TGT and PGT (Hindi previous year questions) (Part-XIII)

Total Questions: 50

21. इनमें से किस विद्वान का कोई भी ग्रंथ उपलब्ध नहीं है?

Correct Answer: (c) भट्ट लोल्लट
Solution:'भट्ट लोल्लट' का कोई भी ग्रंथ उपलब्ध नहीं है। भट्ट लोल्लट के सिद्धान्त का नाम उत्पत्तिवाद है।

22. 'रस गंगाधर' किसकी रचना है?

Correct Answer: (c) पं. जगन्नाथ
Solution:'रस गंगाधर' पं. जगन्नाथ की रचना है। इनका समय 17वीं शती का प्रथम चरण माना जाता है।

23. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिएः

सूची-I (आचार्य)सूची-II (सिद्धान्त)
(A) भट्ट लोल्लट(1) अभिव्यक्तिवाद
(B) शंकुक(2) भुक्तिवाद
(C) भट्ट नायक(3) अनुमितिवाद
(D) अभिनव गुप्त(4) उत्पत्तिवाद

कूट:

ABCD
(a)1234
(b)4321
(c)3413
(d)2143
Correct Answer: (b)
Solution:सूची-I को सूची-II से सही सुमेल निम्नलिखित है-
आचार्यसिद्धान्त
भट्ट लोल्लटउत्पत्तिवाद
शंकुकअनुमितिवाद
भट्ट नायकभुक्तिवाद
अभिनव गुप्तअभिव्यक्तिवाद

24. इनमें से किनके अनुसार 73 अलंकार है?

Correct Answer: (a) रुद्रट
Solution:'रुद्रट' के अनुसार अलंकारों की संख्या 73 हैं। रुद्रट काश्मीर के निवासी थे, इनका समय 9वीं शती का पूर्वार्द्ध माना जाता है। इनके द्वारा रचित रचना का नाम 'काव्यालंकार' है, इस ग्रन्थ में 16 अध्याय तथा कुल 734 श्लोक हैं।

25. साधारणीकरण की सही व्याख्या है

Correct Answer: (d) साधारणीकरण वह व्यापार है, जिसके द्वारा काव्य सृष्टि में कविनिर्मित पात्र व्यक्ति विशेष न बनकर सामान्य बन जाते हैं
Solution:दिये गये विकल्पों के अनुसार साधारणीकरण वह व्यापार है- जिसके द्वारा काव्य सृष्टि में कविनिर्मित पात्र व्यक्ति विशेष न बनकर सामान्य बन जाते हैं। साधारणीकरण की अवधारणा सर्वप्रथम भट्टनायक ने प्रस्तुत की।

इनके अनुसार विभावादि का साधारणीकरण होता है। आचार्य शुक्ल का अनुसार आलम्बनत्व धर्म का साधारणीकरण होता है। रस संप्रदाय के प्रवर्तक भरतमुनि माने जाते हैं।

26. “न कान्तं अपि निर्मूषं विभाति वनितामुखम्” यह कथन किसका है?

Correct Answer: (b) भामह
Solution:"न कान्तं अपि निर्मूषं विभाति वनितामुखम्" यह कथन भामह का है। अन्य आचार्योंके प्रमुख कथन हैं- रुद्रट- ननु शब्दार्थों काव्यम्। दण्डी - शरीर तावदिष्टार्थ व्यवच्छिना पदावली। मम्मट- तद्दौषौ शब्दार्थों सगुणावलंकृति पुनः क्वापि।

27. रस सिद्धांत की व्याख्या करके सबसे पहले दर्शक की महत्ता किसने स्वीकार की ?

Correct Answer: (b) अभिनव गुप्त
Solution:रस सिद्धांत की व्याख्या करके सबसे पहले दर्शक की महत्ता अभिनव गुप्त ने स्वीकार किया था। इनका समय 10वीं सदी का उत्तरार्द्ध माना जाता है। अभिनव गुप्त ने 'तन्त्रालोक' नामक श्रेष्ठ दार्शिनिक कृति की रचना की। यह ग्रन्थ तन्त्र शास्त्र का विश्वकोश माना जाता है।

28. 'भारती वृत्ति' का सम्बन्ध किस रस से है?

Correct Answer: (d) अद्भुत
Solution:'भारती वृत्ति' का सम्बन्ध 'अद्भुत' रस से हैं। अद्भुत रस का स्थायीभाव विस्मय है।

29. वेश-भूषा से जो भाव प्रदर्शित किये जाते हैं, उन्हें ______ कहा जाता है।

Correct Answer: (c) आहार्य
Solution:वेश-भूषा से जो भाव प्रदर्शित किये जाते हैं, उन्हें 'आहार्य' कहा जाता है। रस के चार अवयव होते हैं-

(i) विभाव
(ii) अनुभाव
(iii) संचारी भाव
(iv)स्थायी भाव

30. अपस्मार क्या है?

Correct Answer: (b) संचारी भाव का एक प्रकार
Solution:'अपस्मार' संचारी भाव का एक प्रकार है। संचारी भावों की संख्या 33 है और आठ स्थायी भाव है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपस्मार को दुखात्मक संचारी भावों की श्रेणी में रखा है।