(A) किन्तु मैं ही तो
तेरी गोद में बैठा मोद-भरा बालक हूँ
(B) श्रेय नहीं कुछ मेराः
मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में
(C) राजन! पर मैं तो
कलावन्त हूँ नहीं, शिष्य साधक हूँ
(D) मुझे ओट दे - बँक ले छा ले ओ शरण्य !
(E) हाँ, मुझे स्मरण है :
बदली-कौंध-पत्तियों पर वर्षा - न्दों की पट-पट
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
Correct Answer: (a) (C), (A), (E), (D), (B)
Solution:'असाध्य वीणा' कविता में आई उक्तियों संवादों को कविता में आने के आधार पर पहले से बाद का क्रम निम्न है-
(1) राजन ! पर मै तो कलावन्त हूँनहीं, शिष्य साधक हूँ।
(2) किन्तु मैं ही तो तेरी गोद में बैठा मोद-भरा बालक हूँ
(3) हाँ, मुझे स्मरण है: बदली कौंध पत्तियों पर वर्षा-बूंदों की पट पट
(4) मुझे ओट दें बँक ले-छा ले ओ शरण्य !
(5) श्रेय नहीं कुछ मेरा मै तो डूब गया था स्वयं शून्य में।
→ असाध्यवीणा काव्य कृति के रचयिता सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय हैं। इनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं- भग्नदूत, चिन्ता, इत्यलम, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, आँगन के पार द्वार आदि।