TGT and PGT (Hindi previous year questions) (Part-VI)

Total Questions: 50

21. किसी भी विषय पर एक तत्कालीन व्याख्यान, जिसके प्रमाणीकरण न हो, उसे कहते हैं

Correct Answer: (b) कल्पना
Solution:किसी भी विषय पर एक तत्कालीन व्याख्यान, जिसके प्रमाणीकरण न हो, उसे कल्पना कहते हैं।

22. "गुरु के अध्यापन से मंदबुद्धि भी शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर सकता है,किन्तु काव्य रचना के लिए प्रतिभा का होना अनिवार्य है।"

- यह कथन किसका है?

Correct Answer: (a) भामह
Solution:"गुरु के अध्यापन से मंदबुद्धि भी शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर सकता है, किन्तु काव्य रचना के लिए प्रतिभा का होना अनिवार्य है।" कथन भामह का है।

23. काव्य पर उपलब्ध प्रथम ग्रंथ है:

Correct Answer: (c) काव्यालंकार
Solution:'काव्यालंकार' काव्य पर उपलब्ध प्रथम ग्रंथ है। काव्यालंकार भामह का ग्रंथ है। यह ग्रंथ छः परिच्छेदो में विभक्त है। इस ग्रंथ में काव्य के साधन, लक्षण, भेद, अलंकार, काव्य दोष आदि का चित्रण हुआ है। 'काव्यप्रकाश' मम्मट का ग्रंथ है, 'नाट्यशास्त्र' भरतमुनि का तथा 'काव्यादर्श' दण्डी का प्रमुख ग्रंथहैं।

24. "शब्दार्थों सहितौ काव्यम् किसने कहा है?

Correct Answer: (d) भामह
Solution:"शब्दार्थों सहितौ काव्यम्" भामह का कथन है आचार्य 'विश्वनाथ' ने 'वाक्यं रसात्मक काव्यम् कहकर काव्य लक्षण दिया है। मम्मट ने " तद्दौषौ शब्दार्थो सगुणावलंकृति पुनः क्वापि।" कहा है जबकि जगन्नाथ ने "रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्" कहकर अपना काव्य लक्षण प्रस्तुत किया है।

25. “कविता हमारे परिपूर्ण क्षणों की वाणी है" यह काव्य परिभाषा है:

Correct Answer: (d) सुमित्रानंदन पंत
Solution:"कविता हमारे परिपूर्ण क्षणों की वाणी है।"
काव्य की यह परिभाषा 'सुमित्रानंदन पंत' की है।

26. "रसौ वै सः"- किस ग्रंथ में कहा गया है?

Correct Answer: (a) तैत्तिरीय उपनिषद
Solution:"रसौ वै सः" तैत्तिरीय उपनिषद में कहा गया है। भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में लिखा है "विभावानु- भावव्यभिचारी संयोगाद्रस निष्पति।" काव्यादर्श दण्डी का ग्रंथ है। इन्होंने इसमें मुख्यतः अलंकारो का चित्रण किया है। ध्वन्यालोक आनन्दवर्धन का ग्रंथ है। इन्होने 'ध्वनि सम्प्रदाय' का प्रवर्तन किया।

27. रस की अनुभूति कराने में अभिधा शक्ति प्रधान होती है- ऐसा मत है:

Correct Answer: (a) भट्टनायक
Solution:भट्टनायक का मत है कि रस की अनुभूति कराने में अभिधा शक्ति प्रधान होती है। भट्टनायक अभिधावादी आचार्य माने जाते हैं। भट्टनायक ने भरतमुनि के रससूत्र में आये 'संयोग' और 'निष्पत्ति' की व्याख्या की है। इनका सिद्धांत भुक्ति या भोगवाद कहलाता है।

28. साधारणीकरण आलम्बनत्व धर्म का होता है- किसने कहा है?

Correct Answer: (c) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
Solution:"साधारणीकरण आलम्बनत्व धर्म का होता है।" यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है।डॉ. नगेन्द्र के अनुसार कवि की अनुभूति का साधारणीकरण होता है। श्यामसुंदर दास के अनुसार सहृदय के चित्त का साधारणीकरण होता है। साधारणीकरण की अवधारणा सर्वप्रथम भट्टनायक ने प्रस्तुत की।

29. नाट्यशास्त्र के किस अध्याय में 'रस क्या है' पर चर्चा की गई है?

Correct Answer: (d) छठे
Solution:नाट्यशास्त्र के 'छठे' अध्याय में 'रस क्या है पर चर्चा की गई है। नाट्यशास्त्र भरतमुनि का ग्रंथ है। 36 अध्यायों में भरतमुनि ने रंगमंच, अभिनेता, रस, दर्शक आदि तथ्यों का विवेचन किया है।

30. किस समीक्षक ने लोल्लट के रस निष्पत्ति संबंधी मत को मीमांसा दर्शन पर आधारित या भट्टनायक की रस व्याख्या को सांख्य दर्शन से जोड़ना गलत माना है?

Correct Answer: (d) नगेन्द्र
Solution:डॉ. नगेन्द्र ने लोल्लट के रस निष्पत्ति संबंधी मत को मीमांसा दर्शन पर आधारित या भट्टनायक की रस व्याख्या को सांख्य दर्शन से जोड़ना गलत माना है।