NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 (हिन्दी)

Total Questions: 100

61. नीचे दो कथन दिए गए है :

कथन (I) : 'मैला आँचल' के अनुसार मंगलादेवी काला आजार से पीड़ित होने पर स्वास्थ्य लाभ के लिए विश्वनाथपरसाद के घर ले जायी गयीं।
कथन (II) : 'राजा, महाराजा और सामन्त स्वार्थ के गुलाम बनते जा रहे हैं। प्रजा भीरू और कायर होती जा रही है।' - यह संवाद 'बाणभट्ट की आत्मकथा' में सुचरिता का है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) कथन I और कथन II दोनों असत्य है
Solution:उपर्युक्त कथन के आलोक में कथन (1) और कथन (II) दोनों असत्य हैं।
फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास मैला आँचल, (1954 ई.), परती परिकथा (1957 ई.), दीर्घतपा (1964 ई.), कितने चौराहे (1966 ई.), पलटू बाबू रोड़ (1979 ई.) आदि।
हजारीप्रसाद द्विवेदी के उपन्यास - बाणभट्ट की आत्मकथा (1946 ई.), चारुचंद्र लेख (1963 ई.), पुनर्नवा (1973 ई.), अनामदास का पोथा (1976 ई.)।

62. नीचे दो कथन दिए गए है :

कथन (I) : अज्ञेय की त्रिशंकु, आत्मनेपद, अद्यतन और संवत्सर आदि पुस्तकों में उनका आलोचनापरक चिंतन और वैचारिक साहित्य संकलित है।
कथन (II) : मुक्तिबोध की कृति 'एक साहित्यिक की डायरी' का धारावाहिक प्रकाशन 'हंस' पत्रिका में हुआ।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) कथन I सत्य है, लेकिन कथन II असत्य है
Solution:उपरोक्त कथन के आलोक में कथन (I) सत्य है तथा कथन (II) असत्य है।
• अज्ञेय की त्रिशंकु, आत्मनेपद, अद्यतन और संवत्सर आदि पुस्तकों में उनका आलोचना परक चिंतन और वैचारिक साहित्य संकलित है।
• 'एक साहित्यिक की डायरी' (1964 ई.) गजानन माधव मुक्तिबोध का कथात्मक निबंध संग्रह है। इसमें कुल 13 निबंध संग्रहित है।

63. 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ से संबंधित उपयुक्त कथन है :

(A) बच्चन की आत्मकथा पर मानतेन के आत्मचित्रण का प्रभाव है।
(B) बच्चनजी ने अपनी आत्मकथा के एक हिस्से का शीर्षक 'जीवन की आपाधापी में प्रस्तावित किया था।
(C) श्रावस्ती बस्ती का पुराना नाम था जिसे वेदों के अनुसार राजा श्राव ने बसाया था।
(D) डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनका परिवार मूलतः श्रावस्ती का था।
(E) बच्चन जी के जीवन और काव्य दोनों के विकास में 'रूबाइयात उमर खैयाम' और उसके अनुवाद का विशेष योगदान है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (A), (B), (E)
Solution:हरिवंश राय बच्चन कृत 'क्या भूलूँ क्या याद करू से संबंधित उपयुक्त कथन निम्नलिखित हैं-
1. बच्चन की आत्मकथा पर मानतेन के आत्म-चित्रण का प्रभाव है।
2. बच्चनजी ने अपनी आत्मकथा के एक हिस्से का शीर्षक 'जीवन की आपाधापी' में प्रस्तावित किया था।
3. बच्चन जी के जीवन और काव्य दोनों के विकास में 'रूबाइयात उमर खैयाम' और उसके अनुवाद का विशेष योगदान है।
हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा चार भागों में प्रकाशित है-
क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969 ई.), नीड़ का निर्माण फिर (1970 ई.), बसेरे से दूर (1977 ई.), तथा दशद्वार से सोपान तक (1985 ई.)।

64. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से सत्य कथन है:

(A) भारतेन्दु ने 'कालचक्र' शीर्षक अपने इतिहास जर्नल में 1873 में नोट किया - "हिन्दी नए चाल में ढली"
(B) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने काशी में आर्य नागरी समाज' नामक संस्था का निर्माण किया।
(C) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने 'आनंद रघुनंदन' नाटक लिखा।
(D) भारतेन्दु 1881 में 'भारतमित्र' के संपादक को अपनी कविता प्रकाशनार्थ भेजते हुए खड़ीबोली के लिए साधु भाषा का प्रयोग करते हैं।
(E) भारतेन्दु ने भाषा के बारे में लिखा है, "परदेशी वस्तु भाषा का भरोसा मत रखो। अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।"
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (A), (D), (E)
Solution:भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित -
1. भारतेन्दु ने 'कालचक्र' शीर्षक अपने इतिहास जर्नल में 1873 ई. में नोट किया - "हिंदी नए चाल में ढली।"
2. भारतेन्दु 1881 में 'भारतमित्र' के संपादक को अपनी कविता प्रकाशनार्थ भेजते हुए खड़ीबोली के लिए साधु भाषा का प्रयोग करते है।
3. भारतेन्दु ने भाषा के बारे में लिखा है, "परेदशी वस्तु और परदेशी भाषा का भरोसा मत रखो। अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।"
4. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने काशी में 'नेशनल थियेटर' की स्थापना की थी।
5. महाराज विश्वनाथ सिंह ने 'आनंद रघुनंदन' की रचना की थी जिसे आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी का प्रथम नाटक स्वीकार किया है।

65. "जो अपने धर्म से हीन पाप ही में गड़े रहते हैं वो माता-पिता की हित की बात को नहीं सुनते, सबसे बैर करते हैं। ऐसे जो पापी जन हैं, सो महाडेरावनी दक्षिण द्वार से जा नरकों में पड़ते हैं।"

यह गद्यखंड खड़ीबोली के किस आरम्भिक गद्यकार का है?

Correct Answer: (c) सदलमिश्र
Solution:उपर्युक्त गद्यखण्ड खड़ीबोली के आरम्भिक गद्यकार 'सदल मिश्र' का है। इनकी प्रमुख रचनाएँ- नासिकेतोपाख्यान, रामचरित, हिंदी पर्सियन शब्दकोश ।
• 'रानी केतकी की कहानी' नामक कथाग्रंथ की रचना इंशा अल्ला खाँ ने की।
• 'मुंतखबुत्तवारीख' की रचना सदासुखलाल नियाज ने की।
• 'प्रेम सागर' की रचना लल्लूलाल ने की।

66. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I (आलोचक)सूची-II (ग्रन्थ)
A नंददुलारे वाजपेयीI सुकवि संकीर्तन
B श्यामसुन्दर दासII नया साहित्य : नए प्रश्न
C महावीरप्रसाद द्विवेदीIII विचार और अनुभूति
D नगेन्द्रIV साहित्यालोचन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (A)-(II), (B)-(IV), (C)-(I), (D)-(III)
Solution:आलोचक एंव ग्रंथ का सही सुमेलन इस प्रकार है-
आलोचकग्रंथ
नंददुलारे वाजपेयीनया साहित्य: नए प्रश्न
श्यामसुन्दर दाससाहित्यालोचन
महावीर प्रसाद द्विवेदीसुकवि संकीर्तन
नगेन्द्रविचार और अनुभूति

67. कबीर की कविता पंक्ति बाजन दे बाजंतरी, कलि ककुही जनि छेड़' में 'बाजंतरी' शब्द का अर्थ है:

Correct Answer: (d) तुरही
Solution:कबीर की कविता- पंक्ति 'बाजन दे बाजंतरी, कलि ककुही जनि छेड़' में 'बाजंतरी' शब्द का अर्थ 'वीणा' है।
• कबीर की प्रमुख रचनाएँ साखी, सबद, रमैनी है। कबीर दास भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति के ज्ञानाश्रयी शाखा के संत कवि हैं।
• कबीर के शिष्य धर्मदास थे। जिन्होने इनके ग्रंथों का संपादन किया।

68. "कल्पना मन की कोई रहस्य पूर्ण क्रिया नहीं है, वह मन की अन्य क्रियाओं के समान ही होती है।" यह कथन किस पाश्चात्य चिंतक का है?

Correct Answer: (d) आई.ए.रिचर्डस
Solution:

"कल्पना मन की कोई रहस्य पूर्ण क्रिया नहीं हैं, वह मन की अन्य क्रियाओं के समान ही होती है।" यह कथन पाश्चात्य चिंतक 'आई.ए.रिचर्ड' का है। रिचर्डस को अंग्रेजी साहित्य में प्रथम बार व्यापक और व्यवस्थित सौन्दर्यशास्त्र के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। रिचर्ड्स के ग्रंथ निम्नलिखित हैं- (1) दि प्रिंसिपुल्स आफ लिटररी क्रिटिसिज्म (2) प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म (3) साइंस एण्ड पोएट्री (4) दि फिलासफी ऑफ रेटारिक ।
क्रोचे - क्रोचे प्रत्ययवादी दार्शनिक थे, ये आत्मवादी भी माने जाते हैं। क्रोचे ने अभिव्यंजनावाद का प्रवर्तन किया। क्रोचे के अनुसार-
" कलाकार में सौन्दर्य की उत्पत्ति होती है और भाव सौन्दर्य की पुनरुत्पत्ति होती है अर्थात स्रष्टा सौंदर्य का भागी भी होता है।
" क्रोचे की महत्तपूर्ण पुस्तकें निम्न हैं- न्यु एसेज आन एस्थेटिक, डिफेंस ऑफ पोएट ।
टी. एस. इलियट - इलियट के महत्वपूर्ण सिद्धांत निम्न है-
(1) मूर्त विधान सिद्धांत (2) संवेदनशीलता का असाहचर्य सिद्धांत इलियट की प्रमुख समालोचनात्मक कृतियाँ निम्नलिखित हैं- (i)द सेक्रेड वुड (ii) होमेज टु जॉन ड्राइडन (iii) एलिजाबेथेन एसेज (iv) एसेज एंशेट एण्ड मार्डन
कॉलरिज - कॉलरिज ने कल्पना सिद्धांत का प्रवर्तन किया है। कॉलरिज ने कल्पना के सम्बन्ध में लिखा है- "इसमें संश्लेषात्मक तथा जादुई शक्ति होती है जो विरोधी या विसंगवादी धर्मों में सन्तुलन स्थापित कती है।"

69. 'उसने कहा था' कहानी के आधार पर उपयुक्त कथन हैं :

(A) लाहौर के बंबूकार्ट वालों की बोली मरहम लगाने का काम करती है।
(B) वजीरा सिंह पलटन का विदूषक था। वह बाल्टी से गंदला पानी फेंकते हुए जर्मनी के बादशाह का तर्पण करने लगता है।
(C) सुबेदारनी ने अपने पति और बेटे को बचाने की गुहार लगाई।
(D) लहना सिंह दियासलाई से सिगरेट जला कर पीने लगा।
(E) लहना सिंह नं 77 रैफल्स में जमादार हो गया है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (B), (C), (E)
Solution:'उसने कहा था' कहानी के अधार पर उपयुक्त कथन हैं- वजीरा सिंह पलटन का विदूषक था, वह बाल्टी से गंदला पानी फेंकते हुए जर्मनी के बादशाह का तर्पण करने लगता है। तथा सुबेदारनी ने अपने पति और बेटे को बचाने की गुहार लगाई और लहना सिंह नं. 77 रैफल्स में जमादार हो गया है।
'उसने कहा था' चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा सन् 1915 ई. में लिखी गयी कहानी है। यह प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखी गई प्रेमसंवेदना की कहानी है।
आचार्य शुक्ल द्वारा 'उसने कहा था' कहानी के विषय में कथन हैं- " घटना इसकी ऐसी है जैसे बराबर हुआ करती है, पर उसमें से भीतर से प्रेम का एक स्वर्गीय स्वरूप झाँक रहा है- केवल झाँक रहा है निर्लज्जता के साथ पुकार या कराह नहीं रहा है। कहानी भर में कहीं प्रेम की निर्लज्जता, प्रगल्भता, वेदना की वीभत्स विवृत्ति नही है। सुरुचि के सुकुमार से सुकुमार स्वरूप पर कहीं आघात नहीं पहुंचता। इसकी घटनाएँ ही बोल रही हैं, पात्रों के बोलने की अपेक्षा नहीं।"

70. 'मुर्दहिया' में तुलसीराम जी के चाचा (मुनेस्सर और नग्गर) उत्तर प्रदेश में प्रचलित किस पंथ के धर्मगुरु थे?

Correct Answer: (c) शिवनारायण पंथ
Solution:'मुर्दहिया' में तुलसीराम के चाचा (मुनेस्सर और नग्गर) उत्तर प्रदेश में प्रचलित 'शिवनारायण पंथ' के धर्मगुरू थे। 'मुर्दहिया' तुलसीराम की आत्मकथा है, यह दो भागों में विभाजित है प्रथम भाग का नाम 'मुर्दहिया' जिसका प्रकाशन 1910 में हुआ। दूसरे भाग का नाम मणिकर्णिका है इसका प्रकाशन 2013 ई. में हआ।