NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 (हिन्दी)

Total Questions: 100

11. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I (कथन)सूची-II (कहानी)
A.कल तक जो खद्दर भी न पहनते थे, बात-बात पर कांग्रेस का मजाक उड़ाते थे, कांग्रेस के हाथों में थोड़ी शक्ति आते ही वे कांग्रेस भक्त बन गए।कोसी का घटवार
B.ऐसी ही खाने-पीनेवाले की तकदीर लेकर पैदा हुआ होता तो मेरे भाग क्यों पड़ता।परिंदे
C.किसी चीज को न जानना यदि गलत है, तो जानबूझकर न भूलपाना, हमेशा जोंक की तरह उससे चिपटे रहना, यह भी गलत है।कानों में कंगना
D.लोक अपने यहाँ अलौकिक बातें कब तक होने देगा! भव सागर की जल तरंगों पर थिर होना कब संभव है?राही

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) (A)-(IV), (B)-(I), (C)-(II), (D)-(III)
Solution:प्रश्नगत कथनों का उनकी कहानियाँ से सही सुमेल है-
कथनकहानी
A.कल तक जो खद्दर भी न पहनते थे, बात-बात पर कांग्रेस का मजाक उड़ाते थे, कांग्रेस के हाथों में थोड़ी शक्ति आते ही वे कांग्रेस भक्त बन गए। (अनीता आपने मन में सोचती है।)राही (सुभद्राकुमारी चौहान)
B.ऐसी ही खाने-पीनेवाले की तकदीर लेकर पैदा हुआ होता तो मेरे भाग क्यों पड़ता। (लछमा गोसाईं से)कोसी का घटवार (शेखर जोशी)
C.किसी चीज को न जानना यदि गलत है, तो जानबूझकर न भूलपाना, हमेशा जोंक की तरह उससे चिपटे रहना, यह भी गलत है। (डॉ. मुकर्जी लतिका से कहते हैं)परिंदे (निर्मल वर्मा)
D.लोक अपने यहाँ अलौकिक बातें कब तक होने देगा! भव सागर की जल तरंगों पर थिर होना कब संभव है? (नरेन्द्र का कथन)कानों में कंगना (राधिका रमण प्रसाद सिंह)

12. 'परीक्षा गुरु' उपन्यास के प्रकरणों के शीर्षकों को, पहले से बाद के क्रम में लगाए :

(A) सुख दुःख
(B) सबमैं हाँ (!)
(C) साहसी पुरुष
(D) बिगाड़ का मूल-विवाद
(E) अकालमैं अधिकमास
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) (E), (B), (A), (D), (C)
Solution:'परीक्षा गुरु' श्रीनिवासदास का उपन्यास है। यह उपन्यास 41 प्रकरणों में विभक्त है, जिनमें प्रमुख प्रकरणों का क्रमवार विवरण है-
(1) सौदागर की दुकान, (2) अकाल में अधिकमास, (3) संगति का फल, (4) मित्र विलाप, (5) विषयासक्त, (6) भले बुरे की पहचान, (7) सावधानी (होशयारी), (8) सबमै हाँ (!), (9) सभासद, (10) प्रबंध (इंतजाम), (11) सज्जनता, (12) सुख दुख, (13) बिगाड़ का मूल विवाद, (14) पत्र व्यवहार, (15) प्रिय अथवा पिय?, (16) सुरा (शराब), (17) स्वतंत्रता और स्वेच्छाचार, (18) क्षमा, (19) स्वतंत्रता, (20) कृतज्ञता, (21) संशय, (23) प्रामाणिकता, (24) हाथ से पैदा करने वाले और पोतड़ो के अमीर, (25) साहसी पुरुष इत्यादि। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं- लाल मदनमोहन, लाला ब्रजकिशोर, चुन्नीलाल, शंभूदयाल आदि।

13. 'झूठा सच' के पहल खंड 'वतन और देश' में भोलापाँधे की गली की औरतों के बीच अपने विचारों का प्रचार करने के लिए आयी हिन्दू रक्षा कमेटी की कार्यकर्ताओं के नामों का सही युग्म है:

Correct Answer: (c) ईश्वर कौर- ज्ञानदेवी
Solution:

'झूठा सच' के पहले खण्ड 'वतन और देश' में भोला पाँधे की गली की औरतों के बीच अपने विचारों का प्रचार करने के लिए आयी हिन्दू-रक्षा कमेटी की कार्यकर्ताओं के नामों में 'ईश्वर कौर ज्ञानदेवी' सही युग्म है। झूठा सच यशपाल का उपन्यास है। यह दो भागों मे प्रकाशित है- भाग-1- वतन और देश (1958 ई.), भाग-2- देश का भविष्य (1960 ई.)। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं- तारा, जयदेव, कनक, गिल, डॉक्टर नाथ, नैयर, सूर जी, सोमराज, रावत, ईसाक, असद और प्रधानमंत्री काल्पनिक पात्र हैं। यशपाल प्रगतिवादी विचारधारा के उपन्यासकार हैं। इनके अन्य प्रमुख उपन्यास हैं- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, मनुष्य के रूप, अमिता, बारह घण्टे, अप्सरा का श्राप, क्यों फँसे? और मेरी तेरी उसकी बात आदि।

14. 'चंद्रगुप्त' नाटक के चतुर्थ अंक में कुल कितने दृश्य हैं?

Correct Answer: (a) 14
Solution:

'चन्द्रगुप्त' नाटक के चतुर्थ अंक में कुल 14 (चौदह दृश्य हैं। चन्द्रगुप्त जयशंकर प्रसाद का नाटक है। इसके चतुर्थ अंक में 14 दृश्य हैं- (1) मगध में राजकीय उपवन-कल्याणी, (2) पथ में राक्षस और सुवासिनी, (3) परिषद गृह, (4) प्रकोष्ट में चन्द्रगुप्त का प्रवेश, (5) प्रभात राजमन्दिर का एक प्रान्त, (6) सिंधुतट पर्ण कुटीर, (7) कपिशा में एलेग्जेंड्रिया का राजमन्दिर, (8) पथ में चन्द्रगुप्त और सैनिक, (9) ग्रीक शिविर, (10) युद्धक्षेत्र के समीप चाणक्य और सिंहरण, (11) शिविर का एक अंश, (12) पथ में साइवर्टियश और मेगास्थनीज, (13) दाण्डायन का तपोवन : ध्यानस्थ चाणक्य, (14) राजसभा । चन्द्रगुप्त, चाणक्य, शकटार, सिंहरण, आम्भीक, राक्षस, पर्वतक, सिल्यूकस, कार्नेलिया, कल्याणी, एलिस, मालविका आदि चन्द्रगुप्त नाटक के प्रमुख पात्र हैं। जयशंकर प्रसाद के अन्य नाटक हैं- सज्जन, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, कामना, स्कन्दगुप्त, ध्रुवस्वामिनी आदि।

15. "जिस तरह कहानी जिंदगी का एक अंश मात्र ही होती है, एक पक्ष .....एक पहलू, उसी तरह यह भी मेरी जिंदगी का एक टुकड़ा मात्र ही है..." - यह वाक्यांश निम्नलिखित में से किस रचना के बारे में स्वयं लेखिका ने लिखा है?

Correct Answer: (c) एक कहानी यह भी
Solution:"जिस तरह कहानी जिंदगी का एक अंश मात्र ही होती है, एक पक्ष .......एक पहलू, उसी तरह यह भी मेरी जिंदगी का एक टुकड़ा मात्र ही है..." यह वाक्यांश 'एक कहानी यह भी' के विषय में लेखिका मन्नू भण्डारी ने कहा है। यह इनका आत्मकथात्मक उपन्यास है। इसके विषय में लेखिका कहती हैं- "आज तक मै दूसरो की जिन्दगी पर आधारित कहानियाँ ही सुनाती आयी थी, पर इस बार मैंने अपनी कहानी लिखने की जुर्रत की है।” महाभोज, आपका बंटी, एक इंच मुस्कान आदि इनके अन्य उपन्यास हैं। ठकुरी बाबा महादेवी वर्मा का रेखाचित्र है। गोदान, रंगभूमि, कर्मभूमि, प्रेमाश्रम, गबन, कायाकल्प आदि प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यास हैं। आपहुदरी एवं हादसे रमणिका गुप्ता की आत्मकथा है।

16. 'जिन्दगीनामा' उपन्यास में किन कवितांशों और गीतों, का उपयोग किया गया है:

(A) अव्वल अल्ला नूर उपाया कुदतर के सब बन्दे एक नूर ते सब जग उपजा कौन भले कौन मन्दे
(B) जे तू अँखियाँदे सामने नी रैणाँ ते बीबा मेरा दिल मोड़ दे।
(C) चिड़ी चोंच भर ले गई, नदी न घटयो नीर दान दिए धन ना घटे, कह गए भगत कबीर।
(D) जिन पावन भुई बहु फिरे, घूमें देस बिदेस। पिया मिलन जब होइया, आँगन भया बिदेस
(E) न मैं अरबी न मैं लाहोरी/न मैं हिन्दी शहर नागौरी/न मैं हिन्दू तुर्क पिशौरी/न मैं रहैदा विच्च नदौन/ बुल्ला कीह जाने मैं कौन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (A), (C), (E)
Solution:'जिन्दगीनामा' कृष्णा सोबती का उपन्यास है। इस उपन्यास में निम्नलिखित गीतों का प्रयोग हुआ है-
  • अव्वल अल्ला नूर उपाया, कुदरत के सब बन्दे।
    क नूर ते सब जग उपजा, कौन भले कौन मन्दे ।।
  • चिड़ी चोंच भर ले गई नदी न घटयो नीर ।
    दान दिए धन ना घटे, कह गए भगत कबीर ।।
  • न मैं अरबी, ने मैं लाहौरी, न मैं हिन्दी शहर नागौरी।
    न मैं हिन्दू तुर्क पिशौरी, न मैं रहैदा, विच्च नदौन, बुल्ला कीह जाने मैं कौन ।।
    कृष्णा सोबती के अन्य प्रमुख उपन्यास हैं मित्रो मरजानी, सूरजमुखी अंधेरे के, दिलोदानिश और समय सरगम आदि।

17. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन (I) : 'गोदान' के अनुसार बेलारी और सेमरी में केवल पाँच मील का अन्तर है।
कथन (II) : 'वह ज्ञान, जो मानवता को पीस डाले, ज्ञान नहीं है, कोल्हू है' - यह कथन 'गोदान' उपन्यास के पात्र ओंकारनाथ का है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) कथन I सत्य है, लेकिन कथन II असत्य है
Solution:गोदान प्रेमचन्द का प्रमुख उपन्यास है। गोदान के अनुसार बेलारी और सेमरी में केवल पाँच मील का अन्तर है। जबकि वह ज्ञान, जो मानवता को पीस डालें, ज्ञान नहीं है, कोल्हू है। यह कथन गोदान उपन्यास के पात्र ओंकारनाथ का नहीं है अपितु यह कथन गोदान उपन्यास के प्रमुख पात्र 'मेहता' का है, जो वह गोविन्दी से कहता है। गोदान उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं- होरी, धनिया, गोबर,रायसाहब, ओंकारनाथ, भोला, हीरा, गोविन्दी, मिर्जा खुर्शीद, दातादीन, मातादीन आदि। प्रेमचंद के अन्य प्रमुख उपन्यास व उनके पात्र हैं-
उपन्यासप्रमुख पात्र
रंगभूमि - सूरदास, सोफिया, विनय, प्रभु सेवक, जानसेवक, ताहिर अली, राजा महेन्द्र कुमार सिंह ।
सेवासदन - सुमन, गजाधर, भोली, कृष्णचन्द्र, शांता, पद्मसिंह ।
कर्मभूमि - सुखदा, रेणुका, नैना, लाला सकरकांत, अमरकांत ।
कायाकल्प - यशोदानन्दन, चक्रधर, वज्रधर, रानी देवीप्रिया।
प्रेमाश्रम - प्रेमशंकर, ज्ञानशंकर, मनोहर, बलराज, प्रभाशंकर, दयाशंकर आदि।
गबन - रामनाथ, देवीदीन, इन्द्रभूषण, जालपा, रतन, जोहरा, रामेश्वरी आदि।

18. 'अनुकरण का आशय है ऐसे प्रभाव का उत्पादन जो किसी स्थिति, अनुभूति अथवा व्यक्ति के शुद्ध, प्रकृत रूप से उत्पन्न होता है।' उपर्युक्त कथन किसका है?

Correct Answer: (e) (*)
Solution:

"अनुकरण का आशय है ऐसे प्रभाव का उत्पादन जो किसी स्थिति, अनुभूति अथवा व्यक्ति के शुद्ध, प्रकृत रूप से उत्पन्न होता है।" यह कथन यॉट्स का है। जो कि विकल्प में नहीं दिया गया है। अतः यह प्रश्न असंगत है। गिलबर्ट मरे ऑस्ट्रेलियाई मूल के ब्रिटिश शास्त्रीय विद्धान और सामाजिक बुद्धिजीवी थे।

19. 'संस्कृति' और सौंदर्य' में आए कथन हैं :

(A) 'अशोक के फूल' केवल एक फूल की कहानी नहीं, भारतीय संस्कृति का एक अध्याय है।
(B) रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भारत को 'महामानव सागर' कहा।
(C) द्विवेदी जी जहाँ संस्कृति की केवल 'संग्राहकता' की 'हिमायत' करते हैं, वहाँ अज्ञेय 'त्याग' का जिक्र करना नहीं भूलते।
(D) प्रसाद ने 'रहस्यवाद' शीर्षक निबंध में सौदर्यानुभूति की पंरपरा को पुननिर्मित करने का प्रयास किया था।
(E) नाट्यशास्त्र में नाटक की उत्पत्ति की जो कथा दी गई उसके अनुसार देवता के स्थान पर दैत्यों को ही नाटक कर सकने में समर्थ समझा गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल (A), (B), (D)
Solution:'संस्कृति और सौन्दर्य' निबंध में आए कथन निम्न हैं-
(1) 'अशोक के फूल' केवल एक फूल की कहानी नहीं, भारतीय संस्कृति का एक अध्याय है।
(2) रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भारत को 'महामानव सागर' कहा है।
(3) प्रसाद ने 'रहस्यवाद' शीर्षक निबंध में सौन्दर्यानुभूति की पंरपरा को पुननिर्मित करने का प्रयास किया था।
→ संस्कृति और सौन्दर्य निबंध के लेखक नामवर सिंह हैं। नामवर सिंह की प्रमुख कृतियाँ हैं- छायावाद, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी पंरपरा की खोज, वाद विवाद संवाद इत्यादि ।

20. "पींगी बनकर घूमना उसके लिए इतना ही सहज था, जितना बांसुरी बजा लेना।" इस कथन में 'पौंगी' का अर्थ क्या है?

Correct Answer: (b) बौद्ध साधु
Solution:"पाँगी बनकर घूमना उसके लिए इतना ही सहज था, जितना बाँसुरी बजा लेना" उक्त कथन में 'पाँगी' का अर्थ 'बौद्ध साधु' है।
उपयुक्त कथन विष्णु प्रभाकर कृत 'आवारा मसीहा' से है। यह इनकी जीवनी विधा की रचना है। यह बांग्ला साहित्यकार 'शरतचन्द्र' की जीवनी है। इनके अन्य ग्रंथ ढलती रात, स्वप्नमयी, अर्द्धनारीश्वर, धरती अब भी घूम रही है आदि हैं।