकें सीधे पाठकों को बेचकर सम्पन्न होती है। हिन्दी समाज में सूक्ष्मता और जटिलता के प्रति एक तरह की हिंस्र और आक्रामक असहनशीलता बढ़ी है। उसका प्रभाव आलोचना पर भी पड़ा है। यहां विस्तार में जाना जरूरी नहीं है कि कैसे एक जटिलता-विरोधी नया शास्त्र विकसित किए जाने की गम्भीर चेष्टा हो रही है और कैसे हमारी कृतियों और लेखकों को सहजता सरलता की नयी सारिणियों में रखा जा रहा है और कैसे इस चेष्टा का अर्थ अंततः हिन्दी की अपनी जातीय परम्परा का अवमूल्यन है।

हिन्दी भाषी अंचल में राज बढ़ता जाता है, समाज घटता जाता है। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जो सदियों से राज के हस्तक्षेप से बाहर माने जाते थे। वे सब धीरे-धीरे राज के दायरे में आ गए: राज ने उन्हें समाज से लगभग छीन लिया है और हमने ऐसा होने को अपना मूक-मुखर समर्थन दिया है। सामाजिक कर्म और सार्वजनिक जीवन के इतने सारे क्षेत्र हैं जिसमें हिन्दी अंचलों में कोई स्वतः स्फूर्त आंदोलन या सामाजिक सक्रियता नहीं है जबकि उदाहरण के लिए महाराष्ट्र गुजरात या केरल में शिक्षा, पर्यावरण, संस्कृति आदि क्षेत्रों में समाज की उपस्थिति और क्रियाशीलता प्रमुख है न कि राज की। हिन्दी में तो साहित्यिक पुस्तकों का प्रकाशन पाठकों पर नहीं सरकारी खरीद पर भयावह रूप से निर्भर है कई बार तो यह दुःस्वप्न सताता है कि जल्दी ही हम हिन्दी के समाज में नहीं, हिन्दी के राज में रहने लगेंगे।
उपर्युक्त अनुच्छेद में हिंदी के अतिरिक्त किस भाषा के समाज का उल्लेख है?

Correct Answer: (a) मराठी
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद में मुख्यतः हिन्दी भाषा का चित्रण हुआ है। इसमें हिन्दी भाषा के अतिरिक्त मराठी भाषा का उल्लेख भी किया गया है।

97. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार किन राज्यों में शिक्षा और संस्कृति आदि क्षेत्रों में राज की तुलना में समाज की क्रियाशीलता प्रमुख है?

Correct Answer: (b) महाराष्ट्र, गुजरात, केरल
Solution:अनुच्छेद के अनुसार महराष्ट्र, गुजरात व केरल में शिक्षा और संस्कृति आदि क्षेत्रों में राज की तुलना में समाज की क्रियाशीलता प्रमुख है। इन राज्यों में शिक्षा, पर्यावरण, संस्कृति आदि क्षेत्रों में समाज की उपस्थिति और क्रियाशीलता प्रमुख है।

98. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी में किस विषय का मौलिक कार्य नहीं हुआ है?

Correct Answer: (b) अर्थशास्त्र
Solution:अनुच्छेद के अनुसार हिंदी में अर्थशास्त्र विषय का मौलिक कार्य नहीं हुआ है। दर्शन, विज्ञान मनोविज्ञान आदि का हिंदी में कोई मौलिक कार्य नहीं हुआ है।

99. उपर्युक्त अनुच्छेद में हिंदी और हिन्दी समाज के बारे में कौन सा कथन नहीं कहा गया है?

Correct Answer: (b) हिन्दी क्षेत्रों में फूहड़ और सतही के प्रति विकर्षण बढ़ा है।
Solution:

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी क्षेत्रों में फूहड़ और सतही के प्रति विकर्षण बढ़ा है कथन हिन्दी समाज के बारे में असंगत है जबकि हिन्दी भाषा आज न साहित्य प्रेमी है न विचार प्रेमी, हिन्दी समाज में सूक्ष्मता और जटिलता के प्रति आक्रामक असहनशीलता बढ़ी है तथा हिन्दी भाषी अंचल में राज बढ़ता जाता है, समाज घटता जाता है कथन हिन्दी भाषा और हिन्दी समाज के बारे में सही है।

100. उपर्युक्त अनुच्छेद में एक दुः स्वप्न का उल्लेख है। इस दुः स्वप्न के अनुसारः

Correct Answer: (c) जल्दी ही हम हिन्दी के समाज में नहीं हिंदी के राज में रहने लगेंगे।
Solution:

उपर्युक्त अनुच्छेद में एक दुःस्वप्न का उल्लेख है। इस दुःस्वप्न के अनुसार जल्दी ही हम हिंदी के समाज में नही हिन्दी के राज में रहने लगेगें। क्योंकि हिन्दी में साहित्यिक पुस्तकों का प्रकाशन पाठकों पर नहीं अपितु सरकारी खरीद पर निर्भर है।