Correct Answer: (c) महादेवी वर्मा
Solution:'रात के उर में दिवस की चाह का शर हूँ पंक्ति महादेवी वर्मा की है। महादेवी वर्मा को 'आधुनिक युग की मीरा' और 'हिन्दी के विशाल मन्दिर की वीणापाणि' कहा जाता है। महादेवी वर्मा की काव्य कृतियाँ हैं नीहार (1930 ई.), रश्मि (1932 ई.), नीरजा (1935 ई.),सांध्यगीत (1936 ई.), यामा (1940 ई.), दीपशिखा (1942 ई.), सप्तपर्णा (1960) 말)