TGT and PGT (Hindi previous year questions) (Part-VIII)

Total Questions: 50

1. वैदिक भाषा का वह रूप जो सर्वसाधारण द्वारा सहज रूप में विकसित हुआ:

Correct Answer: (b) पालि
Solution:'पालि' भाषा वैदिक भाषा का वह रूप है जो सर्वसाधारण द्वारा सहज रूप में विकसित हुआ। प्राचीन भारतीय आर्य भाषा का वह रूप जिसका पाणिनी की अष्टाध्यायी में विवेचन किया गया है, वह 'लौकिक संस्कृत' कहलाता है।

2. प्राकृत भाषा की साहित्य के क्षेत्र में प्रतिष्ठित करने का श्रेय किसे है?

Correct Answer: (a) महावीर स्वामी
Solution:प्राकृत भाषा को साहित्य के क्षेत्र में प्रतिष्ठित करने का श्रेय 'महावीर स्वामी' का है। 'पालि' का अर्थ 'बुद्ध वचन' होने से यह शब्द केवल मूल त्रिपिटक ग्रंथों के लिए प्रयुक्त हुआ। पालि में त्रिपिटक ग्रंथों की रचना हुई।

3. शालिभद्र सूरि को हिन्दी का प्रथम कवि किसने माना है?

Correct Answer: (d) गणपतिचन्द्र गुप्त
Solution:डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्तने शालिभद्र सूरी को हिंदी का प्रथम कवि माना है।

शालिभद्र सूरी द्वारा रचित 'भरतेश्वर बाहुबली रास' को हिंदी-जैन- रास परंपरा का आदिकाव्य माना जाता है।

4. निम्नलिखित में से किसका संबंध 'सिद्ध साहित्य' से नहीं है?

Correct Answer: (e) *
Solution:'स्वयंभू, देवसेन तथा धनपाल' का संबंध 'अपभ्रंश साहित्य' से है न कि 'सिद्ध साहित्य' से जबकि 'सरहपा' का संबंध 'सिद्ध साहित्य' से है। सरहपा को हिंदी का प्रथम कवि माना जाता है।

5. 'रासक' शब्द से 'रासो' की व्युत्पत्ति किसने नहीं मानी है?

Correct Answer: (b) रामचन्द्र शुक्ल
Solution:आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने 'रासक' शब्द से 'रासो' की व्युत्पत्ति नहीं मानी है, बल्कि इन्होने 'रसायण' शब्द से 'रासो'की व्युत्पत्ति मानी है जबकि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, माता प्रसाद गुप्त, गणपति चन्द्रगुप्त, नरोत्तम स्वामी तथा दशरथ शर्मा ने 'रासक' शब्द से 'रासो' की व्युत्पत्ति मानी है।

6. 'भरतेश्वर बाहुबाली रास' से हिन्दी में रासो परम्परा का प्रवर्तन किसने माना है?

Correct Answer: (c) डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त
Solution:'भरतेश्वर बाहुबली रास' से हिंदी में रासो परम्परा का प्रवर्तन 'डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त' ने माना है। मुनिजिन विजय, डॉ. दशरथ ओझा, डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त ने श्रीशालिभद्र सूरी द्वारा रचित 'भरतेश्वर बाहुबलीरास' को हिंदी-जैन-रास परम्परा का आदिकाव्य माना है।

7. निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत अद्वैतवाद का खण्डन करता है?

Correct Answer: (d) उपर्युक्त सभी
Solution:विशिष्टाद्वैत, द्वैताद्वैत तथा शुद्धाद्वैत सिद्धांत अद्वैतवाद का खण्डन करता है।

अद्वैतवाद के प्रवर्तक शंकराचार्य हैं। इसका ब्रह्मसूत्र है- अहं ब्रह्मास्मि। इसके अनुसार संसार में केवल ब्रह्म ही सत्य है तथा जगत मिथ्या है।

8. ब्रह्म सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं:

Correct Answer: (a) माधवाचार्य
Solution:वैष्णव भक्ति के सम्प्रदाय, प्रवर्तक तथा दर्शन निम्नलिखित हैं-
सम्प्रदायप्रवर्तकदर्शन
ब्रह्ममध्वाचार्यद्वैतवाद
श्रीसम्प्रदायश्रीरामानुजाचार्यविशिष्टाद्वैतवाद
रुद्रविष्णुस्वामीशुद्धद्वैतवाद
सनकादिनिम्बार्काचार्यद्वैताद्वैतवाद
रुद्रवल्लभाचार्यशुद्धाद्वैतवाद

9. डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त के अनुसार निम्नलिखित किस रचनाकार की कृति 'रास पंचाध्यायी' नहीं है?

Correct Answer: (d) कृष्णदास
Solution:डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त के अनुसार 'रास पंचाध्यायी' कृष्ण दास की कृति नहीं है जबकि अन्य सभी रचनाकारों की 'रासपंचाध्यायी' रचना है।

10. निम्नलिखित कवियों को कालक्रमानुसार आरोही क्रम में रखिए:

Correct Answer: (b) कुम्भनदास, सूरदास, गोविन्द स्वामी, नन्ददास
Solution:निम्नलिखित कवियों का आरोही क्रम इस प्रकार है-
कविजन्म
कुम्भनदास1468 ई.
सूरदास1478 ई.
स्वामी हरिदास1505 ई.
नंददास1533 ई.