TGT and PGT (Hindi previous year questions) (Part-VI)

Total Questions: 50

31. संचारी भाव नहीं है:

Correct Answer: (b) क्रोध
Solution:क्रोध संचारी भाव नहीं है अपितु क्रोध रौद्र रस का स्थायी भाव है जबकि निर्वेद, हर्ष और विषाद संचारी भाव हैं।

32. आचार्य कुन्तक का समय माना जाता है:

Correct Answer: (d) दसवीं शताब्दी
Solution:आचार्य कुन्तक का समय दसवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध माना जाता है। इन्हे वक्रोक्ति सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना गया है।

33. “रस यदि काव्य की आत्मा है तो ध्वनि काव्य-शरीर को बल देने वाली प्राणशक्ति अवश्य है"- यह कथन किसका है?

Correct Answer: (d) रामचन्द्र शुक्ल
Solution:"रस यदि काव्य की आत्मा है तो ध्वनि काव्यशरीर को बल देने वाली प्राणशक्ति अवश्य है" ध्वनि के सम्बन्ध में यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है।

34. आचार्य मम्मट ने अपने पूर्वाचार्यों के मतों का संग्रह करके काव्य-दोषों की संख्या बताई है:

Correct Answer: (a) 65
Solution:मम्मट ने अपने पूर्वाचार्यों के मतों का संग्रह करके काव्य दोषों की संख्या 65 मानी है।

35. प्रतिभा के दो भेद- भावयित्री प्रतिभा और कारयित्री प्रतिभा किसने माने हैं?

Correct Answer: (a) राजशेखर
Solution:प्रतिभा के दो भेद-भावयित्री प्रतिभा और कारयित्री प्रतिभा राजशेखर ने किया है। राजशेखर नेस्मृति, मति और प्रज्ञा बुद्धि के तीन भेद माने हैं।

36. काव्य हेतु को वामन ने कहा है:

Correct Answer: (a) काव्यांग
Solution:'लोको विद्याप्रकीर्णस्य काव्यांगनि' कहते हुए वामन ने काव्यहेतु के बदले 'काव्यांग' शब्द का प्रयोग करते हैं। इन्होने लोक, हतुक विद्या और प्रकीर्ण को काव्य हेतु माना है। भट्टतौत ने प्रतिभा को 'नव-नवोन्मेषशालिनीप्रज्ञा' कहा है और अभिनवगुप्त ने 'अपूर्ववस्तुनिर्माणक्षमा प्रज्ञा कहा है।

37. अभिनवगुप्त ने रसों की संख्या स्वीकार की है:

Correct Answer: (b) 9
Solution:अभिनवगुप्त ने रसों की संख्या 9 मानी है। इन्होने शान्त रस को नौवे रस के रूप में स्थापित किया है। भरतमुनि ने 9 रसों को मान्यता दी है। दण्डी ने आठ रस माने हैं।

38. जयदेव ने किस आचार्य के काव्य-लक्षण का उपहास करते हुए कहा है- 'जो सुधी काव्य को अनलंकृत मानता है, वह अग्नि को शीतल क्यों नहीं मानता'?

Correct Answer: (c) आचार्य आनंदवर्धन
Solution:जयदेव ने आचार्य आनन्दवर्धन के काव्य लक्षण का उपहास करते हुए कहा है जो सुधी काव्य को अनलंकृत मानता है, वह अग्नि को शीतल क्यों नहीं मानता।

39. “मैं सुकुमार नाथ बन जोग। तुमहि उचित तप मो कह भोगू ।। में कौन-सा अलंकार है?

Correct Answer: (c) काकु वक्रोक्ति
Solution:"मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू। तुमहिं उचित तप मो कह भोगू" उक्त पंक्ति में काकु वाक्रोक्ति अलंकार है।

जिस शब्द से कहने वाले व्यक्ति के कथन का अभिप्रेत अर्थ ग्रहण न कर श्रोता अन्य ही कल्पित या चमत्कारपूर्ण अर्थ लगाये और उसका उत्तर दे, उसे वक्रोक्ति अलंकार कहते हैं।

40. अर्थालंकार नहीं है:

Correct Answer: (d) वक्रोक्ति
Solution:'वक्रोक्ति' अर्थालंकार नहीं है। वक्रोक्ति शब्दालंकार का भेद है जबकि उपमा, रूपक तथा संदेह अर्थालंकार है।