NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 (हिन्दी)

Total Questions: 100

51. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A) : सन् 1936 में 'प्रगतिशील लेखक संघ' की स्थानपना हुई और उसी वर्ष उसके वार्षिक अधिवेशन के सभापति प्रेमचंद हुए।
कारण (R) : सन् 1936 में प्रकाशित अपने काव्य संग्रह का नाम सुमित्रानंदन पंत ने 'युगांत' रखा।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) दोनों (A) और सत्य है और (R),(A) की सही व्याख्या नहीं है।
Solution:दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, परन्तु (R),(A) की सही व्याख्या नहीं करता।
• लखनऊ में अप्रैल 1936 ई. में 'प्रगतिशील लेखक संघ' की स्थापना हुई और उसी वर्ष वार्षिक अधिवेशन के समय से हिंदी में प्रगतिवादी आन्दोलन की शुरूआत होती है। इस अधिवेशन के प्रथम अध्यक्ष मुंशी प्रेमचन्द थे।
• प्रगतिवाद का सैद्धान्तिक आधार मार्क्स का द्वन्द्रात्मक भौतिकवाद है। राजनीतिक के क्षेत्र में जो समाजवाद या साम्यवाद है, साहित्य के क्षेत्र मे वही प्रगतिवाद है।
• सन् 1936 ई. में प्रकाशित अपने काव्य संग्रह का नाम सुमित्रानंद पंत ने 'युगांत' रखा। इसी रचना के आधार पर 'छायावाद' का अन्त माना जाता है। 'युगांत' पंत की प्रगतिवादी रचना है।
• सुमित्रानंद पंत की प्रथम छायावादी रचना 'उच्छवास' तथा अन्तिम छायावादी रचना 'गुंजन' है।

52. 'अमृतसर आ गया' कहानी में किस स्टेशन के बाद हिंदू-सिख मुसाफिरों की चुप्पी गहरी हो गई?

Correct Answer: (b) वजीराबाद
Solution:'अमृतसर आ गया' कहानी में 'वजीराबाद' स्टेशन के बाद हिंदू-सिख मुसाफिरों की चुप्पी गहरी हो गई।
• 'अमृतसर आ गया' भीष्म साहनी द्वारा लिखित कहानी है। यह कहानी भारत के विभाजन के परिदृश्य पर लिखी गई है।
• पाली, भटकती राख, खून का रिश्ता, चीफ की दावत, सिर का सदका, पहला पाठ आदि इनकी अन्य कहानियाँ हैं।

53. 'आधे अधूरे' नाटक के संबंध में सत्य कथन हैं:

(A) यह नाटक मौजूदा जीवन की विडम्बना के कुछेक सघन बिन्दुओं को रेखांकित करता है।
(B) श्री ओम शिवपुरी को यह समकालीन ज़िन्दगी का पहला सार्थक हिन्दी नाटक लगता है।
(C) इसके पात्र, स्थितियाँ एवं मनः स्थितियाँ यथार्थपरक तथा विश्वसनीय नहीं लगती।
(D) 'आधे-अधूरे' आज के जीवन के एक गहन अनुभव खंड को मूर्त करता है।
(E) इस नाटक की भाषा में वह सामर्थ्य नहीं है जो समकालीन जीवन के तनाव को पकड़ सके।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (B), (D)
Solution:आधुनिकताबोध के नाटककार मोहन राकेश कृत 'आधे- अधूरे' (1969 ई.) नाटक के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित हैं-
1.यह नाटक मौजूदा जीवन की विडम्बना के कुछेक सघन बिन्दुओं को रेखांकित करता है।
2. श्री ओम शिवपुरी को यह समकालीन जिन्दगी का पहला सार्थक हिंदी नाटक लगता है।
3. 'आधे-अधूरे' आज के जीवन के एक गहन अनुभव खंड को मूर्त करता है।
4. 'आधे-अधूरे' नाटक को 'मील का पत्थर' भी कह जाता है।

54. "बहुत कम लोग यह जानते हैं, आज हम जो हैं वो किसकी बदौलत? किसने हमें जनसेवा की ओर लगाया? हमारी आँखें खोलीं? हमें सही रास्ता दिखाया ? किससे हमने हमेशा प्रेरणा ली? अपना कर्तव्य किया और आगे बढ़े।" 'बकरी' नाटक का उक्त संवाद किस पात्र के द्वारा कहा गया?

Correct Answer: (b) दुर्जन
Solution:उपर्युक्त संवाद 'बकरी' नाटक के पात्र 'दुर्जन' के द्वारा कहा गया।
इस नाटक के प्रमुख पात्र नट, नटी, भिश्ती, कर्मसिंह, युवक, सत्यवीर, सिपाही, विपती आदि।
• सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कृत बकरी (1974 ई.) नाटक की पहली प्रस्तुति 'जन नाट्य मंच' द्वारा 13 जुलाई, 1974 ई. को त्रिवेणी कला संगम, नई दिल्ली की उद्यान रंगशाला में हुआ था।
• सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जनवादी नाटककार हैं। इनके नाटक लोकनाट्य शैली में आबद्ध हैं। इनके तीन नाटक हैं- बकरी (1974 ई.), लड़ाई (1979 ई.) और अब गरीबी हटाओ (1981)

55. 'भारत दुर्दशा' नाटक से संबंधित कौन से कथन उपयुक्त है :

(A) इस नाटक में पाँचवे अंक का स्थान किताबखाना है।
(B) नाटक में सत्यानाश फौजदार का प्रवेश 'दूसरे अंक' में होता है।
(C) 'अपरस सोल्हा छून रचि, भोजन प्रीति छुड़ाय' यह संवाद सत्यानाश फौजदार द्वारा कहा गया है।
(D) इस नाटक का प्रकाशन संवत् 1933 में हुआ।
(E) 'निर्लज्जता' नामक पात्र 'तीसरे अंक' में आती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (e) (*)
Solution:'भारत दुर्दशा' नाटक से संबंधित कुटों में कोई भी कूट सही नहीं हैं। भारत दुर्दशा नाटक से सम्बन्धित उपयुक्त कथन हैं-
1. इस नाटक में पाँचवें अंक का स्थान किताबखाना है।
2. इस नाटक में सत्यानाश फौजदार का प्रवेश तीसरे अंक में होता है।
3. अपरस सोल्हा छून रचि, भोजन प्रीति छुड़ाय 'यह संवाद सत्यानाश फौजदार द्वारा कहा गया हैं।'
4. इस नाटक का प्रकाशन संवत् 1937 में हुआ।
5. निर्लज्जता नामक पात्र दूसरे अंक में आती है।
भारतेन्दु के प्रमुख मौलिक नाटक वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (प्रहसन, 1873 ई.), सत्य हरिश्चन्द्र (1875 ई.), विषस्य विषमौषधम् (भाण, 1876 ई.), भारत दुर्दशा (नाट्य रासक 1880 ई.), नीलदेवी (गीतिरूपक, 1881 ई.), अंधेर नगरी (प्रहसन, 1881 ई.) आदि हैं।

56. 'ईदगाह' कहानी के संबंध में उपयुक्त कथन है:

(A) हामिद को अपने अब्बाजान एवं अम्मीजान के न होने का बहुत दुख है।
(B) महमूद ने सिपाही खरीदा है।
(C) नूरे को भिश्ती पसंद आया है।
(D) सम्मी अपनी खजरी हामिद से बदलना चाहता है।
(E) बच्चे हामिद ने बूढ़े हामिद का पार्ट खेला था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (B), (D), (E)
Solution:'ईदगाह' कहानी के संबंध में उपयुक्त कथन निम्नलिखित -
1. महमूद ने सिपाही खरीदा है।
2. सम्मी अपनी खजरी हामिद से बदलना चाहता है।
3. बच्चे हामिद ने बूढ़े हामिद का पार्ट खेला था।
4. 'ईदगाह' 1933 ई. में मानसरोवर के प्रथम अंक में प्रकाशित कहानी है
5. यह कहानी बाल मनोविज्ञान पर आधारित कहानी है।
6. मोहसिन को भिश्ती पसंद आया।
7. नूरे को वकील से प्रेम है।
8. सम्मी ने धोबिन खरीदा।
9. हामिद ने बूढ़ी दादी के लिए चिमटा खरीदा।
प्रेमचंद की अन्य प्रमुख कहानियाँ - संसार का अनमोल रतन, सोजे वतन, दो बैलों की कथा, अलग्योझा, नरक का मार्ग, नैराश्य, पूस की रात, कफन, सवा सेर गेहूँ, नमक का दारोगा, दूध का दाम आदि।

57. महात्मा गाँधी की अध्यक्षता में गठित 'लिपि सुधार समिति' के संयोजक कौन थे?

Correct Answer: (a) काका कालेलकर
Solution:

महात्मा गाँधी की अध्यक्षता में गठित 'लिपि सुधार समिति' के संयोजक 'काका कालेलकर' थे। इस सम्मेलन में कुल 14 सुझावों को स्वीकार किया गया।
• उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 जुलाई, 1947 में आचार्य नरेन्द्रदेव की अध्यक्षता में नागरी लिपि सुधार समिति का निर्माण किया।
• नागरी प्रचारिणी सभा ने सन् 1945 ई. में नागरी लिपि सुधार हेतु एक समिति का गठन किया।

58. प्रताप नारायण मिश्र से संबंधित उपयुक्त कथन है:

(A) प्रताप नारायण मिश्र का जन्म सन् 1852 ई. में चुनार, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
(B) संस्कृत, उर्दू, फारसी, अंग्रेजी और बांग्ला में उनकी अच्छी गति थी।
(C) उन्होंने 'हिन्दी प्रदीप' पत्रिका का संपादन किया।
(D) दांत, भौं, आप, बात, धोखा, रिश्वत, बेगार, होली जैसे विषयों पर उन्होंने निबंध लिखे ।
(E) 'कलिकौतुक', 'भारत दुर्दशा', 'कलि प्रभाव' 'गो संकट' आदि उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल (B), (D), (E)
Solution:प्रताप नारायण मिश्र से संबंधित उपयुक्त कथन निम्नलिखित हैं-
1. संस्कृत, उर्दू, फारसी, अंग्रेजी और बांग्ला में उनकी अच्छी गति थी।
2. दांत, भौ, आप, बात, धोखा, रिश्वत, बेगार, होली जैसे विषयों पर उन्होने निबंध लिखे।
3. कलिकौतुक, भारत दुर्दशा, कलि प्रभाव, गो संकट आदि उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।
• प्रताप नारायण मिश्र को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिंदी का 'एडिसन' कहा है।
• प्रताप नारायण मिश्र का जन्म सन् 1856 ई. में उन्नाव, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
• 'हिन्दी प्रदीप' पत्रिका का संपादन बालकृष्ण भट्ट ने किया।

59. 'शक्तिः कवित्व बीजः संस्कार रूपः' काव्य हेतु 'शक्ति' के संदर्भ में यह कथन किस आचार्य का है?

Correct Answer: (c) मम्मट
Solution:

'शक्तिः कवित्व बीजः संस्कार रूपः काव्य हेतु 'शक्ति' के संदर्भ में यह कथन आचार्य मम्मट का है।
• आचार्य मम्मट का ग्रंथ 'काव्य प्रकाश' है।
भारतीय काव्यशास्त्र में काव्य-हेतु के तीन भेद बताये गए हैं-
(1) प्रतिभा (2) व्युत्पत्ति (3) अभ्यास ।
इनमें प्रतिभा सर्वप्रमुख काव्य हेतु है, जिसे कवित्व का बीज माना गया है। आचार्य राजशेखर ने प्रतिभा के दो भेद किये हैं-
(1) कारयित्री प्रतिभा (2) भावयित्री प्रतिभा।

60. निम्नांकित काव्य पंक्तियों में 'रीतिबद्ध काव्य धारा' के कवियों से जुड़ी काव्य पंक्तियां हैं:

(A) 'भाषा बृजभाषा रूचिर कहें सुमति सब काई'
(B) हिल मिलि जानें तासों मिलि के जनावै हेत 'हित की न जानै ताको 'हितू न बिसाहिए'
(C) 'अंखिन में अलसानि चितौनि में मंजु बिलासन की सरसाई'
(D) 'बेगि ही बूड़ि गई पंखियां, अंखियां मधु की मखियां भई मेरी'
(E) 'सो सुर सांच कहूँ नहीं छाड़त, ज्यो ही बजावै लिए मन बाजे'
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल (A), (C), (D)
Solution:1. भाषा ब्रजभाषा रूचिर कहें सुमति सब कोई। मिल संस्कृत पारस्यौ, पै अति प्रवाट जु होई।। - भिखारीदास
2. कुंदन को रंग फीकौ लगै, झलकै सब अंगन चारु गुराई। आँखनि में अलसानि, चितौनि में, मंजु विलासन की सरसाई ।। - मतिराम
3. बेगि ही बूड़ि गयीं पंखियाँ, आँखियां मधु की मखियां भई मेरी।। - देव
(4) 'हिल मिलि जाने तासों मिलि के जनावै हेत, हित को न जानै ताकों हितू न बिसाहिए' - बोधा (रीतिमुक्त कवि)